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वंदे मातरम विवाद: केरल विधानसभा के पहले दिन यूडीएफ सरकार और राज्यपाल आर्लेकर में टकराव

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वंदे मातरम विवाद: केरल विधानसभा के पहले दिन यूडीएफ सरकार और राज्यपाल आर्लेकर में टकराव

सारांश

केरल विधानसभा का पहला दिन, और पहला टकराव भी — वंदे मातरम को पूरा बजाने के राजभवन के निर्देश को यूडीएफ सरकार ने परंपरा का हवाला देकर ठुकरा दिया। 102 सीटों के बहुमत वाली नई सरकार ने पहले ही दिन संकेत दे दिया कि वह राजभवन के सामने आसानी से नहीं झुकेगी।

मुख्य बातें

29 मई 2026 को केरल विधानसभा के पहले कार्यदिवस पर यूडीएफ सरकार और राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर के बीच वंदे मातरम को लेकर टकराव हुआ।
राजभवन ने रिहर्सल में राष्ट्रीय गीत पूरा बजाने का निर्देश दिया था, जिसे राज्य सरकार ने दशकों पुरानी परंपरा का हवाला देकर अस्वीकार कर दिया।
केरल पुलिस बैंड ने राज्यपाल के स्वागत में वंदे मातरम का केवल प्रारंभिक अंश बजाया।
140 सदस्यीय विधानसभा में यूडीएफ के पास 102 , वाम विपक्ष के पास 35 और BJP के पास पहली बार 3 सीटें हैं।
राज्यपाल आर्लेकर ने सदन में विवाद को आगे नहीं बढ़ाया और संबोधन 'नमस्कारम्' से शुरू किया।

केरल की नवगठित विधानसभा के पहले कार्यदिवस पर शुक्रवार, 29 मई 2026 को तिरुवनंतपुरम में कांग्रेस-नीत संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) सरकार और राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर के कार्यालय (लोक भवन) के बीच तीखा टकराव सामने आया। विवाद की जड़ में था वंदे मातरम — राज्यपाल के नीति संबोधन से पूर्व केरल पुलिस बैंड द्वारा राष्ट्रीय गीत को पूरा न बजाया जाना।

मुख्य घटनाक्रम

राज्यपाल के औपचारिक स्वागत के दौरान केरल पुलिस बैंड ने 'वंदे मातरम' का केवल प्रारंभिक अंश बजाया और उसे बीच में ही रोक दिया। राजभवन (लोक भवन) ने गुरुवार की रिहर्सल में स्पष्ट निर्देश दिया था कि राष्ट्रीय गीत को उसकी संपूर्णता में बजाया जाए। राज्य सरकार ने यह निर्देश मानने से इनकार करते हुए दशकों पुरानी परंपरा — केवल पहला अंश बजाने की — का हवाला दिया।

सरकार और राजभवन के बीच रुख

यूडीएफ सरकार का स्पष्ट संकेत यह था कि प्रोटोकॉल और परंपरा से जुड़े विषयों में वह राजभवन के एकतरफा निर्देशों के आगे नहीं झुकेगी। दूसरी ओर, राज्यपाल कार्यालय भी सार्वजनिक रूप से इस अनदेखी को चुपचाप स्वीकार करने के मूड में नहीं दिखा। हालाँकि, राज्यपाल आर्लेकर ने सदन में इस मुद्दे को और आगे नहीं बढ़ाया — उन्होंने अपना संबोधन मलयालम में 'नमस्कारम्' से शुरू किया और वंदे मातरम विवाद पर कोई प्रत्यक्ष टिप्पणी नहीं की।

विधानसभा का राजनीतिक स्वरूप

140 सदस्यीय केरल विधानसभा में यूडीएफ के पास 102 विधायकों का बड़ा बहुमत है। वामपंथी विपक्ष के पास 35 सीटें हैं। उल्लेखनीय यह है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) पहली बार तीन विधायकों के साथ विधानसभा में पहुँची है, जिससे सदन का राजनीतिक परिदृश्य बदल गया है। इसी दिन 139 विधायकों ने शपथ ली और नए विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव भी संपन्न हुआ।

राजनीतिक संदेश और आगे की राह

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह घटना महज एक प्रोटोकॉल विवाद नहीं है — यह नई यूडीएफ सरकार और राजभवन के बीच आने वाले समय में संभावित तनाव का प्रारंभिक संकेत है। गौरतलब है कि केरल में सरकार और राज्यपाल के बीच तनाव का इतिहास रहा है; पिछली वाम सरकार के कार्यकाल में भी राजभवन से टकराव कई बार सार्वजनिक हुए थे। दोनों पक्षों ने अभी सार्वजनिक संयम बनाए रखा है, लेकिन अपने-अपने रुख पर दृढ़ता स्पष्ट है। आने वाले विधायी सत्रों में यह तनाव और मुखर हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असल में यह नई यूडीएफ सरकार की राजभवन के साथ शक्ति-सीमाओं की पहली परीक्षा है। केरल में राज्यपाल-सरकार तनाव का इतिहास बताता है कि ये टकराव प्रतीकात्मक से शुरू होकर संवैधानिक तक पहुँचते हैं। 102 सीटों का भारी बहुमत यूडीएफ को आत्मविश्वास देता है, लेकिन राजभवन के साथ टकराव की राजनीति कभी-कभी सरकार की विधायी प्राथमिकताओं को भी पटरी से उतार देती है — यह वह सबक है जो पिछली वाम सरकार ने कठिनाई से सीखा था।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल विधानसभा में वंदे मातरम विवाद क्या है?
29 मई 2026 को केरल विधानसभा के पहले कार्यदिवस पर राजभवन ने निर्देश दिया था कि राज्यपाल के स्वागत में वंदे मातरम पूरा बजाया जाए, लेकिन यूडीएफ सरकार ने परंपरा का हवाला देते हुए केवल प्रारंभिक अंश बजवाया। इसी से सरकार और राज्यपाल कार्यालय के बीच पहले दिन टकराव उभरा।
यूडीएफ सरकार ने राजभवन का निर्देश क्यों नहीं माना?
राज्य सरकार का तर्क है कि केरल विधानसभा में दशकों से वंदे मातरम का केवल प्रारंभिक अंश बजाने की परंपरा रही है। सरकार ने इस परंपरा को बनाए रखते हुए राजभवन के एकतरफा निर्देश को अस्वीकार कर दिया।
राज्यपाल आर्लेकर ने इस विवाद पर सदन में क्या कहा?
राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने सदन में वंदे मातरम विवाद पर कोई प्रत्यक्ष टिप्पणी नहीं की। उन्होंने अपना नीति संबोधन मलयालम में 'नमस्कारम्' से शुरू किया और मुद्दे को आगे नहीं बढ़ाया।
केरल की नई विधानसभा में राजनीतिक समीकरण क्या हैं?
140 सदस्यीय विधानसभा में यूडीएफ के पास 102 विधायकों का बहुमत है, वाम विपक्ष के पास 35 सीटें हैं और BJP पहली बार 3 विधायकों के साथ सदन में पहुँची है।
क्या केरल में पहले भी सरकार और राज्यपाल के बीच टकराव हुए हैं?
हाँ, केरल में राज्यपाल और राज्य सरकार के बीच तनाव का इतिहास रहा है। पिछली वाम सरकार के कार्यकाल में भी राजभवन से कई बार सार्वजनिक विवाद हुए थे। राजनीतिक विश्लेषक इस नए टकराव को आने वाले समय में और गहरे मतभेदों का संकेत मान रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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