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लेबनान निर्णायक मोड़ पर: राष्ट्रपति जोसेफ औन ने कहा — संप्रभु राज्य या मिलिशिया राज, अब फैसला करना होगा

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लेबनान निर्णायक मोड़ पर: राष्ट्रपति जोसेफ औन ने कहा — संप्रभु राज्य या मिलिशिया राज, अब फैसला करना होगा

सारांश

इजरायली हमलों और आंतरिक विखंडन के बीच लेबनानी राष्ट्रपति जोसेफ औन ने देश को कड़ा संदेश दिया — संप्रभु राज्य या मिलिशिया राज, अब एक ही रास्ता चुनना होगा। फ्रांजियेह हत्याकांड की 48वीं बरसी पर जारी यह बयान लेबनान की राजनीतिक दिशा का निर्णायक पड़ाव बन सकता है।

मुख्य बातें

लेबनानी राष्ट्रपति जोसेफ औन ने 13 जून 2025 को कहा कि लेबनान एक निर्णायक मोड़ पर है — संप्रभु राज्य या मिलिशिया प्रभाव।
यह संदेश पूर्व मंत्री टोनी सुलेमान फ्रांजियेह और उनके परिवार की हत्या की 48वीं बरसी पर जारी किया गया।
औन ने राष्ट्रीय एकता को 'अस्तित्वगत आवश्यकता' बताया और सांप्रदायिक राजनीति व बाहरी खींचतान को अस्वीकार किया।
राष्ट्रपति कार्यालय के आधिकारिक एक्स अकाउंट से बयान जारी हुआ, जिसमें हथियारों पर राज्य के एकाधिकार की माँग की गई।
यह बयान इजरायल के दक्षिणी लेबनान पर जारी हमलों की पृष्ठभूमि में आया है।

इजरायल के दक्षिणी लेबनान पर जारी हमलों के बीच लेबनानी राष्ट्रपति जोसेफ औन ने 13 जून 2025 को एक कड़े संदेश में कहा कि देश एक ऐसे निर्णायक मोड़ पर आ खड़ा हुआ है जहाँ या तो संप्रभु कानून-आधारित राज्य का मार्ग चुना जाए, या फिर हथियारबंद गुटों और विभाजनकारी राजनीति के प्रभाव में बने रहने का। यह संदेश 1978 में पूर्व मंत्री टोनी सुलेमान फ्रांजियेह, उनके परिवार और साथियों की हत्या की 48वीं बरसी पर जारी किया गया।

राष्ट्रपति के संदेश का सार

राष्ट्रपति कार्यालय के आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट से जारी इस बयान में औन ने कहा, 'यह ऐसा समय है जब धार्मिक और राजनीतिक मतभेदों या बाहरी खींचतान के लिए कोई जगह नहीं है।' उन्होंने राष्ट्रीय एकता को केवल एक नारा नहीं, बल्कि एक 'अस्तित्वगत आवश्यकता' बताया जो न्याय, समानता और सभी नागरिकों के अधिकारों पर टिकी होनी चाहिए।

फ्रांजियेह हत्याकांड से सबक

औन ने कहा कि इस दर्दनाक घटना की स्मृति यह सिखाती है कि वर्षों की शांति वह नहीं सिखा सकी, जो खून-खराबे की त्रासदियों ने सिखाया। उनके शब्दों में, 'एक ईमानदार राष्ट्रीय स्मृति अपने घावों का चयन नहीं करती, बल्कि सभी घावों को स्वीकार कर उनके आधार पर भविष्य के लिए एक समझौता बनाती है।' यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब लेबनान एक साथ बाहरी सैन्य दबाव और आंतरिक राजनीतिक विखंडन का सामना कर रहा है।

संप्रभुता बनाम मिलिशिया — केंद्रीय द्वंद्व

राष्ट्रपति ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'लेबनान आज एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है, जहाँ या तो देश के सभी लोग एक ऐसे संप्रभु राज्य के पक्ष में एकजुट हों जो हथियारों पर एकाधिकार रखे और कानून का शासन स्थापित करे, या फिर देश मिलिशिया और विभाजनकारी राजनीति के प्रभाव में बना रहे।' गौरतलब है कि हिज़्बुल्लाह जैसे सशस्त्र गुटों के समानांतर अस्तित्व को लेकर लेबनान में यह बहस दशकों से चली आ रही है।

सांप्रदायिक राजनीति को नकारा

औन ने कहा कि वर्तमान संकट न तो सांप्रदायिक राजनीति को सहन कर सकता है और न ही क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा को। उन्होंने फ्रांजियेह हत्याकांड और गृहयुद्ध के सभी पीड़ितों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि वे एक ऐसे लेबनान के लिए प्रतिबद्ध हैं जहाँ नागरिक समानता और स्वतंत्रता के साथ जीएँ और राज्य कानून व अधिकार के आधार पर कार्य करे।

आगे की राह

राष्ट्रपति औन ने अपना संदेश इन शब्दों के साथ समाप्त किया — 'ईश्वर शहीदों पर दया करे और लेबनान को स्वयं से ही बचाए।' इजरायली हमलों और आंतरिक राजनीतिक संकट के बीच यह संदेश लेबनान की राजनीतिक दिशा के लिए एक महत्त्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। अब देखना यह होगा कि राष्ट्रपति की यह अपील देश की विभिन्न राजनीतिक और सशस्त्र शक्तियों के बीच किस हद तक सहमति बना पाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या लेबनान की संस्थाएँ इसे व्यवहार में उतारने की स्थिति में हैं। हिज़्बुल्लाह जैसे सशस्त्र गुटों पर राज्य का नियंत्रण स्थापित करने की बात दशकों से होती आई है, और हर बार बाहरी दबाव या आंतरिक समझौतों की भेंट चढ़ गई है। इजरायली हमलों के बीच एकता की अपील तो समझ में आती है, लेकिन जब तक राजनीतिक दलों और सशस्त्र गुटों के बीच सत्ता-साझेदारी की संरचना नहीं बदलती, 'अस्तित्वगत आवश्यकता' एक नारे से आगे नहीं जाएगी।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लेबनानी राष्ट्रपति जोसेफ औन ने 13 जून को क्या कहा?
राष्ट्रपति जोसेफ औन ने कहा कि लेबनान एक निर्णायक मोड़ पर है जहाँ देश को तय करना होगा कि वह हथियारों पर एकाधिकार रखने वाला संप्रभु राज्य बनेगा या मिलिशिया और विभाजनकारी राजनीति के प्रभाव में बना रहेगा। यह बयान राष्ट्रपति कार्यालय के आधिकारिक एक्स अकाउंट से जारी किया गया।
यह बयान किस अवसर पर जारी किया गया?
यह संदेश 1978 में पूर्व मंत्री टोनी सुलेमान फ्रांजियेह, उनके परिवार और साथियों की हत्या की 48वीं बरसी पर जारी किया गया। औन ने इस त्रासदी को राष्ट्रीय स्मृति और भविष्य के निर्माण से जोड़ा।
राष्ट्रपति औन ने राष्ट्रीय एकता पर क्या कहा?
औन ने राष्ट्रीय एकता को केवल एक नारा नहीं बल्कि 'अस्तित्वगत आवश्यकता' बताया। उनके अनुसार यह एकता न्याय, समानता और सभी नागरिकों के अधिकारों पर आधारित होनी चाहिए, और वर्तमान संकट में सांप्रदायिक या क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा के लिए कोई जगह नहीं है।
इजरायल के हमलों के बीच लेबनान की क्या स्थिति है?
इजरायल के दक्षिणी लेबनान पर जारी हमलों के कारण देश बाहरी सैन्य दबाव और आंतरिक राजनीतिक विखंडन दोनों का एक साथ सामना कर रहा है। राष्ट्रपति औन का यह बयान इसी पृष्ठभूमि में आया है और इसे देश की राजनीतिक दिशा के लिए महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है।
लेबनान में मिलिशिया और राज्य के बीच विवाद क्यों पुराना है?
लेबनान में हिज़्बुल्लाह जैसे सशस्त्र गुटों का समानांतर अस्तित्व दशकों से बना हुआ है और राज्य की संप्रभुता पर सवाल उठाता रहा है। गृहयुद्ध के बाद से ही हथियारों पर राज्य के एकाधिकार की बहस चल रही है, लेकिन राजनीतिक सहमति अब तक नहीं बन पाई है।
राष्ट्र प्रेस
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