रोम में इजरायल-लेबनान वार्ता का छठा दौर संपन्न, दक्षिणी लेबनान में 'पायलट जोन' पर सहमति के करीब
सारांश
मुख्य बातें
इजरायल और लेबनान के बीच रोम में अमेरिकी मध्यस्थता में हुई छठे दौर की वार्ता बुधवार को संपन्न हुई, और दोनों पक्ष दक्षिणी लेबनान में पहले दो पायलट जोन से इजरायली सेना की वापसी की प्रक्रिया पर सहमति के करीब पहुँच गए हैं। इस समझौते के तहत उन क्षेत्रों का नियंत्रण इजरायल डिफेंस फोर्सेज (IDF) से लेबनानी सशस्त्र बलों (LAF) को हस्तांतरित किया जाएगा।
वार्ता का मुख्य घटनाक्रम
यह बैठक रोम स्थित अमेरिकी दूतावास में आयोजित हुई। बातचीत से जुड़े सूत्रों के अनुसार, इस दौर का केंद्रीय एजेंडा 26 जून को वाशिंगटन में हुए फ्रेमवर्क समझौते को व्यावहारिक रूप देना था। दोनों पक्षों ने IDF की वापसी की प्रक्रिया, LAF की तैनाती, हिज्बुल्लाह के हथियारों को निष्क्रिय करने और संबंधित क्षेत्रों पर लेबनानी सरकार का प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित करने के लिए अपनाई जाने वाली शर्तों और अनुक्रम पर विस्तार से चर्चा की।
दोनों पक्षों की प्रमुख शर्तें
सूत्रों के अनुसार, लेबनान चाहता है कि दक्षिण में संप्रभुता की बहाली अंदरूनी अस्थिरता से बचते हुए चरणबद्ध तरीके से हो। वहीं, इजरायल इस बात पर अडिग है कि IDF द्वारा खाली किए गए क्षेत्र पुनः हिज्बुल्लाह के नियंत्रण में न जाएँ — इसके लिए सत्यापन-योग्य सुरक्षा गारंटी अनिवार्य शर्त है। इजरायल का स्पष्ट रुख है कि IDF की पूर्ण वापसी तभी होगी जब लेबनानी सेना उस क्षेत्र पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित कर ले और हिज्बुल्लाह के निरस्त्रीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़े।
वार्ता की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि इससे पहले पाँचवें दौर की वार्ता पिछले महीने के अंत में वाशिंगटन में हुई थी, जिसका उद्देश्य सीजफायर फ्रेमवर्क को आगे बढ़ाना था। यह वार्ता-श्रृंखला उस व्यापक कूटनीतिक प्रयास का हिस्सा है जो इजरायल-लेबनान संघर्षविराम के बाद दक्षिणी लेबनान में स्थायी स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए जारी है। दोनों पक्षों ने एक और दौर की बातचीत पर सहमति जताई है, हालाँकि उसकी तारीख अभी तय नहीं हुई है।
इटली की भूमिका
इटली के उपप्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री एंटोनियो तजानी ने कहा कि इस बैठक की मेजबानी मध्य-पूर्व में शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने की कोशिशों में इटली की सक्रिय भूमिका को रेखांकित करती है। रोम लगातार इस वार्ता-प्रक्रिया के लिए एक तटस्थ और विश्वसनीय मंच बनकर उभरा है।
आगे क्या होगा
वार्ता के सातवें दौर की तारीख अभी घोषित नहीं हुई है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच पायलट जोन को लेकर बनी सहमति की रूपरेखा इस प्रक्रिया में एक महत्त्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि पायलट जोन की सफलता या विफलता ही यह तय करेगी कि IDF की पूर्ण वापसी की समयसीमा क्या होगी।