इजरायल-लेबनान में अमेरिकी निगरानी में बनेंगे 'पायलट जोन', हिज्बुल्लाह-मुक्त क्षेत्र पर सहमति
सारांश
मुख्य बातें
मध्य पूर्व में स्थायी शांति की दिशा में एक निर्णायक कदम उठाते हुए इजरायल और लेबनान ने अमेरिका की सीधी निगरानी में विशेष 'पायलट जोन' स्थापित करने की प्रक्रिया तेज करने पर सहमति जताई है। इन जोन में लेबनानी सशस्त्र बलों का पूर्ण नियंत्रण होगा और किसी भी गैर-राज्य सशस्त्र समूह की उपस्थिति पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर इस सहमति की पुष्टि की।
चौथी त्रिपक्षीय बैठक में बनी सहमति
अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता कार्यालय के अनुसार, जून 2025 के शुरुआती सप्ताह में अमेरिका ने इजरायल और लेबनान के प्रतिनिधियों के बीच चौथी उच्च स्तरीय त्रिपक्षीय बैठक आयोजित की। इस बैठक में दोनों पक्षों ने युद्धविराम लागू करने पर सहमति जताई, जो इस शर्त पर आधारित है कि हिज्बुल्लाह पूरी तरह गोलीबारी बंद करे और उसके सभी लड़ाके दक्षिण लितानी क्षेत्र से हट जाएं।
राजदूत रूवेन अजार ने एक्स पर लिखा, 'इजरायल और लेबनान, अमेरिका की देखरेख में पायलट जोन बनाने की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाने पर सहमत हुए हैं। इन जोन में लेबनान की सेना का पूरा नियंत्रण होगा और किसी भी गैर-सरकारी गुट का वहां कोई दखल नहीं होगा।'
सुरक्षा ढांचे पर चर्चा
अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, प्रतिनिधिमंडलों ने एक व्यापक सुरक्षा ढांचे पर भी विचार-विमर्श किया, जो 29 मई को पेंटागन में हुई बातचीत पर आधारित है। इस ढांचे का उद्देश्य लेबनान और इजरायल की संप्रभुता, सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता को दीर्घकालिक रूप से सुनिश्चित करना है। इसमें गैर-राज्य सशस्त्र समूहों को निष्क्रिय करना और उनके पुनरुत्थान को रोकना भी प्रमुख एजेंडे में शामिल है।
यह ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में ईरान समर्थित प्रॉक्सी समूहों की गतिविधियों को लेकर क्षेत्रीय अस्थिरता की चिंता बनी हुई है। सभी पक्षों ने ईरान की इन गतिविधियों की कड़ी निंदा की।
दोनों देशों के रुख
इजरायल ने स्पष्ट किया कि उसकी सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता तभी सुनिश्चित हो सकती है जब हिज्बुल्लाह को पूरी तरह निरस्त्र किया जाए और पूरे लेबनान में उसके ढांचे को समाप्त किया जाए। इजरायल ने अमेरिका के नेतृत्व में सीधे संवाद को ही सभी लंबित मुद्दों के समाधान का एकमात्र रास्ता बताया।
लेबनान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सीमाओं के पारस्परिक सम्मान, युद्धविराम के पूर्ण पालन और पूर्ण राष्ट्रीय संप्रभुता की आवश्यकता पर जोर दिया। लेबनान ने अमेरिका के सहयोग से अपने सशस्त्र बलों की क्षमता बढ़ाने का संकल्प लिया।
गौरतलब है कि दोनों देशों ने एक-दूसरे के प्रति किसी भी शत्रुतापूर्ण इरादे से इनकार किया और भरोसा बढ़ाने के लिए सीधी बातचीत जारी रखने का वादा किया।
अमेरिका की भूमिका और आगे की राह
अमेरिका ने दोनों सरकारों की संप्रभुता के समर्थन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और कहा कि संघर्ष रोकने से जुड़ा कोई भी समझौता सीधे दोनों सरकारों के बीच होना चाहिए, जिसकी मध्यस्थता वह स्वयं करेगा। अमेरिका ने 2 जून को विदेश मंत्री रुबियो के उस बयान को भी दोहराया जिसमें उन्होंने कहा था कि हिज्बुल्लाह सिर्फ इजरायल और अमेरिका का ही नहीं, बल्कि लेबनान का भी दुश्मन है।
दोनों पक्षों ने सहमति जताई कि वे 22 जून वाले सप्ताह में राजनीतिक और सुरक्षा वार्ताओं को फिर से शुरू करेंगे, ताकि एक व्यापक समझौते तक पहुंचा जा सके। अमेरिका ने तब तक दोनों पक्षों के बीच संवाद और संपर्क बनाए रखने में मदद जारी रखने पर सहमति दी। यदि ये वार्ताएं सफल रहीं, तो यह मध्य पूर्व में दशकों पुराने संघर्ष के एक नए अध्याय की शुरुआत हो सकती है।