16 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

रोम में इजरायल-लेबनान वार्ता का छठा दौर संपन्न, दक्षिणी लेबनान में 'पायलट जोन' पर सहमति के करीब

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
रोम में इजरायल-लेबनान वार्ता का छठा दौर संपन्न, दक्षिणी लेबनान में 'पायलट जोन' पर सहमति के करीब

सारांश

रोम में छठे दौर की वार्ता के बाद इजरायल और लेबनान दक्षिणी लेबनान में पहले दो पायलट जोन से IDF की वापसी पर सहमति के करीब पहुँच गए हैं — लेकिन हिज्बुल्लाह निरस्त्रीकरण की सत्यापन-योग्य गारंटी अभी भी सबसे बड़ी अड़चन बनी हुई है।

मुख्य बातें

इजरायल और लेबनान के बीच रोम में 16 जुलाई को अमेरिकी मध्यस्थता में छठे दौर की वार्ता संपन्न हुई।
दोनों पक्ष दक्षिणी लेबनान के पहले दो पायलट जोन से IDF की वापसी और लेबनानी सेना (LAF) की तैनाती पर सहमति के करीब पहुँचे।
वार्ता का आधार 26 जून को वाशिंगटन में हुआ फ्रेमवर्क समझौता है।
इजरायल की शर्त — खाली किए गए क्षेत्र हिज्बुल्लाह के नियंत्रण में न जाएँ; लेबनान चाहता है कि प्रक्रिया अंदरूनी स्थिरता बनाए रखे।
सातवें दौर की बातचीत पर सहमति बनी, लेकिन तारीख अभी तय नहीं।
इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो तजानी ने मध्य-पूर्व शांति में इटली की भूमिका को रेखांकित किया।

इजरायल और लेबनान के बीच रोम में अमेरिकी मध्यस्थता में हुई छठे दौर की वार्ता बुधवार को संपन्न हुई, और दोनों पक्ष दक्षिणी लेबनान में पहले दो पायलट जोन से इजरायली सेना की वापसी की प्रक्रिया पर सहमति के करीब पहुँच गए हैं। इस समझौते के तहत उन क्षेत्रों का नियंत्रण इजरायल डिफेंस फोर्सेज (IDF) से लेबनानी सशस्त्र बलों (LAF) को हस्तांतरित किया जाएगा।

वार्ता का मुख्य घटनाक्रम

यह बैठक रोम स्थित अमेरिकी दूतावास में आयोजित हुई। बातचीत से जुड़े सूत्रों के अनुसार, इस दौर का केंद्रीय एजेंडा 26 जून को वाशिंगटन में हुए फ्रेमवर्क समझौते को व्यावहारिक रूप देना था। दोनों पक्षों ने IDF की वापसी की प्रक्रिया, LAF की तैनाती, हिज्बुल्लाह के हथियारों को निष्क्रिय करने और संबंधित क्षेत्रों पर लेबनानी सरकार का प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित करने के लिए अपनाई जाने वाली शर्तों और अनुक्रम पर विस्तार से चर्चा की।

दोनों पक्षों की प्रमुख शर्तें

सूत्रों के अनुसार, लेबनान चाहता है कि दक्षिण में संप्रभुता की बहाली अंदरूनी अस्थिरता से बचते हुए चरणबद्ध तरीके से हो। वहीं, इजरायल इस बात पर अडिग है कि IDF द्वारा खाली किए गए क्षेत्र पुनः हिज्बुल्लाह के नियंत्रण में न जाएँ — इसके लिए सत्यापन-योग्य सुरक्षा गारंटी अनिवार्य शर्त है। इजरायल का स्पष्ट रुख है कि IDF की पूर्ण वापसी तभी होगी जब लेबनानी सेना उस क्षेत्र पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित कर ले और हिज्बुल्लाह के निरस्त्रीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़े।

वार्ता की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि इससे पहले पाँचवें दौर की वार्ता पिछले महीने के अंत में वाशिंगटन में हुई थी, जिसका उद्देश्य सीजफायर फ्रेमवर्क को आगे बढ़ाना था। यह वार्ता-श्रृंखला उस व्यापक कूटनीतिक प्रयास का हिस्सा है जो इजरायल-लेबनान संघर्षविराम के बाद दक्षिणी लेबनान में स्थायी स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए जारी है। दोनों पक्षों ने एक और दौर की बातचीत पर सहमति जताई है, हालाँकि उसकी तारीख अभी तय नहीं हुई है।

इटली की भूमिका

इटली के उपप्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री एंटोनियो तजानी ने कहा कि इस बैठक की मेजबानी मध्य-पूर्व में शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने की कोशिशों में इटली की सक्रिय भूमिका को रेखांकित करती है। रोम लगातार इस वार्ता-प्रक्रिया के लिए एक तटस्थ और विश्वसनीय मंच बनकर उभरा है।

आगे क्या होगा

वार्ता के सातवें दौर की तारीख अभी घोषित नहीं हुई है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच पायलट जोन को लेकर बनी सहमति की रूपरेखा इस प्रक्रिया में एक महत्त्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि पायलट जोन की सफलता या विफलता ही यह तय करेगी कि IDF की पूर्ण वापसी की समयसीमा क्या होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा हिज्बुल्लाह के निरस्त्रीकरण की सत्यापन-योग्य प्रक्रिया में है — जिस पर अब तक कोई ठोस तंत्र सामने नहीं आया है। इजरायल की 'वेरिफाइड गारंटी' की माँग और लेबनान की 'अंदरूनी स्थिरता' की चिंता — दोनों एक-दूसरे को काटती हैं, और यही द्वंद्व सातवें दौर की वार्ता को भी जटिल बनाएगा। गौरतलब है कि 2006 के संघर्षविराम के बाद भी UNIFIL की उपस्थिति के बावजूद दक्षिणी लेबनान में हिज्बुल्लाह का प्रभाव कम नहीं हुआ था — यह इतिहास इस बार के किसी भी समझौते की विश्वसनीयता पर सबसे बड़ा सवाल खड़ा करता है।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रोम में इजरायल-लेबनान वार्ता का छठा दौर किस बारे में था?
यह वार्ता 16 जुलाई को रोम स्थित अमेरिकी दूतावास में हुई, जिसमें दक्षिणी लेबनान के पहले दो पायलट जोन से IDF की वापसी और लेबनानी सेना की तैनाती की प्रक्रिया तय करने पर ध्यान केंद्रित रहा। इसका आधार 26 जून को वाशिंगटन में हुआ फ्रेमवर्क समझौता था।
'पायलट जोन' क्या है और यह क्यों अहम है?
पायलट जोन दक्षिणी लेबनान के वे चुनिंदा क्षेत्र हैं जहाँ से इजरायली सेना पहले चरण में हटेगी और उनकी जगह लेबनानी सेना तैनात होगी। यह व्यापक IDF वापसी से पहले एक परीक्षण-मॉडल के रूप में काम करेगा, जिससे दोनों पक्ष यह जाँच सकें कि सुरक्षा हस्तांतरण व्यावहारिक रूप से कैसे काम करता है।
IDF की पूर्ण वापसी के लिए इजरायल की क्या शर्तें हैं?
इजरायल का कहना है कि IDF की पूर्ण वापसी तभी होगी जब लेबनानी सेना खाली किए गए क्षेत्रों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित कर ले और हिज्बुल्लाह के हथियारों को निष्क्रिय करने की प्रक्रिया आगे बढ़े। इसके लिए सत्यापन-योग्य सुरक्षा गारंटी अनिवार्य शर्त रखी गई है।
इस वार्ता-प्रक्रिया में अमेरिका और इटली की क्या भूमिका है?
अमेरिका इस पूरी वार्ता-श्रृंखला में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है, जबकि इटली मेजबान देश के रूप में तटस्थ मंच प्रदान कर रहा है। इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो तजानी ने कहा कि यह मेजबानी मध्य-पूर्व शांति में इटली की सक्रिय भूमिका को दर्शाती है।
अगले दौर की वार्ता कब होगी?
दोनों पक्षों ने सातवें दौर की बातचीत पर सहमति जताई है, लेकिन उसकी तारीख अभी तय नहीं हुई है। पायलट जोन पर अंतिम सहमति बनने के बाद ही अगले दौर की रूपरेखा स्पष्ट होने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 3 सप्ताह पहले
  3. 4 सप्ताह पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 3 महीने पहले
  8. 6 महीने पहले