लेबनान के PM नवाफ सलाम ने इजरायल पर लगाया 'धरती झुलसाने की नीति' का आरोप, तत्काल युद्धविराम की माँग
सारांश
मुख्य बातें
लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने 31 मई को एक टेलीविजन संबोधन में दक्षिणी लेबनान में इजरायल की ओर से जारी सैन्य कार्रवाई को 'खतरनाक और अत्यधिक' बताया तथा तत्काल युद्धविराम की माँग की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इजरायल की 'धरती को झुलसाने की नीति और सामूहिक सजा' न तो उसकी सुरक्षा सुनिश्चित कर सकती है और न ही क्षेत्र में स्थिरता ला सकती है।
मुख्य घटनाक्रम
सलाम ने अपने संबोधन में कहा, 'पिछले कुछ दिनों में इजरायल की ओर से की गई खतरनाक और जरूरत से ज्यादा सैन्य बढ़त को देखते हुए, यह आवश्यक है कि राजनीतिक और कूटनीतिक प्रयासों को तेज किया जाए ताकि जल्द और वास्तविक युद्धविराम हासिल किया जा सके।' उन्होंने आरोप लगाया कि इजरायल 'शहरों और गांवों को नष्ट कर रहा है और लोगों को अपने घर छोड़ने के लिए मजबूर कर रहा है।'
यह बयान ऐसे समय आया जब इजरायली सेना लगातार दक्षिणी लेबनान के कई गांवों के लिए नए निकासी आदेश जारी कर रही है। इसके साथ ही वाशिंगटन की मध्यस्थता में दोनों देशों के बीच शांति वार्ता भी जारी है।
इजरायल के साथ सीधी वार्ता का बचाव
सलाम ने अपनी सरकार की ओर से इजरायल के साथ सीधी बातचीत का बचाव किया, जिसका ईरान-समर्थित हिज्बुल्लाह विरोध करता है। उन्होंने इन वार्ताओं को लेबनान के लिए 'सबसे कम नुकसान पहुँचाने वाला रास्ता' बताया।
उन्होंने लेबनान की जनता को संबोधित करते हुए स्वीकार किया कि इन वार्ताओं की सफलता 'गारंटीशुदा नहीं है।' उनके शब्दों में, 'क्या इन वार्ताओं की सफलता की गारंटी है? बिल्कुल नहीं। लेकिन आज हमारे सामने मौजूद अन्य विकल्पों की तुलना में यह हमारे देश और हमारे लोगों के लिए सबसे कम कीमत चुकाने वाला रास्ता है।'
राष्ट्रीय एकता की अपील
सलाम ने सभी लेबनानी पक्षों से एकजुट होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि 'इसके लिए एकाधिकार की सोच को छोड़ना होगा और जिद को समाप्त करना होगा। क्योंकि आज राज्य सभी लेबनानी नागरिकों की ओर से बातचीत कर रहा है, और सभी का कर्तव्य है कि वे राज्य के झंडे तले एकजुट हों।' यह अपील स्पष्ट रूप से हिज्बुल्लाह जैसे सशस्त्र गुटों की ओर इशारा करती है जो सरकारी वार्ता प्रक्रिया से बाहर स्वतंत्र रूप से कार्य करते हैं।
युद्धविराम समझौते की पृष्ठभूमि
17 अप्रैल को संघर्ष रोकने के लिए एक औपचारिक युद्धविराम लागू हुआ था, लेकिन रिपोर्टों के अनुसार इसका पालन कभी पूरी तरह नहीं हुआ। इजरायल ने हाल के दिनों में हिज्बुल्लाह के खिलाफ अपने हवाई और जमीनी हमले तेज कर दिए हैं। गौरतलब है कि यह स्थिति ऐसे समय में और जटिल हो गई है जब लेबनान की नई सरकार अपनी संप्रभुता स्थापित करने और घरेलू राजनीतिक संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रही है।
आगे की राह
वाशिंगटन की मध्यस्थता में जारी वार्ता के नतीजे अनिश्चित बने हुए हैं। सलाम की यह स्वीकारोक्ति कि परिणाम की कोई गारंटी नहीं है, लेबनान की कमज़ोर कूटनीतिक स्थिति को उजागर करती है। आने वाले दिनों में कूटनीतिक दबाव और ज़मीनी हालात दोनों मिलकर यह तय करेंगे कि क्षेत्र में स्थायी शांति की संभावना कितनी है।