इजरायल-लेबनान शांति समझौते का ईयू ने किया स्वागत, €10 करोड़ की अतिरिक्त सहायता का ऐलान
सारांश
मुख्य बातें
यूरोपीय संघ (EU) ने 26 जून 2026 को वाशिंगटन में हस्ताक्षरित इजरायल-लेबनान त्रिपक्षीय फ्रेमवर्क समझौते का खुलकर स्वागत किया है और इसे मध्य पूर्व में तनाव घटाने की दिशा में एक निर्णायक कदम बताया है। ईयू आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इस समझौते को शांति की ओर बढ़ाया गया ठोस कदम करार दिया और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए यूरोपीय संघ की प्रतिबद्धता दोहराई।
समझौते की मुख्य बातें
अमेरिका की मध्यस्थता में संपन्न इस त्रिपक्षीय फ्रेमवर्क का मुख्य उद्देश्य इजरायल और लेबनान के बीच स्थायी शांति की रूपरेखा तैयार करना है। इसके तहत दक्षिणी लेबनान में चरणबद्ध तरीके से लेबनानी सेना की तैनाती का प्रावधान है, जो क्षेत्र में राज्य-नियंत्रण स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
ईयू की प्रतिक्रिया और वित्तीय सहायता
वॉन डेर लेयेन ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा कि मध्य पूर्व में तब तक स्थायी शांति संभव नहीं है, जब तक लेबनान में हालात अस्थिर बने रहते हैं। उन्होंने मध्यस्थता के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका का आभार जताया।
वॉन डेर लेयेन के अनुसार, "आगे का मुख्य कदम गैर-राज्य समूहों के निरस्त्रीकरण और लेबनान की संप्रभुता तथा क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करना है। दीर्घकालिक क्षेत्रीय स्थिरता के लिए इस प्रक्रिया का हम समर्थन करने को तैयार हैं।" इसके साथ ही विस्थापितों के लिए मानवीय सहायता जारी रखते हुए €10 करोड़ (100 मिलियन यूरो) की अतिरिक्त सहायता जुटाने की घोषणा भी की गई।
लेबनान के राष्ट्रपति की प्रतिक्रिया
लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन ने इस फ्रेमवर्क समझौते को देश की पूर्ण संप्रभुता बहाल करने की दिशा में पहला महत्वपूर्ण कदम बताया। राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से जारी बयान में उन्होंने कहा कि यह समझौता विस्थापित लेबनानी नागरिकों की अपने घरों और जमीन पर वापसी का मार्ग प्रशस्त करेगा। आउन ने स्पष्ट किया कि "लेबनान अब किसी भी प्रकार के कब्जे को स्वीकार नहीं करेगा।"
उन्होंने वार्ता की मेजबानी और मध्यस्थता के लिए अमेरिका तथा पूरी प्रक्रिया में साथ देने वाले अरब और मित्र देशों का भी आभार जताया।
हिज्बुल्लाह का विरोध
हालांकि, इस समझौते को लेकर सहमति एकतरफा नहीं है। हिज्बुल्लाह ने इस फ्रेमवर्क का कड़ा विरोध किया है। संगठन के सांसद हसन फदलल्लाह ने कहा कि हिज्बुल्लाह इस फ्रेमवर्क को लागू करने की किसी भी कोशिश का विरोध करेगा और अपने हथियार नहीं छोड़ेगा। यह विरोध समझौते के सबसे जटिल पहलू — गैर-राज्य समूहों के निरस्त्रीकरण — को सीधी चुनौती देता है।
आगे की राह
गौरतलब है कि यह समझौता ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में वर्षों से चले आ रहे संघर्ष ने लाखों लेबनानी नागरिकों को विस्थापित किया है। ईयू की €10 करोड़ की अतिरिक्त सहायता इन्हीं विस्थापितों के पुनर्वास और मानवीय राहत के लिए निर्धारित है। समझौते की सफलता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि लेबनानी सेना दक्षिणी क्षेत्र में कितनी प्रभावी तैनाती कर पाती है और हिज्बुल्लाह के प्रतिरोध को किस तरह संबोधित किया जाता है।