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इजरायल का बड़ा फैसला: अमेरिका-ईरान समझौते के बाद भी दक्षिणी लेबनान में डटी रहेगी IDF

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इजरायल का बड़ा फैसला: अमेरिका-ईरान समझौते के बाद भी दक्षिणी लेबनान में डटी रहेगी IDF

सारांश

अमेरिका-ईरान शांति समझौते के बावजूद इजरायल ने साफ कह दिया है — IDF दक्षिणी लेबनान नहीं छोड़ेगी। रक्षा मंत्री कॉट्ज ने ट्रंप और हेगसेथ को पहले ही यह बता दिया था। वाशिंगटन और तेल अवीव के बीच यह दरार मध्य-पूर्व की कूटनीति को नई दिशा दे सकती है।

मुख्य बातें

इजरायल के रक्षा मंत्री इजराइल कॉट्ज ने 15 जून 2025 को घोषणा की कि IDF दक्षिणी लेबनान से नहीं हटेगी।
अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते में हिज्बुल्लाह के खिलाफ लड़ाई समाप्त करने का प्रावधान बताया जा रहा है, जिसे इजरायल ने अस्वीकार किया।
IDF बिना किसी समय-सीमा के लेबनान , सीरिया और गाजा के सुरक्षा जोन में तैनात रहेगी।
प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने यह नीति राष्ट्रपति ट्रंप और रक्षा सचिव हेगसेथ को पहले ही स्पष्ट कर दी थी।
कॉट्ज ने चेतावनी दी कि ईरान द्वारा हमले की स्थिति में इजरायल 'पूरी ताकत' से जवाब देगा।

इजरायल के रक्षा मंत्री इजराइल कॉट्ज ने 15 जून 2025 को स्पष्ट किया कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की घोषणा के बावजूद इज़रायल डिफेंस फोर्सेज (IDF) दक्षिणी लेबनान से नहीं हटेगी। रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि हिज्बुल्लाह के खिलाफ अभियान जारी रहेगा और सुरक्षा जोन पर इजरायल का नियंत्रण बना रहेगा।

इजरायल की स्पष्ट नीति

कॉट्ज ने एक आधिकारिक बयान में कहा, 'प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और मैं एक स्पष्ट नीति पर चल रहे हैं, जिसके तहत IDF बिना किसी समय-सीमा के लेबनान, सीरिया और गाजा के सुरक्षा जोन में रहेगी, ताकि सीमा और इजरायली समुदाय को जिहादी तत्वों से बचाया जा सके।' उन्होंने कहा कि सुरक्षा जोन पर कब्जा बनाए रखना युद्ध में IDF की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है।

सुरक्षा जोन में क्या होगा

रक्षा मंत्री के अनुसार, सुरक्षा जोन से स्थानीय निवासियों को हटाया जाएगा और जमीन के ऊपर तथा नीचे मौजूद सभी आतंकवादी ढाँचों को नष्ट किया जाएगा। इसमें संपर्क-रेखा के गाँवों के वे मकान भी शामिल हैं जो कथित तौर पर आतंकवादियों के गुप्त ठिकानों के रूप में उपयोग किए जा रहे थे।

अमेरिका को दी गई स्पष्ट चेतावनी

कॉट्ज ने बताया कि प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने यह स्थिति अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों के समक्ष पहले ही स्पष्ट कर दी थी। उन्होंने स्वयं भी अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ को इस नीति से अवगत कराया। रक्षा मंत्री ने कहा, 'हम इजरायल के सुरक्षा हितों और अपने नागरिकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेंगे। हम सुरक्षा जोन से पीछे नहीं हटेंगे।'

ईरान को सीधी चेतावनी

कॉट्ज ने आगाह किया कि यदि लेबनान की घटनाओं के चलते ईरान इजरायल पर हमला करता है, तो इजरायल पूरी ताकत से जवाब देगा। यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-ईरान समझौते को लेकर मध्य-पूर्व में कूटनीतिक हलचल तेज है और इजरायल खुद को इस प्रक्रिया से अलग-थलग महसूस कर रहा है।

आगे क्या होगा

गौरतलब है कि अमेरिका-ईरान समझौते में हिज्बुल्लाह के खिलाफ लड़ाई खत्म करने का प्रावधान भी बताया जा रहा है, जिसे इजरायल ने सीधे तौर पर अस्वीकार कर दिया है। इजरायल की यह कड़ी प्रतिक्रिया वाशिंगटन और तेल अवीव के बीच बढ़ते तनाव का संकेत है, और आने वाले दिनों में अमेरिकी दबाव और इजरायली अड़ियल रुख के बीच टकराव और गहरा हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

रणनीतिक है। उल्लेखनीय है कि इजरायल पहले भी 2006 के युद्धविराम के बाद लेबनान में IDF की उपस्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय दबाव झेल चुका है, और हर बार उसने सुरक्षा तर्क को राजनीतिक समझौते से ऊपर रखा है। असली सवाल यह है कि क्या ट्रंप प्रशासन इजरायल को इस बार वाकई रोक सकता है, या यह 'स्पष्ट संवाद' भी पिछले दबावों की तरह बेनतीजा रहेगा। मध्य-पूर्व में किसी भी टिकाऊ समझौते की परीक्षा इजरायल की सहमति के बिना अधूरी है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इजरायल ने अमेरिका-ईरान समझौते पर क्या रुख अपनाया है?
इजरायल ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अमेरिका-ईरान समझौते से सहमत नहीं है और IDF दक्षिणी लेबनान से नहीं हटेगी। रक्षा मंत्री कॉट्ज के अनुसार, यह नीति प्रधानमंत्री नेतन्याहू और इजरायली सुरक्षा नेतृत्व की साझा स्थिति है।
IDF दक्षिणी लेबनान में क्यों बनी हुई है?
इजरायल का कहना है कि दक्षिणी लेबनान में सुरक्षा जोन बनाए रखना हिज्बुल्लाह और अन्य जिहादी तत्वों से इजरायली सीमा और नागरिकों की रक्षा के लिए जरूरी है। रक्षा मंत्री कॉट्ज ने इसे IDF की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक बताया है।
अमेरिका और ईरान के बीच क्या समझौता हुआ है?
रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और ईरान ने लंबी बातचीत के बाद शांति समझौते का ऐलान किया है, जिसमें कथित तौर पर हिज्बुल्लाह के खिलाफ लड़ाई खत्म करने का प्रावधान भी शामिल है। हालाँकि इजरायल इस शर्त को मानने से इनकार कर चुका है।
इजरायल ने ईरान को क्या चेतावनी दी है?
रक्षा मंत्री कॉट्ज ने कहा कि यदि लेबनान की घटनाओं के कारण ईरान इजरायल पर हमला करता है, तो इजरायल पूरी ताकत से जवाबी कार्रवाई करेगा। यह चेतावनी अमेरिका-ईरान समझौते की पृष्ठभूमि में और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।
क्या अमेरिका इजरायल पर लेबनान से हटने का दबाव डाल रहा है?
कॉट्ज के बयान से संकेत मिलता है कि ऐसा दबाव मौजूद है। उन्होंने कहा कि इजरायल 'मौजूदा और आने वाले दबावों' के बावजूद सुरक्षा जोन नहीं छोड़ेगा, और यह स्थिति राष्ट्रपति ट्रंप तथा रक्षा सचिव हेगसेथ को पहले ही बता दी गई है।
राष्ट्र प्रेस
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