लेबनान-इजरायल फ्रेमवर्क समझौता: राष्ट्रपति औन ने ट्रंप को दिया लागू करने का वादा
सारांश
मुख्य बातें
लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने 28 जून 2025 की देर रात अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ फोन पर बातचीत की और वादा किया कि लेबनान सरकार इजरायल के साथ अमेरिकी मध्यस्थता में बने फ्रेमवर्क समझौते को लागू करने में अपनी पूरी जिम्मेदारी निभाएगी। यह जानकारी लेबनानी राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से जारी आधिकारिक बयान में दी गई।
औन ने क्या कहा
राष्ट्रपति औन ने ट्रंप से उम्मीद जताई कि अमेरिका समझौते के उल्लंघन को रोकने में सक्रिय भूमिका निभाएगा और यह सुनिश्चित करेगा कि डील के तहत किए गए सभी वादे पूरे हों। उन्होंने विशेष रूप से इजरायल पर दक्षिणी लेबनान में कब्जे वाले इलाकों से हटने का दबाव बनाने की माँग की, ताकि लेबनानी सेना को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सीमा तक तैनात किया जा सके।
ट्रंप का समर्थन का आश्वासन
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लेबनान और उसके लोगों के प्रति वाशिंगटन के समर्थन को दोहराया। उन्होंने कहा कि अमेरिका लेबनान की संप्रभुता, स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता का समर्थन करेगा, साथ ही देश के पूरे इलाके में सशस्त्र बलों के माध्यम से राज्य प्राधिकरण के विस्तार का भी समर्थन करेगा। फोन कॉल के अंत में ट्रंप ने कहा कि वह जल्द ही वाशिंगटन में औन से मिलने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
फ्रेमवर्क समझौते की पृष्ठभूमि
इससे एक दिन पहले, शुक्रवार को अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो ने घोषणा की थी कि इजरायल और लेबनान स्थायी शांति और सुरक्षा के लिए एक फ्रेमवर्क समझौते पर पहुँच गए हैं। वाशिंगटन डीसी में राजदूत स्तर की बातचीत के नए दौर के बाद हस्ताक्षरित इस समझौते में दोनों देशों के बीच युद्धविराम को फिर से लागू करने का प्रावधान है।
हस्ताक्षर समारोह के दौरान रुबियो ने कहा, 'आज का दिन अच्छा है क्योंकि हमें यह ऐलान करते हुए खुशी हो रही है — अमेरिका की मध्यस्थता और समर्थन से लेबनान की संप्रभु सरकार और इजरायली सरकार के बीच यह फ्रेमवर्क पक्की शांति और सुरक्षा की नींव रखेगा।'
समझौते के मुख्य उद्देश्य
इस फ्रेमवर्क के तीन प्रमुख लक्ष्य हैं: लेबनान की संप्रभुता की बहाली, हिज्बुल्लाह के सैन्य ढाँचे को निष्क्रिय करना, और सुरक्षा खतरे समाप्त होने के बाद इजरायली सेना को अपनी सीमाओं पर वापस लौटने में सहायता करना। यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिणी लेबनान में तनाव अभी भी बना हुआ है और लेबनानी सेना की सीमावर्ती इलाकों में तैनाती पूरी तरह नहीं हो पाई है।
आगे क्या होगा
राष्ट्रपति औन की वाशिंगटन यात्रा जल्द होने की संभावना है, जो इस कूटनीतिक प्रक्रिया को और गति दे सकती है। अब सबकी नजर इस बात पर होगी कि लेबनान सरकार समझौते की शर्तें कितनी तेजी से जमीन पर उतारती है और इजरायल दक्षिणी लेबनान से अपनी वापसी की समयसीमा पर कितना अमल करता है।