दक्षिण लेबनान में IDF पर कोई पाबंदी नहीं: इजरायली रक्षा मंत्री काट्ज का स्पष्ट ऐलान
सारांश
मुख्य बातें
इजरायल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने 21 जून 2026 को स्पष्ट किया कि दक्षिणी लेबनान में तैनात इजरायल डिफेंस फोर्सेस (IDF) पर हिज्बुल्लाह के खिलाफ कार्रवाई को लेकर कोई प्रतिबंध नहीं है। द टाइम्स ऑफ इजरायल के अनुसार, काट्ज ने कहा, "दक्षिणी लेबनान में तैनात IDF को अपनी सुरक्षा के लिए किसी भी खतरे को खत्म करने की पूरी छूट है और उन पर कोई पाबंदी नहीं है।" यह बयान ऐसे समय आया है जब स्विट्जरलैंड में ईरान-अमेरिका वार्ता की तैयारियाँ जोरों पर हैं।
मुख्य घटनाक्रम
काट्ज के अनुसार, IDF के जवान अभी भी दक्षिणी लेबनान में एक निर्धारित सुरक्षा क्षेत्र में तैनात हैं और हिज्बुल्लाह के विरुद्ध सैन्य अभियान जारी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हाल ही में घोषित संघर्षविराम के बावजूद IDF उत्तरी इजरायल की बस्तियों की सुरक्षा के लिए बनाए गए इस सुरक्षा क्षेत्र से पीछे नहीं हटेगी।
गौरतलब है कि यह बयान बर्गेनस्टॉक वार्ता की पृष्ठभूमि में आया है, जिसमें ईरान ने लेबनान और हिज्बुल्लाह के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है।
इजरायली नेतृत्व का एकजुट रुख
काट्ज से पहले इजरायल के वित्त मंत्री बेजालेल स्मोट्रिच ने भी इसी रुख को दोहराया था। द टाइम्स ऑफ इजरायल के अनुसार, स्मोट्रिच ने कहा, "जब तक हिज्बुल्लाह हथियार नहीं डालता, हम एक मिलीमीटर भी पीछे नहीं हटेंगे। यही प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री और मेरा भी रुख है और हम इस पर कायम रहेंगे। अमेरिका अगर वापसी की माँग भी करता है, तब भी इजरायल पीछे नहीं हटेगा।"
यह इजरायल के शीर्ष नेतृत्व — प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री और वित्त मंत्री — का एकसमान और सार्वजनिक रूप से व्यक्त साझा रुख है, जो किसी भी बाहरी दबाव में झुकने से इनकार करता है।
कूटनीतिक पृष्ठभूमि
इस बीच स्विट्जरलैंड में ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता की तैयारी चल रही है। बताया जा रहा है कि इस वार्ता के एजेंडे में हिज्बुल्लाह और इजरायल के बीच चल रहा संघर्ष एक प्रमुख विषय रहेगा।
स्विट्जरलैंड रवाना होने से पहले अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा था कि उनकी प्राथमिकताओं में लेबनान में सीजफायर की दिशा में प्रगति भी शामिल है। यह ऐसे समय में है जब इजरायल अपनी सैन्य स्थिति पर दृढ़ता से कायम है।
क्षेत्रीय तनाव पर असर
इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच संघर्षविराम की घोषणा के बावजूद जमीनी स्तर पर तनाव बना हुआ है। IDF की दक्षिणी लेबनान में निरंतर उपस्थिति और काट्ज के ताजा बयान से यह संकेत मिलता है कि इजरायल कूटनीतिक वार्ताओं से स्वतंत्र अपनी सैन्य रणनीति पर चल रहा है।
विश्लेषकों के अनुसार, यह बयान ईरान-अमेरिका वार्ता से पहले इजरायल की ओर से एक स्पष्ट कूटनीतिक संदेश भी माना जा सकता है — कि किसी भी समझौते में इजरायल की सुरक्षा संबंधी शर्तें अनिवार्य होंगी।
आगे क्या
स्विट्जरलैंड में ईरान-अमेरिका वार्ता के नतीजे और उपराष्ट्रपति वेंस की पहल पर सबकी नजर टिकी है। इजरायल के कड़े रुख को देखते हुए लेबनान में स्थायी संघर्षविराम की राह अभी भी कठिन बनी हुई है।