वंदे मातरम विवाद: केरल विधानसभा के पहले दिन यूडीएफ सरकार और राज्यपाल आर्लेकर में टकराव
सारांश
मुख्य बातें
केरल की नवगठित विधानसभा के पहले कार्यदिवस पर शुक्रवार, 29 मई 2026 को तिरुवनंतपुरम में कांग्रेस-नीत संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) सरकार और राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर के कार्यालय (लोक भवन) के बीच तीखा टकराव सामने आया। विवाद की जड़ में था वंदे मातरम — राज्यपाल के नीति संबोधन से पूर्व केरल पुलिस बैंड द्वारा राष्ट्रीय गीत को पूरा न बजाया जाना।
मुख्य घटनाक्रम
राज्यपाल के औपचारिक स्वागत के दौरान केरल पुलिस बैंड ने 'वंदे मातरम' का केवल प्रारंभिक अंश बजाया और उसे बीच में ही रोक दिया। राजभवन (लोक भवन) ने गुरुवार की रिहर्सल में स्पष्ट निर्देश दिया था कि राष्ट्रीय गीत को उसकी संपूर्णता में बजाया जाए। राज्य सरकार ने यह निर्देश मानने से इनकार करते हुए दशकों पुरानी परंपरा — केवल पहला अंश बजाने की — का हवाला दिया।
सरकार और राजभवन के बीच रुख
यूडीएफ सरकार का स्पष्ट संकेत यह था कि प्रोटोकॉल और परंपरा से जुड़े विषयों में वह राजभवन के एकतरफा निर्देशों के आगे नहीं झुकेगी। दूसरी ओर, राज्यपाल कार्यालय भी सार्वजनिक रूप से इस अनदेखी को चुपचाप स्वीकार करने के मूड में नहीं दिखा। हालाँकि, राज्यपाल आर्लेकर ने सदन में इस मुद्दे को और आगे नहीं बढ़ाया — उन्होंने अपना संबोधन मलयालम में 'नमस्कारम्' से शुरू किया और वंदे मातरम विवाद पर कोई प्रत्यक्ष टिप्पणी नहीं की।
विधानसभा का राजनीतिक स्वरूप
140 सदस्यीय केरल विधानसभा में यूडीएफ के पास 102 विधायकों का बड़ा बहुमत है। वामपंथी विपक्ष के पास 35 सीटें हैं। उल्लेखनीय यह है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) पहली बार तीन विधायकों के साथ विधानसभा में पहुँची है, जिससे सदन का राजनीतिक परिदृश्य बदल गया है। इसी दिन 139 विधायकों ने शपथ ली और नए विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव भी संपन्न हुआ।
राजनीतिक संदेश और आगे की राह
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह घटना महज एक प्रोटोकॉल विवाद नहीं है — यह नई यूडीएफ सरकार और राजभवन के बीच आने वाले समय में संभावित तनाव का प्रारंभिक संकेत है। गौरतलब है कि केरल में सरकार और राज्यपाल के बीच तनाव का इतिहास रहा है; पिछली वाम सरकार के कार्यकाल में भी राजभवन से टकराव कई बार सार्वजनिक हुए थे। दोनों पक्षों ने अभी सार्वजनिक संयम बनाए रखा है, लेकिन अपने-अपने रुख पर दृढ़ता स्पष्ट है। आने वाले विधायी सत्रों में यह तनाव और मुखर हो सकता है।