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प्रल्हाद जोशी का कर्नाटक सरकार पर हमला: 52 दंगा मामले वापस लेना 'तुष्टीकरण की पराकाष्ठा'

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प्रल्हाद जोशी का कर्नाटक सरकार पर हमला: 52 दंगा मामले वापस लेना 'तुष्टीकरण की पराकाष्ठा'

सारांश

केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर 52 दंगा मामले वापस लेने को लेकर तीखा हमला बोला है — आलंद दंगों के 100 से अधिक आरोपियों को राहत देने को उन्होंने 'तुष्टीकरण की पराकाष्ठा' और संविधान के साथ समझौता करार दिया।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने 22 मई को कर्नाटक सरकार के 52 आपराधिक मामले वापस लेने के फैसले की कड़ी निंदा की।
आलंद सांप्रदायिक दंगों के 100 से अधिक आरोपियों के खिलाफ मामले वापस लिए जाने पर जोशी ने विशेष आपत्ति जताई।
हिंसा में एक पुलिस उपाधीक्षक और एक कांस्टेबल कथित तौर पर गंभीर रूप से घायल हुए थे।
जोशी ने आरोप लगाया कि सरकार कन्नड़ कार्यकर्ताओं और किसानों के मामलों को सांप्रदायिक दंगा मामलों के साथ मिलाकर जनता को गुमराह कर रही है।
कर्नाटक सरकार की ओर से इस आलोचना पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

केंद्रीय खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रल्हाद जोशी ने शुक्रवार, 22 मई को कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर तीखा प्रहार किया, जब राज्य सरकार ने विरोध प्रदर्शनों और सांप्रदायिक दंगों से जुड़े 52 आपराधिक मामले वापस लेने का फैसला किया। जोशी ने आरोप लगाया कि यह निर्णय कन्नड़ कार्यकर्ताओं की आड़ में 'दंगाइयों' को राहत देने के उद्देश्य से लिया गया है और यह संविधान तथा कानून के शासन के साथ सीधा समझौता है।

मुख्य आरोप और बयान

जोशी ने अपने बयान में कहा कि कर्नाटक सरकार सांप्रदायिक दंगाइयों की रिहाई को सुगम बनाने के लिए कन्नड़ कार्यकर्ताओं का बहाना बना रही है। उन्होंने कहा, 'तुष्टीकरण के नाम पर, वह संविधान और देश की कानूनी व्यवस्था की बलि दे रही है।' उनके अनुसार, मामले वापस लेने का यह फैसला कन्नड़ कार्यकर्ताओं की चिंता से कहीं अधिक अन्य हितों से प्रेरित है।

आलंद दंगा मामला: केंद्र में विवाद

जोशी ने विशेष रूप से आलंद सांप्रदायिक दंगों के मामले का उल्लेख किया, जिसमें 100 से अधिक आरोपियों के खिलाफ दर्ज मामले वापस लिए जाने की बात सामने आई है। उन्होंने इसे 'अत्यंत निंदनीय' करार दिया। उनके अनुसार, हिंसा के दौरान उत्तेजित युवकों के एक समूह ने कथित तौर पर धार्मिक नारे लगाए और पुलिसकर्मियों पर हमला किया, जिसमें एक पुलिस उपाधीक्षक और एक कांस्टेबल गंभीर रूप से घायल हो गए।

कानून-व्यवस्था पर सवाल

केंद्रीय मंत्री ने आगे आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में कानून प्रवर्तन कर्मी भी सुरक्षित नहीं रह गए हैं। उन्होंने कहा, 'ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार दंगाइयों को रिहा करके उनका सम्मान कर रही है — यह वास्तव में दुर्भाग्यपूर्ण है।' जोशी ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार किसानों के विरोध प्रदर्शन और कन्नड़ कार्यकर्ताओं से जुड़े मामलों को सांप्रदायिक दंगा मामलों के साथ मिलाकर जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रही है।

राजनीतिक संदर्भ

गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में उठा है जब कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और सत्तारूढ़ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के बीच पहले से ही तीखी राजनीतिक प्रतिस्पर्धा चल रही है। राज्य सरकार की ओर से इस आलोचना पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह मामला आने वाले दिनों में विधानसभा और राष्ट्रीय राजनीति दोनों में गर्म बहस का विषय बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह ध्यान देना ज़रूरी है कि राज्य सरकारों द्वारा मामले वापस लेना एक स्थापित कानूनी प्रक्रिया है — और इसमें सभी दलों की सरकारें शामिल रही हैं। असली सवाल यह है कि क्या इन 52 मामलों में से प्रत्येक की समीक्षा पारदर्शी कानूनी मानदंडों पर हुई, या यह निर्णय राजनीतिक विवेक से प्रेरित था। पुलिसकर्मियों पर हमले के मामलों को वापस लेना — यदि तथ्य सिद्ध हो — कानून प्रवर्तन के मनोबल पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है। कर्नाटक सरकार को इस पूरी प्रक्रिया की सार्वजनिक जवाबदेही देनी होगी, अन्यथा यह विवाद केवल BJP-कांग्रेस की जुबानी जंग बनकर रह जाएगा।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक सरकार ने कितने और कौन से मामले वापस लिए हैं?
कर्नाटक सरकार ने विरोध प्रदर्शनों और सांप्रदायिक दंगों से जुड़े कुल 52 आपराधिक मामले वापस लिए हैं। इनमें आलंद सांप्रदायिक दंगों के 100 से अधिक आरोपियों के खिलाफ दर्ज मामले भी शामिल हैं।
प्रल्हाद जोशी ने कर्नाटक सरकार की आलोचना क्यों की?
जोशी ने आरोप लगाया कि यह फैसला कन्नड़ कार्यकर्ताओं की आड़ में सांप्रदायिक दंगों के आरोपियों को राहत देने के लिए लिया गया है। उनके अनुसार यह संविधान और कानून के शासन के साथ समझौता है तथा तुष्टीकरण की राजनीति की पराकाष्ठा है।
आलंद दंगों में क्या हुआ था?
जोशी के अनुसार, आलंद में हिंसा के दौरान उत्तेजित युवकों के एक समूह ने कथित तौर पर धार्मिक नारे लगाए और पुलिसकर्मियों पर हमला किया, जिसमें एक पुलिस उपाधीक्षक और एक कांस्टेबल गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
क्या कर्नाटक सरकार ने इन आरोपों पर कोई जवाब दिया है?
22 मई तक कर्नाटक सरकार की ओर से जोशी की आलोचना पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह मामला आने वाले दिनों में राज्य और राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी बहस का विषय बन सकता है।
BJP और कांग्रेस के बीच कर्नाटक में यह विवाद किस बड़े संदर्भ में है?
कर्नाटक में BJP और कांग्रेस के बीच पहले से तीखी राजनीतिक प्रतिस्पर्धा है। जोशी ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार किसान आंदोलन और कन्नड़ कार्यकर्ताओं के मामलों को सांप्रदायिक दंगा मामलों के साथ मिलाकर जनता को भ्रमित कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
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