आर्य बब्बर: राज बब्बर जैसा करियर बनाने की चाह, पर बॉलीवुड में नहीं मिली वैसी पहचान
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेता राज बब्बर के बेटे आर्य बब्बर हिंदी सिनेमा के उन स्टार किड्स में शामिल हैं, जिनसे दर्शकों को बड़ी उम्मीदें थीं — लेकिन बॉलीवुड में वह मुकाम हासिल नहीं हो सका जिसकी उन्होंने और उनके चाहने वालों ने कल्पना की थी। मुंबई में पले-बढ़े आर्य ने खुद एक इंटरव्यू में स्वीकार किया था कि वह अपने पिता की तरह लंबा और मज़बूत करियर बनाना चाहते थे।
फ़िल्मी परिवार में जन्म, अभिनय विरासत में मिला
आर्य बब्बर का जन्म 24 मई 1981 को मुंबई में हुआ। उनके पिता राज बब्बर हिंदी सिनेमा के स्थापित अभिनेता रहे हैं, जबकि माँ नादिरा बब्बर थिएटर जगत की जानी-मानी कलाकार हैं। घर में कला और अभिनय का माहौल बचपन से ही था, इसलिए आर्य का झुकाव स्वाभाविक रूप से एक्टिंग की ओर हो गया। उनकी बड़ी बहन जूही बब्बर भी अभिनेत्री हैं और सौतेले भाई प्रतीक बब्बर भी बॉलीवुड में सक्रिय हैं।
बॉलीवुड में शुरुआत और संघर्ष
आर्य बब्बर ने बॉलीवुड में कदम रखा साल 2002 में, फिल्म 'अब के बरस' से, जिसमें अभिनेत्री अमृता राव भी नज़र आई थीं। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाई। इसके बावजूद उन्हें काम मिलता रहा और उन्होंने लीड तथा सहायक भूमिकाओं में कई फिल्मों में काम किया। बाद में वह 'गुरू', 'रेडी' और 'मटरू की बिजली का मंडोला' जैसी बड़े बैनरों की फिल्मों का हिस्सा बने, लेकिन इंडस्ट्री में एक मज़बूत और स्थायी पहचान बनाना उनके लिए मुश्किल साबित हुआ।
पंजाबी सिनेमा में मिली नई पहचान
बॉलीवुड में सफर धीमा पड़ने के बाद आर्य बब्बर ने पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री की ओर रुख किया। यहाँ उन्हें उल्लेखनीय सफलता मिली। उनकी पंजाबी फिल्म 'यार अन्मुल्ले' को दर्शकों ने खूब पसंद किया और उनकी अभिनय क्षमता को सराहा गया। पंजाबी सिनेमा ने उन्हें एक नई पहचान और दर्शक वर्ग दिया।
टीवी और थिएटर में भी आज़माया हाथ
फिल्मों के साथ-साथ आर्य ने टेलीविज़न की दुनिया में भी कदम रखा। वह रियलिटी शो 'बिग बॉस 8' का हिस्सा बने, जहाँ उनके अंदाज़ और बयानों ने उन्हें चर्चा में रखा। विशेष रूप से अभिनेत्री मिनिषा लांबा को लेकर दिए गए उनके बयान काफी सुर्खियों में रहे, जिसके बाद उन्हें सार्वजनिक रूप से माफी भी माँगनी पड़ी। इसके अलावा उन्होंने टीवी शो 'संकटमोचन महाबली हनुमान' में रावण की भूमिका निभाई, जिसे दर्शकों की सराहना मिली।
लेखन में भी दिखाई रुचि
आर्य बब्बर केवल अभिनय तक सीमित नहीं रहे — उन्होंने अपनी रचनात्मकता को लेखन में भी उतारा। उन्होंने 'पुष्पक विमान' नाम की कॉमिक बुक लिखी, जो उनके बहुआयामी व्यक्तित्व को दर्शाती है। आर्य बब्बर का सफर यह बताता है कि स्टार परिवार में जन्म लेना सफलता की गारंटी नहीं होता, लेकिन विभिन्न माध्यमों में खुद को आज़माते रहना एक कलाकार की असली पहचान है।