14 जुलाई 2026
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केरल वंदे मातरम विवाद: सपा सांसद राजीव राय बोले — राज्यपाल केंद्र के एजेंट की तरह काम करते हैं

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केरल वंदे मातरम विवाद: सपा सांसद राजीव राय बोले — राज्यपाल केंद्र के एजेंट की तरह काम करते हैं

सारांश

केरल के वंदे मातरम विवाद पर सपा ने राज्यपाल को 'केंद्र का एजेंट' बताया। बांग्लादेशी निर्वासन पर आँकड़ों की जंग में सपा का दावा — यूपीए ने 10 साल में 50,972 को भेजा, मोदी सरकार ने 11 साल में केवल 5,335 को।

मुख्य बातें

सपा सांसद राजीव कुमार राय ने कहा — राज्यपाल केंद्र सरकार के एजेंट की तरह काम करते हैं, दिल्ली की हर बात तोते की तरह दोहराते हैं।
सपा प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने कहा — संविधान के तहत वंदे मातरम को जबरदस्ती नहीं थोपा जा सकता, 4 लाइनें गाना भी पर्याप्त है।
सरकारी आँकड़ों के अनुसार यूपीए ने 2004-2014 में 50,972 और मोदी सरकार ने 2014-2026 में केवल 5,335 बांग्लादेशियों को निर्वासित किया।
सपा ने उत्तर प्रदेश में अपनी सरकार बनने और उसके बाद केंद्र से BJP की विदाई का दावा किया।
शिवकुमार के CM बनने की अटकलों पर सपा ने कांग्रेस के बदलाव की सराहना की।

समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद राजीव कुमार राय और प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने 30 मई 2026 को केरल में छिड़े वंदे मातरम विवाद और अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों के मुद्दे पर केंद्र सरकार तथा भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला। सपा ने राज्यपाल की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठाए और बांग्लादेशी निर्वासन के आँकड़ों का हवाला देते हुए मोदी सरकार पर 'जुमलेबाज़ी' का आरोप लगाया।

राज्यपाल पर सपा का तीखा प्रहार

केरल में वंदे मातरम को लेकर उठे विवाद पर सपा सांसद राजीव कुमार राय ने कहा, 'राज्यपालों की भूमिका वास्तव में स्वतंत्र नहीं होती। जिस प्रकार ब्रिटिश अपने एजेंटों को नियुक्त करते थे, उसी प्रकार आज राज्यपाल केंद्र सरकार के एजेंट के रूप में कार्य करते हैं। वे दिल्ली में कही गई हर बात को तोते की तरह दोहराते हैं।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब केरल में वंदे मातरम के गायन को लेकर राजनीतिक तनाव चरम पर है।

वंदे मातरम पर थोपने की राजनीति नहीं चलेगी — सपा प्रवक्ता

सपा प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने इस मुद्दे पर संविधान का हवाला देते हुए कहा, 'किसी भी चीज को थोपा नहीं जा सकता। हमारे संविधान का लचीलापन इसे अनूठा बनाता है। किसी की जबरदस्ती राष्ट्रभक्ति तय नहीं कर सकती। यह स्वतंत्रता है कि आप वंदे मातरम पूरा गाएँ या सिर्फ 4 लाइनें ही गाएँ।' उन्होंने जोड़ा कि दबाव देकर पूरा वंदे मातरम गवाना भारत की परंपरा के विरुद्ध है।

बांग्लादेशी निर्वासन पर आँकड़ों की लड़ाई

अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों के मुद्दे पर आशुतोष वर्मा ने सरकारी आँकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 2004 से 2014 के बीच यूपीए सरकार के दौरान आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार 50,972 बांग्लादेशियों को वापस भेजा गया था। इसके विपरीत, 2014 से 2026 के बीच मोदी सरकार के 11 वर्षों में केवल 5,335 बांग्लादेशियों को ही निर्वासित किया गया। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, 'भाषण दस गुना बड़े होते हैं।' सपा सांसद राजीव कुमार राय ने भी इस मुद्दे पर कहा कि झारखंड में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया और चुनाव से पहले ऐसे दावे अक्सर किए जाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार में एसआईआर प्रक्रिया को लेकर भी यही स्थिति रही और सर्वोच्च न्यायालय ने भी इस मामले पर आँखें मूँद ली हैं।

कर्नाटक और यूपी की राजनीति पर भी बयान

कर्नाटक में डी.के. शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने की अटकलों पर आशुतोष वर्मा ने कहा कि कांग्रेस ने बहुत अच्छे तरीके से बदलाव किया है और इसके लिए राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे सहित पूरी पार्टी बधाई की पात्र है। वहीं, सपा सांसद राजीव राय और प्रवक्ता आशुतोष वर्मा दोनों ने दावा किया कि इस बार उत्तर प्रदेश में सपा की सरकार बनेगी और यूपी के बाद केंद्र से भी BJP की विदाई तय है।

आगे क्या

केरल का वंदे मातरम विवाद और बांग्लादेशी निर्वासन का मुद्दा आने वाले विधानसभा चुनावों की पृष्ठभूमि में राजनीतिक रूप से और गरमाने की संभावना है। सपा के इन बयानों के बाद BJP की प्रतिक्रिया का इंतज़ार है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि सरकार की अपनी जवाबदेही का सवाल है। यूपीए के 10 साल बनाम मोदी सरकार के 11 साल की तुलना में निर्वासन संख्या का दस गुना अंतर उस बयानबाज़ी और ज़मीनी हकीकत के बीच की खाई को उजागर करता है जो घुसपैठ के मुद्दे पर अक्सर चुनावी हथियार की तरह इस्तेमाल होती है। वंदे मातरम विवाद पर संवैधानिक लचीलेपन की दलील ठोस है — सर्वोच्च न्यायालय पहले भी स्पष्ट कर चुका है कि राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत की अनिवार्यता की सीमाएँ हैं। असली सवाल यह है कि क्या यह विवाद वास्तविक संवैधानिक चिंता है या आगामी चुनावों से पहले ध्रुवीकरण की एक और कोशिश।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल में वंदे मातरम विवाद क्या है?
केरल में वंदे मातरम के गायन को लेकर राजनीतिक विवाद उठा है, जिसमें राज्यपाल की भूमिका और इसे अनिवार्य बनाने की माँग केंद्र में है। सपा सहित विपक्षी दलों का कहना है कि संविधान के तहत किसी पर राष्ट्रगीत गाना जबरदस्ती नहीं थोपा जा सकता।
सपा ने राज्यपाल पर क्या आरोप लगाया?
सपा सांसद राजीव कुमार राय ने कहा कि राज्यपाल स्वतंत्र रूप से काम नहीं करते, बल्कि केंद्र सरकार के एजेंट की तरह कार्य करते हैं और दिल्ली की हर बात को दोहराते हैं। उन्होंने इसकी तुलना ब्रिटिश काल की एजेंट प्रणाली से की।
बांग्लादेशी निर्वासन पर सपा ने क्या आँकड़े दिए?
सपा प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने सरकारी आँकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि यूपीए सरकार ने 2004-2014 के बीच 50,972 बांग्लादेशियों को वापस भेजा, जबकि मोदी सरकार ने 2014-2026 के 11 वर्षों में केवल 5,335 को निर्वासित किया।
क्या वंदे मातरम गाना अनिवार्य है?
संवैधानिक रूप से वंदे मातरम गाना अनिवार्य नहीं है। सपा प्रवक्ता आशुतोष वर्मा के अनुसार, संविधान का लचीलापन इसे अनूठा बनाता है और कोई भी चार लाइनें गाकर भी अपनी राष्ट्रभक्ति व्यक्त कर सकता है।
सपा ने उत्तर प्रदेश के बारे में क्या दावा किया?
सपा सांसद राजीव राय और प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने दावा किया कि आगामी चुनाव में उत्तर प्रदेश में सपा की सरकार बनेगी और इसके बाद केंद्र से भी BJP की विदाई तय है।
राष्ट्र प्रेस
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