29 जून 2026
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प्रह्लाद जोशी का हरिप्रसाद पर हमला: 'गांधी-गोडसे-गाय' टिप्पणी सांप्रदायिक सद्भाव के लिए खतरा

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प्रह्लाद जोशी का हरिप्रसाद पर हमला: 'गांधी-गोडसे-गाय' टिप्पणी सांप्रदायिक सद्भाव के लिए खतरा

सारांश

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष हरिप्रसाद की मैसूरु में दी गई 'गांधी-गोडसे-गाय' टिप्पणी को सांप्रदायिक सद्भाव के लिए खतरनाक बताया। एक्स पर पोस्ट कर जोशी ने कहा कि यह बयान राजनीतिक हताशा की उपज है और संवैधानिक पदों का अपमान करता है।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने 29 जून को एक्स पर पोस्ट कर बी.के.
हरिप्रसाद की टिप्पणियों की कड़ी निंदा की।
हरिप्रसाद ने मैसूरु में दावा किया था कि मवेशी मारने वाले जेल जाते हैं जबकि इंसान मारने वाले PM और CM बनते हैं।
जोशी ने इस बयान को सांप्रदायिक सद्भाव के लिए खतरा और संवैधानिक पदों का अपमान बताया।
उन्होंने कर्नाटक में कांग्रेस सरकार पर जन कल्याण की जगह तुष्टिकरण और वोट-बैंक की राजनीति को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया।
जोशी ने कर्नाटक के मतदाताओं पर भरोसा जताया कि वे आने वाले चुनावों में कांग्रेस को जवाब देंगे।

केंद्रीय उपभोक्ता मामलों, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी ने सोमवार, 29 जून को कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद की 'गांधी-गोडसे-गाय' वाली टिप्पणियों को सांप्रदायिक सद्भाव के लिए गंभीर खतरा बताते हुए उनकी तीखी निंदा की। जोशी ने आरोप लगाया कि हरिप्रसाद विभाजनकारी और हताशा भरी राजनीति के ज़रिए कांग्रेस आलाकमान को खुश करने की कोशिश कर रहे हैं।

विवादित बयान की पृष्ठभूमि

हरिप्रसाद ने हाल ही में मैसूरु में एक कार्यक्रम के दौरान दावा किया था कि 'जो लोग मवेशियों को मारते हैं वे जेल जाते हैं, जबकि जो लोग इंसानों को मारते हैं वे प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री बन जाते हैं।' इस बयान ने राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया उत्पन्न की और भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इसे संवैधानिक पदों का अपमान करार दिया।

जोशी की प्रतिक्रिया: एक्स पर सीधा हमला

जोशी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि ऐसे बयान राजनीतिक निराशा की उपज हैं और सार्वजनिक विमर्श को सबसे निचले स्तर पर ले जाते हैं। उनके अनुसार इन टिप्पणियों का उद्देश्य नागरिकों की वास्तविक समस्याओं का समाधान करना नहीं, बल्कि सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ना है।

जोशी ने यह भी कहा कि देश भर में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री लाखों नागरिकों द्वारा संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से लोकतांत्रिक तरीके से चुने जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वैचारिक मतभेद कितने भी गहरे हों, सर्वोच्च संवैधानिक पदों की तुलना अपमानजनक संदर्भों में करना न केवल उन पदों का, बल्कि उन्हें चुनने वाले मतदाताओं के जनादेश का भी अपमान है।

कांग्रेस पर व्यापक हमला

केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस की कर्नाटक सरकार पर आरोप लगाया कि सत्ता में आने के बाद से उसने जन कल्याण को नज़रअंदाज़ कर तुष्टिकरण की राजनीति, वोट-बैंक की गणित और सामाजिक विभाजन को प्राथमिकता दी है। जोशी ने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व ने हमेशा शासन और विकास के बजाय राजनीतिक लाभ को ऊपर रखा है।

उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस के नेता महात्मा गांधी के सत्य और अहिंसा के आदर्शों का उपदेश देते हैं, लेकिन जब भी राजनीतिक एजेंडे के लिए ज़रूरी लगे, वे उन सिद्धांतों को आसानी से त्याग देते हैं। जोशी ने आरोप लगाया कि पार्टी भड़काऊ बयानबाज़ी और 'नकली गांधी' की छवि के सहारे अपनी गिरती राजनीतिक साख को बचाने की कोशिश कर रही है।

मंत्री ने कांग्रेस पर अपनी कमियों से ध्यान भटकाने के लिए बार-बार विवादास्पद बयान देने का आरोप लगाते हुए उसकी ऐतिहासिक विफलताओं — जिनमें आपातकाल लागू करना और भारतीय इतिहास के अन्य दुखद अध्याय शामिल हैं — का भी उल्लेख किया।

हरिप्रसाद से आग्रह

जोशी ने हरिप्रसाद और कांग्रेस नेतृत्व से आग्रह किया कि वे दूसरों को नैतिकता का पाठ पढ़ाने से पहले संवैधानिक संस्थाओं और सार्वजनिक पदों की गरिमा का सम्मान करना सीखें। उन्होंने ऐसी टिप्पणियों को पूरी तरह राजनीतिक हताशा से प्रेरित और सामाजिक सौहार्द के लिए हानिकारक बताया।

कर्नाटक की जनता पर भरोसा

मंत्री ने विश्वास जताया कि कर्नाटक के मतदाता आने वाले चुनावों में कांग्रेस सरकार की विभाजनकारी और गैर-ज़िम्मेदाराना राजनीति का करारा जवाब देंगे। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस के बीच राजनीतिक तनाव लगातार बढ़ रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि कर्नाटक में BJP और कांग्रेस दोनों ही दलों की बयानबाज़ी तेज़ी से विकास के मुद्दों से हटकर पहचान-आधारित राजनीति की ओर क्यों खिसक रही है। हरिप्रसाद का बयान निश्चित रूप से उत्तेजक था, लेकिन जोशी की प्रतिक्रिया भी उसी सार्वजनिक विमर्श को और गरमाती है जिसे वे ठंडा करने का दावा कर रहे हैं। कर्नाटक में अगले चुनाव की आहट के बीच दोनों पक्षों की यह नोकझोंक मतदाताओं को असली शासन-संबंधी सवालों से दूर रखने का जोखिम उठाती है।
RashtraPress
29 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बी.के. हरिप्रसाद ने मैसूरु में क्या विवादित बयान दिया था?
हरिप्रसाद ने मैसूरु में दावा किया था कि 'जो लोग मवेशियों को मारते हैं वे जेल जाते हैं, जबकि जो लोग इंसानों को मारते हैं वे प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री बन जाते हैं।' इस बयान को BJP ने संवैधानिक पदों का अपमान बताया।
प्रह्लाद जोशी ने हरिप्रसाद के बयान पर क्या कहा?
जोशी ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि यह बयान राजनीतिक निराशा की उपज है और सार्वजनिक विमर्श को सबसे निचले स्तर पर ले जाता है। उन्होंने इसे सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने की कोशिश और संवैधानिक पदों व मतदाताओं के जनादेश का अपमान करार दिया।
जोशी ने कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर क्या आरोप लगाए?
जोशी ने आरोप लगाया कि कर्नाटक में कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आने के बाद से जन कल्याण को नज़रअंदाज़ किया है और इसके बजाय तुष्टिकरण, वोट-बैंक की गणित और सामाजिक विभाजन को प्राथमिकता दी है।
क्या यह विवाद कर्नाटक की राजनीति पर असर डाल सकता है?
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब कर्नाटक में BJP और कांग्रेस के बीच राजनीतिक तनाव पहले से बढ़ा हुआ है। जोशी ने संकेत दिया कि मतदाता आने वाले चुनावों में कांग्रेस की विभाजनकारी राजनीति का जवाब देंगे।
प्रह्लाद जोशी ने कांग्रेस और गांधी के आदर्शों पर क्या कहा?
जोशी ने कहा कि कांग्रेस नेता महात्मा गांधी के सत्य और अहिंसा के आदर्शों का उपदेश देते हैं, लेकिन राजनीतिक एजेंडे के लिए ज़रूरत पड़ने पर उन्हें आसानी से त्याग देते हैं। उन्होंने पार्टी पर 'नकली गांधी' की छवि के सहारे राजनीतिक साख बचाने की कोशिश का आरोप भी लगाया।
राष्ट्र प्रेस
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