इजरायल-लेबनान फ्रेमवर्क समझौता: नेतन्याहू बोले — ईरान-हिज्बुल्लाह कमज़ोर, शांति का रास्ता खुला
सारांश
मुख्य बातें
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने 28 जून 2026 को यरूशलम में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि अमेरिका की मध्यस्थता में हस्ताक्षरित इजरायल-लेबनान फ्रेमवर्क समझौता दोनों देशों के बीच स्थायी शांति की दिशा में निर्णायक कदम है। उन्होंने दावा किया कि यह समझौता इजरायल और लेबनान को मज़बूत करता है, जबकि ईरान और हिज्बुल्लाह को कमज़ोर करता है।
समझौते की मुख्य शर्तें
नेतन्याहू के अनुसार, इस फ्रेमवर्क के तहत अमेरिका और लेबनान दोनों ने इजरायल के दक्षिणी लेबनान में सुरक्षा जोन बनाए रखने के अधिकार को मान्यता दी है — जब तक यह इजरायल की सुरक्षा के लिए ज़रूरी माना जाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इजरायली सेना तब तक सुरक्षा जोन पर नियंत्रण बनाए रखेगी जब तक हिज्बुल्लाह और अन्य सशस्त्र संगठन हथियार नहीं छोड़ देते।
समझौते में सुरक्षा जोन की उत्तरी सीमा के पास दो विशेष क्षेत्र शामिल किए गए हैं, जिनकी पहचान इजरायली सेना ने की है। इन क्षेत्रों में एक पायलट कार्यक्रम शुरू किया जाएगा, जिसका उद्देश्य हिज्बुल्लाह की उपस्थिति समाप्त करना और उन इलाकों को लेबनानी सेना के नियंत्रण में सौंपना है।
नेतन्याहू का दावा — हिज्बुल्लाह को भारी नुकसान
नेतन्याहू ने दावा किया कि युद्ध शुरू होने के बाद से इजरायल ने 9,000 से अधिक हिज्बुल्लाह लड़ाकों को मार गिराया है और समूह के 1,50,000 मिसाइलों व रॉकेट के भंडार का लगभग 90 प्रतिशत नष्ट कर दिया है। हालांकि इन आँकड़ों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
अमेरिकी विदेश सचिव की प्रतिक्रिया
इससे एक दिन पहले, शुक्रवार 27 जून को वाशिंगटन डीसी में राजदूत स्तर की वार्ता के समापन पर अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो ने इस समझौते पर हस्ताक्षर की घोषणा की। रुबियो ने कहा, "आज का दिन अच्छा है क्योंकि हमें यह ऐलान करते हुए खुशी हो रही है कि लेबनान की संप्रभु सरकार और इजरायल सरकार के बीच एक फ्रेमवर्क समझौता हुआ, जो पक्की शांति और सुरक्षा के लिए एक फ्रेमवर्क बनाना शुरू करता है।"
समझौते का व्यापक उद्देश्य
इस फ्रेमवर्क के तीन प्रमुख लक्ष्य बताए गए हैं: लेबनान की संप्रभुता की पुनर्स्थापना, हिज्बुल्लाह के सैन्य ढाँचे को पूरी तरह ध्वस्त करना, और सुरक्षा खतरे समाप्त होने के बाद इजरायली सेना की अपनी सीमाओं पर वापसी सुनिश्चित करना। यह समझौता एक नाज़ुक युद्धविराम को फिर से लागू करने की भी बात करता है, जो दोनों पक्षों के बीच पहले से चल रहे तनाव के बीच आया है।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में व्यापक अस्थिरता बनी हुई है और हिज्बुल्लाह पर ईरानी प्रभाव को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंताएँ गहरी हैं। पायलट कार्यक्रम की सफलता और हिज्बुल्लाह के निःशस्त्रीकरण की प्रक्रिया यह तय करेगी कि यह फ्रेमवर्क वास्तविक शांति समझौते में बदल पाता है या नहीं। आलोचकों का कहना है कि समझौते की व्यावहारिक सफलता हिज्बुल्लाह की ज़मीनी प्रतिक्रिया और लेबनानी सरकार की क्षमता पर निर्भर करेगी।