पुरुषोत्तम मास का 16वाँ दिन, 1 जून 2026: ज्येष्ठ शुक्ल प्रतिपदा पर अभिजीत व विजय मुहूर्त, जानें राहुकाल
सारांश
मुख्य बातें
पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) का 16वाँ दिन 1 जून 2026, सोमवार को है। इस दिन ज्येष्ठ शुक्ल प्रतिपदा तिथि रहेगी और अभिजीत मुहूर्त तथा विजय मुहूर्त का दुर्लभ शुभ संयोग बन रहा है, जो धार्मिक अनुष्ठानों, नए कार्यों की शुरुआत और महत्वपूर्ण निर्णयों के लिए विशेष अनुकूल माना जाता है। भगवान विष्णु की आराधना और दान-पुण्य को समर्पित यह मास आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत फलदायी माना जाता है।
सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्र समय
1 जून 2026 को सूर्योदय सुबह 5 बजकर 24 मिनट पर होगा और सूर्यास्त शाम 7 बजकर 14 मिनट पर। चंद्रोदय रात 8 बजकर 30 मिनट पर होगा, जबकि चंद्रास्त अगले दिन 2 जून की सुबह 5 बजकर 35 मिनट पर होगा। प्रतिपदा तिथि शाम 4 बजकर 37 मिनट तक प्रभावी रहेगी, इसके पश्चात द्वितीया तिथि प्रारंभ होगी। उदयातिथि के नियमानुसार पूरे दिन प्रतिपदा का ही मान रहेगा।
नक्षत्र ज्येष्ठा शाम 7 बजकर 8 मिनट तक रहेगा। इस दिन सिद्ध योग और करण कौलव का संयोग भी रहेगा, जो शुभ कार्यों को और अधिक फलदायी बनाता है।
शुभ मुहूर्त — पूरी सूची
सोमवार के प्रमुख शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं:
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:02 से 4:43 बजे तक। यह समय ध्यान, पूजा-पाठ और मंत्र जाप के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।
अमृत काल: सुबह 9:16 से 11:03 बजे तक। इस अवधि में किए गए धार्मिक कार्य विशेष शुभ फल देते हैं।
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:51 से 12:47 बजे तक। यह दिन का सबसे शक्तिशाली मुहूर्त माना जाता है, जो हर प्रकार के शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त है।
विजय मुहूर्त: दोपहर 2:38 से 3:33 बजे तक। नई परियोजनाएँ, यात्रा और महत्वपूर्ण निर्णय लेने के लिए अनुकूल।
गोधूलि मुहूर्त: शाम 7:13 से 7:34 बजे तक। विवाह और गृह प्रवेश जैसे संस्कारों के लिए पारंपरिक रूप से शुभ।
अशुभ समय — राहुकाल और अन्य
सोमवार को राहुकाल सुबह 7:08 से 8:51 बजे तक रहेगा। इस अवधि में कोई भी नया या महत्वपूर्ण कार्य प्रारंभ न करने की परंपरागत सलाह दी जाती है।
यमगण्ड सुबह 10:35 से दोपहर 12:19 बजे तक और गुलिक काल दोपहर 2:03 से 3:47 बजे तक रहेगा। दुर्मुहूर्त दो चरणों में — दोपहर 12:47 से 1:42 बजे तक और दोपहर 3:33 से 4:28 बजे तक — प्रभावी रहेगा।
पुरुषोत्तम मास का महत्व
पुरुषोत्तम मास को भगवान विष्णु का विशेष आशीर्वाद प्राप्त मास माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस मास में किए गए व्रत, पूजा-अर्चना और दान का फल सामान्य मासों की तुलना में कई गुना अधिक होता है। 1 जून को प्रतिपदा तिथि पर अभिजीत और विजय मुहूर्त का एकसाथ आना इसे और भी विशेष बनाता है। श्रद्धालुओं के लिए यह दिन भगवान नारायण की विशेष आराधना, तुलसी पूजन और दान-पुण्य के लिए उत्तम अवसर है।