उम्रकैद के खिलाफ कर्नाटक हाईकोर्ट पहुंचे कांग्रेस विधायक विनय कुलकर्णी, योगेश गौड़ा हत्याकांड में मिली थी सजा
सारांश
Key Takeaways
- कांग्रेस विधायक विनय कुलकर्णी ने 25 अप्रैल को कर्नाटक हाईकोर्ट में उम्रकैद की सजा के खिलाफ अपील दायर की।
- बेंगलुरु की विशेष अदालत ने कुलकर्णी समेत 17 दोषियों को भाजपा नेता योगेश गौड़ा की हत्या में उम्रकैद और ₹30,000 जुर्माने की सजा सुनाई थी।
- योगेश गौड़ा की हत्या 15 जून 2016 को धारवाड़ के एक जिम में धारदार हथियारों से की गई थी।
- मामले की जांच सीबीआई ने की थी और कुलकर्णी को 2020 में गिरफ्तार किया गया था।
- धारवाड़ में कुलकर्णी के समर्थकों ने मौन विरोध मार्च निकालकर इसे राजनीतिक साजिश बताया।
- कुलकर्णी वर्तमान में कर्नाटक अर्बन वाटर सप्लाई एंड ड्रेनेज बोर्ड के अध्यक्ष पद पर हैं।
बेंगलुरु, 25 अप्रैल: भाजपा नेता योगेश गौड़ा हत्याकांड में बेंगलुरु की विशेष अदालत द्वारा उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद कांग्रेस विधायक विनय कुलकर्णी ने शनिवार को कर्नाटक हाईकोर्ट में अपनी दोषसिद्धि को चुनौती देते हुए अपील दायर कर दी। यह मामला कर्नाटक की राजनीति में एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है, जो वर्ष 2016 की एक सुनियोजित हत्या से जुड़ा है।
धारवाड़ में समर्थकों का मौन विरोध मार्च
धारवाड़ में शनिवार को विनय कुलकर्णी के समर्थन में सैकड़ों समर्थकों ने मौन विरोध मार्च निकाला। समर्थकों ने इस पूरे मामले को राजनीतिक साजिश करार देते हुए उनकी रिहाई की मांग की। यह विरोध प्रदर्शन उस समय और महत्वपूर्ण हो जाता है जब राज्य में कांग्रेस सरकार सत्ता में है, फिर भी पार्टी का एक वरिष्ठ विधायक न्यायालय में उम्रकैद की सजा झेल रहा है।
क्या है योगेश गौड़ा हत्याकांड
15 जून 2016 को धारवाड़ शहर के एक जिम में हमलावरों के एक समूह ने भाजपा नेता योगेश गौड़ा पर धारदार हथियारों से हमला कर उनकी निर्मम हत्या कर दी थी। जांच में सामने आया कि योगेश गौड़ा ने राजनीतिक रूप से विनय कुलकर्णी को चुनौती दी थी, जिसके बाद यह विवाद घातक रूप ले गया।
उस समय विनय कुलकर्णी राज्य सरकार में मंत्री और धारवाड़ जिले के प्रभारी मंत्री के पद पर थे। राज्य सरकार ने इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपी थी। मामले में विनय कुलकर्णी को आरोपी संख्या 15 बनाया गया था।
विशेष अदालत का फैसला और सजा का विवरण
बेंगलुरु की विशेष अदालत ने हाल ही में विनय कुलकर्णी समेत कुल 17 दोषियों को आपराधिक साजिश और योगेश गौड़ा की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई। इसके साथ ही सभी दोषियों पर ₹30,000-30,000 का जुर्माना भी लगाया गया।
यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि एक जनप्रतिनिधि को सीधे हत्या की साजिश में दोषी ठहराया गया, जो कर्नाटक की न्यायिक इतिहास में एक दुर्लभ घटना है।
गिरफ्तारी, जमानत और आत्मसमर्पण का घटनाक्रम
विनय कुलकर्णी को वर्ष 2020 में गिरफ्तार किया गया था और 2021 में उन्हें जमानत मिली थी। हालांकि, उन पर गवाहों को प्रभावित करने के गंभीर आरोप लगे, जिसके बाद सीबीआई ने अदालत में उनकी जमानत रद्द करने की याचिका दायर की। अदालत ने सीबीआई की याचिका स्वीकार करते हुए उनकी जमानत निरस्त कर दी।
इसके बाद कुलकर्णी, जो वर्तमान में कर्नाटक अर्बन वाटर सप्लाई एंड ड्रेनेज बोर्ड के अध्यक्ष पद पर हैं, ने अधिकारियों के समक्ष आत्मसमरर्पण किया था। बाद में उन्हें पुनः जमानत मिल गई थी।
राजनीतिक और कानूनी निहितार्थ
यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि कर्नाटक में कांग्रेस सत्ता में है और उसी पार्टी का एक वरिष्ठ विधायक हत्याकांड में उम्रकैद की सजा भुगत रहा है। आलोचकों का कहना है कि यह मामला राजनीतिक ताकत के दुरुपयोग का एक गंभीर उदाहरण है — जहां एक प्रभारी मंत्री पर अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी की हत्या की साजिश रचने का आरोप सिद्ध हुआ।
गौरतलब है कि भारत में राजनेताओं से जुड़े आपराधिक मामलों में उम्रकैद की सजा तक पहुंचना अत्यंत दुर्लभ है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) के आंकड़ों के अनुसार, देश के एक बड़े हिस्से के विधायकों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं, लेकिन सजा तक पहुंचने वाले मामले बेहद कम हैं।
अब कर्नाटक हाईकोर्ट में दायर अपील के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि उच्च न्यायालय इस मामले में क्या रुख अपनाता है। न्यायिक प्रक्रिया के अगले चरण पर पूरे कर्नाटक की नजर टिकी है।