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लेबनानी राष्ट्रपति जोसेफ औन का ईरान पर तीखा प्रहार — 'लेबनान को मोहरा बनाना बंद करो'

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लेबनानी राष्ट्रपति जोसेफ औन का ईरान पर तीखा प्रहार — 'लेबनान को मोहरा बनाना बंद करो'

सारांश

लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने ईरान को खुली चेतावनी दी — लेबनान को अमेरिका से सौदेबाजी का हथियार बनाना बंद हो। इसी दिन इजराइली हमलों में 13 लेबनानी नागरिकों की मौत ने संकट की गहराई उजागर की। 2 मार्च से अब तक 3,558 मौतें — और राजनयिक गतिरोध जारी है।

मुख्य बातें

राष्ट्रपति जोसेफ औन ने ईरान पर आरोप लगाया कि वह अमेरिका से बातचीत में लेबनान को 'मोल-भाव के मोहरे' के रूप में इस्तेमाल कर रहा है।
औन ने हिज्बुल्लाह प्रमुख नईम कासिम की भी आलोचना की, कहा — 'वे लेबनान के लोग हैं, न कि कासिम के।' आईआरजीसी ने गुरुवार को कहा था कि 8 अप्रैल के समझौते के लिए ईरान की शर्त सभी मोर्चों पर पूर्ण युद्धविराम थी।
शुक्रवार को दक्षिणी लेबनान में इजराइली हमलों में कम से कम 13 लोग मारे गए , 15 घायल ; 8 कस्बों पर हमला।
2 मार्च से अब तक इजराइली हमलों में लेबनान में 3,558 मौतें और 10,870 घायल (लेबनान स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार)।
औन ने कहा कि लेबनान-इजराइल संघर्ष का हल केवल बातचीत से संभव है, और हिज्बुल्लाह मुद्दे को घरेलू स्तर पर सुलझाना होगा।

लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने ईरान पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत में लेबनान को 'मोल-भाव के मोहरे' के रूप में इस्तेमाल करना पूरी तरह अस्वीकार्य है। सीएनएन की मुख्य इंटरनेशनल एंकर क्रिस्टियन अमनपोर को दिए एक इंटरव्यू में — जो 6 जून को लेबनान के राष्ट्रपति कार्यालय द्वारा जारी किया गया — औन ने यह भी कहा कि हिज्बुल्लाह के महासचिव नईम कासिम के बयान लेबनानी जनता की भावनाओं का प्रतिनिधित्व नहीं करते।

औन का सीधा संदेश: 'यह हमारा देश है'

राष्ट्रपति औन ने इंटरव्यू में स्पष्ट शब्दों में कहा, 'यह आपका देश नहीं है, यह हमारा देश है। यह स्वीकार्य नहीं है कि क्षेत्रीय शक्तियाँ अपने हितों के लिए लेबनान का इस्तेमाल करें, जबकि आम लेबनानी नागरिक संघर्ष के कारण मौत, विस्थापन और तबाही झेलते रहें।' उन्होंने यह भी कहा कि सभी समुदायों और क्षेत्रों के अधिकांश लेबनानी नागरिक दशकों से चले आ रहे इस संघर्ष से थक चुके हैं और शांति से जीने के हकदार हैं।

हिज्बुल्लाह प्रमुख कासिम पर निशाना

हिज्बुल्लाह के महासचिव नईम कासिम — जिन्होंने अमेरिका-इजराइल समझौते का विरोध किया था और सड़क पर प्रदर्शन के जरिए सरकार गिराने की धमकी दी थी — पर टिप्पणी करते हुए औन ने कहा, 'वे लेबनान के लोग हैं, न कि नईम कासिम के लोग।' यह बयान लेबनान की सत्ता और हिज्बुल्लाह के बीच बढ़ते तनाव का संकेत देता है। औन ने जोर दिया कि हिज्बुल्लाह की सशस्त्र मौजूदगी के मूल कारणों — जिनमें लेबनानी क्षेत्रों से इजराइली वापसी और संघर्ष का अंत शामिल है — को घरेलू स्तर पर संबोधित करना होगा।

ईरान का रुख और क्षेत्रीय संदर्भ

गौरतलब है कि गुरुवार को ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने एक बयान में कहा था कि अमेरिका और इजराइल के साथ 8 अप्रैल को हुए समझौते को स्वीकार करने के लिए ईरान की मुख्य शर्त लेबनान समेत सभी मोर्चों पर पूर्ण युद्धविराम थी। यह बयान ऐसे समय में आया है जब लेबनान-इजराइल सीमा पर हिंसा जारी है और राजनयिक दबाव बढ़ रहा है।

दक्षिणी लेबनान में इजराइली हमले, 13 की मौत

इसी दिन — शुक्रवार को — दक्षिणी लेबनान में इजराइली हवाई और ड्रोन हमलों में कम से कम 13 लोग मारे गए और 15 अन्य घायल हो गए। लेबनान की नेशनल न्यूज एजेंसी के अनुसार, इन हमलों में कम से कम आठ कस्बों को निशाना बनाया गया, जिनमें डुएइर, हब्बूश और बुर्ज कलाउइयाह शामिल हैं। टायर जिले में जबल आमेल अस्पताल के पास हुए एक हमले में एक इमारत नष्ट हो गई और 12 नागरिक घायल हुए।

शुक्रवार देर रात लेबनान के पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑपरेशन्स सेंटर ने बताया कि जेबदीन शहर पर हुए इजराइली हवाई हमले में 5 लोगों की मौत और 2 घायल हुए, जिनमें एक महिला और मेडिकल स्टाफ का एक सदस्य शामिल था। लेबनान की पब्लिक हेल्थ मिनिस्ट्री के इमरजेंसी ऑपरेशन्स सेंटर के अनुसार, 2 मार्च से इजराइली हमलों में मरने वालों की कुल संख्या 3,558 और घायलों की संख्या 10,870 हो गई है।

आईडीएफ और हिज्बुल्लाह की जवाबी कार्रवाई

इजराइल डिफेंस फोर्सेज (आईडीएफ) ने बताया कि उसने शुक्रवार को दक्षिणी लेबनान में हिज्बुल्लाह के 2 चरमपंथियों को मार गिराया, जो आईडीएफ की विशेष टोही एवं स्पेशल ऑपरेशन यूनिट 'सायेरेट गिवती' के साथ हुई एक पिछली मुठभेड़ में शामिल थे। उस घटना में इजराइल का एक अधिकारी गंभीर रूप से घायल हुआ था और सायेरेट गिवती के कमांडर को मामूली चोटें आई थीं। दूसरी ओर, हिज्बुल्लाह ने कहा कि उसके लड़ाकों ने शकिफ (ब्यूफोर्ट) कैसल और आसपास के इलाकों में इजराइली सैनिकों और वाहनों को निशाना बनाया।

यह ऐसे समय में आया है जब लेबनान की नई सरकार और अंतरराष्ट्रीय समुदाय दोनों ही स्थायी युद्धविराम की दिशा में प्रयासरत हैं — और राष्ट्रपति औन का यह बयान उस प्रयास में लेबनान की संप्रभुता की माँग को केंद्र में रखता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और किसी राष्ट्रपति का इस तरह खुलकर ईरान और कासिम दोनों को चुनौती देना असाधारण है। लेकिन असली सवाल यह है कि बयानबाजी से आगे बेरूत कितना जा सकता है — जब तक इजराइली हमले जारी हैं और हिज्बुल्लाह सशस्त्र है, औन की संप्रभुता की माँग कागज़ी रहने का जोखिम उठाती है। 3,558 मौतों का आँकड़ा और रुकते नहीं हमले यह बताते हैं कि राजनयिक शब्दों और ज़मीनी हकीकत के बीच की खाई अभी भी बहुत गहरी है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लेबनानी राष्ट्रपति जोसेफ औन ने ईरान की आलोचना क्यों की?
राष्ट्रपति औन ने ईरान पर आरोप लगाया कि वह अमेरिका के साथ बातचीत में लेबनान को 'मोल-भाव के मोहरे' के रूप में इस्तेमाल कर रहा है, जबकि आम लेबनानी नागरिक मौत, विस्थापन और तबाही झेल रहे हैं। उन्होंने यह बात सीएनएन को दिए एक इंटरव्यू में कही जो 6 जून को जारी हुआ।
हिज्बुल्लाह प्रमुख नईम कासिम ने क्या कहा था जिस पर औन ने प्रतिक्रिया दी?
नईम कासिम ने अमेरिका-इजराइल समझौते का विरोध किया था और सड़क पर प्रदर्शन के जरिए सरकार गिराने की धमकी दी थी। राष्ट्रपति औन ने इस पर कहा कि 'वे लेबनान के लोग हैं, न कि नईम कासिम के लोग।'
6 जून को दक्षिणी लेबनान में क्या हुआ?
शुक्रवार 6 जून को दक्षिणी लेबनान में इजराइली हवाई और ड्रोन हमलों में कम से कम 13 लोग मारे गए और 15 घायल हुए। कम से कम आठ कस्बों को निशाना बनाया गया, जिनमें डुएइर, हब्बूश और बुर्ज कलाउइयाह शामिल हैं।
2 मार्च से लेबनान में इजराइली हमलों में कितने लोग मारे गए हैं?
लेबनान की पब्लिक हेल्थ मिनिस्ट्री के इमरजेंसी ऑपरेशन्स सेंटर के अनुसार, 2 मार्च से अब तक इजराइली हमलों में 3,558 लोगों की मौत हो चुकी है और 10,870 घायल हुए हैं।
ईरान ने अमेरिका-इजराइल समझौते पर क्या शर्त रखी थी?
आईआरजीसी ने गुरुवार को जारी एक बयान में कहा कि 8 अप्रैल के समझौते को स्वीकार करने के लिए ईरान की मुख्य शर्त लेबनान समेत सभी मोर्चों पर पूर्ण युद्धविराम थी। यही बयान राष्ट्रपति औन की प्रतिक्रिया की तात्कालिक पृष्ठभूमि बना।
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