राज बब्बर का खुलासा: 'शक्ति' और 'नमक हलाल' अमिताभ बच्चन की वजह से हाथ से निकलीं
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेता राज बब्बर ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया था कि उनके करियर के शुरुआती दौर में कम से कम दो बड़ी फिल्में — 'शक्ति' और 'नमक हलाल' — उनके हाथ से निकल गई थीं, क्योंकि निर्माताओं ने उनकी जगह अमिताभ बच्चन को प्राथमिकता दी। यह वह दौर था जब बच्चन हिंदी सिनेमा के सर्वोच्च सितारे थे और उनका नाम किसी भी फिल्म की व्यावसायिक सफलता की गारंटी माना जाता था।
संघर्ष के वे दिन
राज बब्बर का जन्म 23 जून 1952 को उत्तर प्रदेश के टूंडला में हुआ था। बचपन से ही मंच पर प्रदर्शन करने का शौक रखने वाले बब्बर ने नई दिल्ली के प्रतिष्ठित नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) से अभिनय की विधिवत ट्रेनिंग ली। NSD से निकलने के बाद उन्होंने 1977 में फिल्म 'किस्सा कुर्सी का' से बॉलीवुड में कदम रखा।
शुरुआती वर्षों में सफलता सीमित रही, लेकिन 1980 में 'इंसाफ का तराजू' ने उनकी पहचान बदल दी। इस फिल्म में निभाए गए नकारात्मक किरदार ने दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी और उन्हें एक गंभीर अभिनेता के रूप में स्थापित किया।
फिल्म 'शक्ति' का किस्सा
राज बब्बर ने बताया था कि फिल्म 'शक्ति' के लिए उनका स्क्रीन टेस्ट हो चुका था और उन्हें उम्मीद थी कि वह इस फिल्म का हिस्सा बनेंगे। लेकिन अंततः निर्माताओं ने उनकी जगह अमिताभ बच्चन को चुना। बब्बर के अनुसार, उस समय बच्चन इतने बड़े स्टार थे कि निर्माताओं को लगा उनके नाम से फिल्म को कहीं अधिक व्यावसायिक लाभ मिलेगा।
फिल्म 'नमक हलाल' से भी हुई छुट्टी
इसी तरह 'नमक हलाल' को लेकर भी राज बब्बर ने अपने संघर्ष का जिक्र किया था। उनका कहना था कि इस फिल्म के लिए भी उन्हें साइन किया गया था, परंतु बाद में उनकी जगह एक बड़े सितारे को लिया गया। बब्बर ने इस पर कड़वाहट जाहिर करने के बजाय इसे फिल्म इंडस्ट्री की व्यावसायिक वास्तविकता और किस्मत का हिस्सा बताया।
अमिताभ के साथ काम भी किया
दिलचस्प मोड़ यह रहा कि जिन अमिताभ बच्चन की वजह से राज बब्बर के हाथ से फिल्में निकली थीं, बाद में दोनों ने एक साथ स्क्रीन साझा की। फिल्म 'याराना' में दोनों अभिनेताओं ने साथ काम किया।
विविध करियर और राजनीति
राज बब्बर ने अपने लंबे करियर में 'निकाह', 'उमराव जान', 'प्रेम गीत', 'आज की आवाज', 'अगर तुम न होते', 'संसार', 'फैशन' और 'बॉडीगार्ड' जैसी फिल्मों में यादगार भूमिकाएँ निभाईं। फिल्मों के अलावा उन्होंने टेलीविज़न और वेब सीरीज में भी काम किया।
1989 में राज बब्बर ने राजनीति में प्रवेश किया और वह लोकसभा तथा राज्यसभा दोनों के सदस्य रहे। उनका यह सफर बताता है कि संघर्ष और हार से न टूटने वाला कलाकार अंततः अपनी अलग पहचान बना ही लेता है।