भगवान गणेश की आराधना के लिए विकट संकष्टी पर्व, जानें शुभ-अशुभ समय
सारांश
Key Takeaways
- विकट संकष्टी पर्व 5 अप्रैल को मनाया जाएगा।
- भगवान गणेश के विकट रूप की विशेष आराधना होती है।
- अशुभ समयों से बचने के लिए योजना बनाना आवश्यक है।
- पूजा और उपवास का विशेष महत्व है।
- सभी भक्तों के लिए यह दिन संकटों से मुक्ति का प्रतीक है।
नई दिल्ली, 4 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। हिंदू पंचांग के अनुसार वैशाख माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को विकट संकष्टी का पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष यह पावन पर्व 5 अप्रैल, रविवार को आ रहा है। इस दिन भगवान गणेश के अष्टविनायक रूपों में से एक विकट रूप की विशेष आराधना की जाती है।
धार्मिक मान्यता है कि विकट गणेश अपने भक्तों को सभी प्रकार के ज्ञात और अज्ञात भय, रोग, शोक और दुर्घटनाओं से सुरक्षा प्रदान करते हैं। यह व्रत न केवल व्यक्ति को निर्भीक बनाता है, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में संघर्ष करने का साहस भी देता है। घोर संकटों में भी भक्तों की रक्षा करने वाले विकट गणेश अपराजेयता का वरदान देते हैं।
5 अप्रैल को चतुर्थी तिथि दोपहर 11 बजकर 59 मिनट से आरंभ होकर अगले दिन तक चलेगी। व्रत रखने वाले भक्त पूरे दिन उपवास करेंगे। शाम को चंद्रमा के उदय के बाद पूजा और चंद्र दर्शन कर व्रत का पारण किया जाएगा।
5 अप्रैल को सूर्योदय 6 बजकर 7 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 41 मिनट पर होगा। वहीं, चंद्र उदय रात 9 बजकर 58 मिनट पर होगा। शुभ मुहूर्त की बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 35 मिनट से 5 बजकर 21 मिनट तक, अभिजित मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 59 मिनट से 12 बजकर 49 मिनट तक, विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 20 मिनट तक और गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 40 मिनट से 7 बजकर 3 मिनट तक रहेगा।
अमृत काल दोपहर 2 बजकर 24 मिनट से 4 बजकर 10 मिनट तक रहेगा।
अशुभ समय की बात करें तो राहुकाल शाम 5 बजकर 7 मिनट से 6 बजकर 41 मिनट तक, यमगण्ड दोपहर 12 बजकर 24 मिनट से 1 बजकर 58 मिनट तक, गुलिक काल दोपहर 3 बजकर 33 मिनट से 5 बजकर 7 मिनट तक और दुर्मुहूर्त शाम 5 बजकर 1 मिनट से 5 बजकर 51 मिनट तक रहेगा। वहीं, भद्रा सुबह 6 बजकर 7 मिनट से दोपहर 11 बजकर 59 मिनट तक रहेगी।