प्रधानमंत्री मुद्रा योजना: 11 वर्षों में 57.79 करोड़ लोन के माध्यम से 40 लाख करोड़ का वितरण

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प्रधानमंत्री मुद्रा योजना: 11 वर्षों में 57.79 करोड़ लोन के माध्यम से 40 लाख करोड़ का वितरण

सारांश

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना ने 11 वर्षों में 57.79 करोड़ लोन के जरिए 40 लाख करोड़ रुपए का वितरण किया। यह योजना छोटे व्यवसायों के लिए एक महत्वपूर्ण वित्तीय सहायता बनी है।

Key Takeaways

  • 57.79 करोड़ लोन का वितरण
  • 40 लाख करोड़ रुपए का वित्तीय सहयोग
  • महिलाओं को मिला 67 प्रतिशत लोन
  • अनुसूचित जाति और जनजाति को रोजगार के अवसर
  • चार श्रेणियों में लोन की पेशकश

नई दिल्ली, 8 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) के अंतर्गत अब तक 57.79 करोड़ लोन के माध्यम से 40 लाख करोड़ रुपए से अधिक का वितरण किया जा चुका है। सरकार ने बुधवार को योजना के 11 वर्ष पूरे होने की जानकारी दी।

वित्त मंत्रालय के अनुसार, इस योजना की शुरुआत 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य 'फंडिंग द अनफंडेड' यानी उन व्यक्तियों को बिना गारंटी के लोन प्रदान करना है, जिन्हें पहले बैंकिंग प्रणाली से ऋण प्राप्त नहीं हो पाता था। इस योजना के तहत छोटे गैर-कॉरपोरेट और गैर-कृषि व्यवसायों को 20 लाख रुपए तक का बिना गारंटी लोन दिया जाता है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि इस योजना ने एमएसएमई और छोटे उद्यमियों के लिए क्रेडिट सिस्टम में महत्वपूर्ण परिवर्तन लाने में मदद की है। उन्होंने कहा, "पिछले 10 वर्षों में भारत में एक अदृश्य बदलाव आया है, जहां करोड़ों आम लोगों ने आत्मविश्वास के साथ अपने व्यवसाय की शुरुआत की है।"

उन्होंने यह भी बताया कि कुल लोन में से लगभग दो-तिहाई लोन महिलाओं को प्रदान किए गए हैं, जबकि करीब एक-पांचवां हिस्सा उन उद्यमियों को मिला है, जो पहली बार व्यवसाय शुरू कर रहे हैं।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस योजना के तहत नए उद्यमियों को करीब 12.15 करोड़ लोन दिए गए हैं, जिनकी कुल राशि लगभग 12 लाख करोड़ रुपए है।

वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि पीएमएमवाई माइक्रो-उद्यमिता को प्रोत्साहित करने और वित्तीय समावेशन को सशक्त बनाने में एक महत्वपूर्ण पहल बनकर उभरी है। उन्होंने बताया कि इस योजना से विशेष रूप से अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) जैसे वंचित वर्गों को रोजगार के अवसर मिले हैं, जो कुल लाभार्थियों का लगभग 51 प्रतिशत हैं, जबकि महिलाओं की हिस्सेदारी 67 प्रतिशत है।

यह योजना चार श्रेणियों में कार्य करती है — शिशु (50,000 रुपए तक), किशोर (50,000 से 5 लाख रुपए), तरुण (5 लाख से 10 लाख रुपए) और तरुण प्लस (10 लाख से 20 लाख रुपए) — जो लाभार्थियों की आवश्यकताओं और व्यवसाय के स्तर के अनुसार निर्धारित की जाती हैं।

पीएमएमवाई के अंतर्गत मैन्युफैक्चरिंग, ट्रेडिंग और सर्विस सेक्टर के साथ-साथ कृषि से जुड़ी गतिविधियों के लिए टर्म लोन और कार्यशील पूंजी की आवश्यकताओं को पूरा किया जाता है।

यह योजना वित्तीय समावेशन के बड़े ढांचे का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य 'बैंकिंग से दूर लोगों को बैंकिंग में लाना, बिना सुरक्षा वाले को सुरक्षा देना और बिना फंड वाले को फंड देना' है।

सरकार का कहना है कि पीएमएमवाई आगे भी उद्यमियों को समर्थन देती रहेगी और 2047 तक 'विकसित भारत' के लक्ष्य को प्राप्त करने में योगदान देगी।

Point of View

बल्कि यह सामाजिक समावेशन को भी बढ़ावा देती है। छोटे व्यवसायों को समर्थन देकर, यह योजना देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में सहायक है।
NationPress
10/04/2026

Frequently Asked Questions

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस योजना का मुख्य उद्देश्य उन लोगों को बिना गारंटी के लोन प्रदान करना है, जिन्हें पहले बैंकिंग प्रणाली से ऋण नहीं मिल पाता था।
क्या पीएम मुद्रा योजना में महिलाओं के लिए विशेष प्रावधान हैं?
हां, इस योजना के तहत लगभग दो-तिहाई लोन महिलाओं को दिए गए हैं, जो उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार लाने में मदद करता है।
पीएम मुद्रा योजना के लाभार्थियों में कौन-कौन शामिल हैं?
इस योजना के लाभार्थियों में छोटे गैर-कॉरपोरेट और गैर-कृषि व्यवसाय शामिल हैं, साथ ही अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लोग भी हैं।
इस योजना की श्रेणियाँ क्या हैं?
इस योजना चार श्रेणियों में काम करती है: शिशु, किशोर, तरुण, और तरुण प्लस।
सरकार इस योजना के जरिए आगे क्या करने की योजना बना रही है?
सरकार का कहना है कि पीएमएमवाई आगे भी उद्यमियों को समर्थन देती रहेगी और 2047 तक 'विकसित भारत' के लक्ष्य को हासिल करने में योगदान देगी।
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