10 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

इजरायली सेना की पूर्ण वापसी लेबनान की सबसे बड़ी माँग: राष्ट्रपति जोसेफ औन

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
इजरायली सेना की पूर्ण वापसी लेबनान की सबसे बड़ी माँग: राष्ट्रपति जोसेफ औन

सारांश

लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने 'लिबरेशन डे' पर दो-टूक कहा — बातचीत आत्मसमर्पण नहीं है, इजरायली सेना की पूर्ण वापसी ही एकमात्र लक्ष्य है। 3,000 से अधिक मौतों और जारी हमलों के बीच यह संदेश बेरूत की कूटनीतिक रणनीति की सीमाएँ और दृढ़ता दोनों को एक साथ उजागर करता है।

मुख्य बातें

लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने 25 मई 2026 को 'रेजिस्टेंस एंड लिबरेशन डे' पर इजरायली सेना की पूर्ण वापसी को देश की सर्वोच्च माँग बताया।
राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि चल रही बातचीत आत्मसमर्पण नहीं , बल्कि लेबनान की संप्रभुता और सुरक्षा स्थापित करने के लिए है।
लेबनानी स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार इजरायली हमलों में अब तक 3,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।
2 मार्च 2026 से इजरायल ने हिज्बुल्लाह के खिलाफ अभियान तेज किया है; सीजफायर के बावजूद हमले जारी हैं।
औन ने लेबनानी सेना को राष्ट्रीय सुरक्षा की 'एकमात्र गारंटर' बताया और जनता से एकजुटता बनाए रखने का आह्वान किया।

लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने 25 मई 2026 को 'रेजिस्टेंस एंड लिबरेशन डे' के अवसर पर स्पष्ट किया कि दक्षिणी लेबनान से इजरायली सेना की पूर्ण वापसी उनके देश की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि इस लक्ष्य को पाने के लिए चल रही बातचीत किसी समझौते या आत्मसमर्पण का पर्याय नहीं है।

मुख्य घटनाक्रम

यह दिवस वर्ष 2000 में 22 वर्षों के इजरायली कब्जे की समाप्ति की स्मृति में मनाया जाता है। राष्ट्रपति औन ने कहा कि इस बार यह स्मरण ऐसे समय में हो रहा है जब इजरायल अब भी दक्षिण लेबनान के कुछ गाँवों पर काबिज है और लगातार हमले जारी हैं। उन्होंने कहा, 'लेबनान की सबसे बड़ी माँग इजरायली सेना की पूर्ण वापसी है।'

बातचीत का उद्देश्य

राष्ट्रपति औन ने स्पष्ट किया कि सरकार कूटनीतिक बातचीत के ज़रिए इस लक्ष्य को हासिल करने में जुटी है। उनके अनुसार यह वार्ता किसी प्रकार के समर्पण के लिए नहीं, बल्कि लेबनान की भूमि, संप्रभुता और सुरक्षा के अधिकार को स्थापित एवं सुदृढ़ करने के लिए हो रही है। यह ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद दक्षिणी लेबनान में सीजफायर के बाद भी हमले रुके नहीं हैं।

लेबनानी सेना की भूमिका

औन ने लेबनानी सेना को देश की 'भूमि की अखंडता और राष्ट्रीय सुरक्षा की एकमात्र गारंटर' बताया। उन्होंने लेबनानी जनता की एकजुटता की सराहना करते हुए सरकार के फैसलों के साथ खड़े रहने का आह्वान किया। गौरतलब है कि 2 मार्च 2026 से इजरायल ने हिज्बुल्लाह के खिलाफ अभियान तेज किया है।

शहीदों को श्रद्धांजलि

राष्ट्रपति ने उन सैनिकों और प्रतिरोध लड़ाकों को याद किया जिन्होंने दक्षिणी इलाकों की मुक्ति के लिए अपने प्राण न्योछावर किए। उन्होंने कहा कि उनकी शहादत को व्यर्थ नहीं जाने दिया जाएगा और देश में वैधानिक कानून स्थापित करने की दिशा में पूरी प्रतिबद्धता से आगे बढ़ना होगा।

आम जनता पर असर

लेबनानी स्वास्थ्य मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार इजरायली हमलों में अब तक 3,000 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। दक्षिणी लेबनान के कई गाँव अब भी इजरायली नियंत्रण में बताए जा रहे हैं। राष्ट्रपति औन ने अपने संबोधन के अंत में कहा, 'लिबरेशन डे का सम्मान तभी बरकरार रहेगा जब हम ऐसा लेबनान बनाएँ जो जनता की हिफाज़त करने में सक्षम हो — एक किले की तरह।' दक्षिणी लेबनान की मुक्ति को उन्होंने देश की अपरिहार्य जिम्मेदारी बताया।

संपादकीय दृष्टिकोण

दूसरी तरफ हिज्बुल्लाह समर्थकों को यह संदेश देना चाहते हैं कि यह झुकना नहीं है। असली सवाल यह है कि जब सीजफायर के बावजूद हमले जारी हैं और 3,000 से अधिक जानें जा चुकी हैं, तो बातचीत के ज़रिए 'पूर्ण वापसी' का लक्ष्य कितना व्यावहारिक है। लेबनान के पास अंतरराष्ट्रीय समर्थन सीमित है और सेना की क्षमता पर भी सवाल उठते रहे हैं। बिना ठोस अंतरराष्ट्रीय दबाव तंत्र के, यह घोषणा प्रतीकात्मक रह सकती है।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'रेजिस्टेंस एंड लिबरेशन डे' क्या है?
यह दिवस वर्ष 2000 में दक्षिणी लेबनान पर 22 वर्षों के इजरायली कब्जे की समाप्ति की याद में मनाया जाता है। लेबनान में इसे राष्ट्रीय गौरव के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।
राष्ट्रपति जोसेफ औन ने बातचीत को आत्मसमर्पण क्यों नहीं माना?
औन के अनुसार चल रही वार्ता का उद्देश्य लेबनान की भूमि, संप्रभुता और सुरक्षा के अधिकार को स्थापित करना है, न कि कोई समझौता करना। उन्होंने इसे देश के हितों की रक्षा के लिए एक कूटनीतिक साधन बताया।
दक्षिणी लेबनान में अब तक कितने लोगों की मौत हुई है?
लेबनानी स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार इजरायली हमलों में अब तक 3,000 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। 2 मार्च 2026 से इजरायल ने हिज्बुल्लाह के खिलाफ अभियान तेज किया है।
लेबनानी सेना की इस संघर्ष में क्या भूमिका है?
राष्ट्रपति औन ने लेबनानी सेना को देश की भूमि की अखंडता और राष्ट्रीय सुरक्षा की एकमात्र गारंटर बताया है। उनके अनुसार सेना ही वह संस्था है जो देश की रक्षा सुनिश्चित कर सकती है।
इजरायल अब भी दक्षिणी लेबनान में क्यों मौजूद है?
नवंबर 2024 के सीजफायर समझौते के बावजूद इजरायली सेना दक्षिण लेबनान के कुछ गाँवों में कथित तौर पर अब भी मौजूद है और हमले जारी हैं। लेबनान का कहना है कि यह अंतरराष्ट्रीय समझौतों का उल्लंघन है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 3 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 2 महीने पहले
  8. 7 महीने पहले