5 मई को एकदंत संकष्टी चतुर्थी: अभिजित व विजय मुहूर्त का दुर्लभ संयोग, जानें राहुकाल और पूजा का शुभ समय

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5 मई को एकदंत संकष्टी चतुर्थी: अभिजित व विजय मुहूर्त का दुर्लभ संयोग, जानें राहुकाल और पूजा का शुभ समय

सारांश

5 मई को एकदंत संकष्टी चतुर्थी पर अभिजित और विजय मुहूर्त का दुर्लभ संयोग बन रहा है। भगवान गणेश के एकदंत रूप की पूजा से बाधा निवारण और सिद्धि प्राप्ति होती है। राहुकाल 3:38 से 5:19 बजे तक रहेगा — इस दौरान शुभ कार्यों से बचें।

मुख्य बातें

एकदंत संकष्टी चतुर्थी का पर्व 5 मई 2025 (मंगलवार) को बैशाख कृष्ण पक्ष चतुर्थी तिथि पर मनाया जाएगा।
अभिजित मुहूर्त दोपहर 11:51 से 12:45 बजे और विजय मुहूर्त 2:32 से 3:25 बजे तक — शुभ कार्यों के लिए उत्तम।
राहुकाल दोपहर 3:38 से 5:19 बजे तक; इस अवधि में नए या शुभ कार्य वर्जित।
यमगंड सुबह 8:58 से 10:38 बजे तक रहेगा।
चंद्रोदय रात 10:35 बजे — इसके बाद संकष्टी व्रत का पारण करें।
गणपति को मोदक , लड्डू और दुर्वा अर्पित करना इस दिन विशेष शुभ माना जाता है।

बैशाख मास कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर 5 मई 2025 (मंगलवार) को एकदंत संकष्टी चतुर्थी का पावन पर्व मनाया जाएगा। विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश के एकदंत रूप को समर्पित यह व्रत बाधाओं के निवारण, सिद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति के लिए विशेष महत्व रखता है। इस वर्ष पर्व पर अभिजित मुहूर्त और विजय मुहूर्त का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जो इसे और भी शुभ बना देता है।

एकदंत गणेश की पौराणिक कथा और महत्व

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, एकदंत गणेश को अष्टविनायक रूपों में से एक माना जाता है। कथा के अनुसार, एक बार भगवान शिव से मिलने जा रहे गणेश जी को भगवान परशुराम ने मार्ग में रोका। दोनों के बीच विवाद होने पर परशुराम ने अपना परशु चलाया, जिससे गणेश जी का एक दांत टूट गया और तभी से वे एकदंत नाम से विख्यात हुए। मान्यता है कि इस दिन एकदंत गणेश की विधिवत पूजा-अर्चना से बुद्धि, विद्या, सिद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। भक्तों को इस अवसर पर गणपति को मोदक, लड्डू और दुर्वा अर्पित करना श्रेयस्कर माना जाता है।

5 मई के मुख्य मुहूर्त और तिथि विवरण

इस दिन सूर्योदय प्रातः 5 बजकर 37 मिनट पर और सूर्यास्त सायं 6 बजकर 59 मिनट पर होगा। चंद्रोदय रात्रि 10 बजकर 35 मिनट पर होगा, जो संकष्टी व्रत के पारण का शुभ समय है। चतुर्थी तिथि पूर्ण रात्रि तक रहेगी। नक्षत्र ज्येष्ठा दोपहर 12 बजकर 55 मिनट तक और योग शिव देर रात 12 बजकर 17 मिनट तक रहेगा। ब्रह्म मुहूर्त प्रातः 4 बजकर 12 मिनट से 4 बजकर 55 मिनट तक रहेगा, जो ध्यान और पूजा के लिए उत्तम समय है। गोधूलि मुहूर्त सायं 6 बजकर 57 मिनट से 7 बजकर 19 मिनट तक रहेगा।

अभिजित और विजय मुहूर्त का शुभ संयोग

5 मई को अभिजित मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 51 मिनट से 12 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 32 मिनट से 3 बजकर 25 मिनट तक रहेगा। अभिजित मुहूर्त को किसी भी शुभ कार्य के लिए सर्वोत्तम माना जाता है, जबकि विजय मुहूर्त में आरंभ किया गया कार्य सफलता दिलाता है। गणेश पूजा, नए कार्य की शुरुआत या महत्वपूर्ण निर्णय लेने के लिए यह दोहरा संयोग विशेष रूप से शुभ है।

राहुकाल और यमगंड — इस समय शुभ कार्य वर्जित

राहुकाल दोपहर 3 बजकर 38 मिनट से सायं 5 बजकर 19 मिनट तक रहेगा। इस अवधि में कोई भी शुभ या नया कार्य आरंभ करने से बचना चाहिए। यमगंड प्रातः 8 बजकर 58 मिनट से 10 बजकर 38 मिनट तक रहेगा, जो भी अशुभ काल की श्रेणी में आता है। श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि गणेश पूजा और अन्य शुभ कार्य इन दोनों कालों से पहले या बाद में संपन्न करें।

व्रत और पूजा विधि का सार

एकदंत संकष्टी के दिन भक्त प्रातः स्नान कर भगवान गणेश के एकदंत रूप की प्रतिमा या चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित करें। मोदक, लड्डू, दुर्वा और लाल फूल अर्पित करें। रात्रि में चंद्रोदय (10 बजकर 35 मिनट) के बाद चंद्र दर्शन कर व्रत का पारण करें। मान्यता है कि इस विधि से संपन्न पूजा से जीवन की समस्त बाधाएँ दूर होती हैं और मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो यह दर्शाता है कि डिजिटल युग में भी ज्योतिषीय परंपराओं की प्रासंगिकता बनी हुई है। इस वर्ष अभिजित और विजय मुहूर्त का एक साथ पड़ना उपासकों के लिए विशेष अवसर है। राष्ट्र प्रेस ऐसी सांस्कृतिक-धार्मिक सूचनाओं को तथ्यात्मक और सटीक रूप में प्रस्तुत करने को प्राथमिकता देता है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एकदंत संकष्टी चतुर्थी 2025 कब है?
एकदंत संकष्टी चतुर्थी 5 मई 2025 (मंगलवार) को है। यह बैशाख मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाती है और चतुर्थी तिथि पूर्ण रात्रि तक रहेगी।
5 मई को संकष्टी पूजा के लिए सबसे शुभ समय कौन सा है?
अभिजित मुहूर्त (11:51 से 12:45 बजे) और विजय मुहूर्त (2:32 से 3:25 बजे) गणेश पूजा और शुभ कार्यों के लिए सर्वोत्तम हैं। राहुकाल (3:38 से 5:19 बजे) में पूजा या नया कार्य न करें।
एकदंत गणेश कौन हैं और उनका नाम एकदंत क्यों पड़ा?
एकदंत गणेश, भगवान गणेश के अष्टविनायक रूपों में से एक हैं। पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान परशुराम के परशु से गणेश जी का एक दांत टूट गया था, तभी से वे एकदंत कहलाए।
5 मई को राहुकाल का समय क्या है?
5 मई 2025 को राहुकाल दोपहर 3 बजकर 38 मिनट से शाम 5 बजकर 19 मिनट तक रहेगा। इस अवधि में कोई भी नया या शुभ कार्य आरंभ करना वर्जित माना जाता है।
संकष्टी व्रत का पारण कब करें?
संकष्टी व्रत का पारण चंद्रोदय के बाद किया जाता है। 5 मई को चंद्रोदय रात 10 बजकर 35 मिनट पर होगा, इसके बाद चंद्र दर्शन कर व्रत तोड़ें।
राष्ट्र प्रेस
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