लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन का ईरान पर कड़ा प्रहार — 'हमारे देश को अमेरिका से बातचीत में मोहरा न बनाएं'
सारांश
मुख्य बातें
लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने 6 जून 2026 को ईरान पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि तेहरान को वाशिंगटन के साथ चल रही परमाणु और सीजफायर वार्ता में लेबनान को मोलभाव के हथियार के रूप में इस्तेमाल करना बंद करना चाहिए। यह बयान ऐसे समय में आया जब इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान के कई हिस्सों पर हमले तेज कर दिए हैं और नौ गांवों को खाली करने की चेतावनी जारी की है।
राष्ट्रपति औन का सीधा संदेश
एक अमेरिकी टेलीविजन चैनल को दिए साक्षात्कार में राष्ट्रपति जोसेफ औन ने कहा, 'हमारे देश में दखल देना आपका काम नहीं है। मैं इस बयान को पूरी तरह से खारिज करता हूं, क्योंकि हमारे लोग मारे जा रहे हैं। हमारे घर तबाह किए जा रहे हैं।' यह प्रतिक्रिया ईरान के पैरामिलिट्री रिवोल्यूशनरी गार्ड के उस बयान के जवाब में थी, जिसमें कहा गया था कि जब तक इजरायल लेबनान से अपने सैनिकों को वापस नहीं बुलाता, इलाके में शांति संभव नहीं होगी।
प्रधानमंत्री सलाम की अपील
लेबनानी प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने भी एक अलग बयान में लेबनान के नागरिकों से अपील की कि वे अपने देश के हित को सर्वोपरि रखें। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि लेबनान अब किसी बाहरी ताकत के लिए युद्धभूमि नहीं बनेगा। लेबनान सरकार और इजरायल के बीच हाल ही में हुए नए सीजफायर समझौते का ईरान द्वारा विरोध किए जाने पर दोनों नेताओं ने एकजुट होकर तेहरान की आलोचना की।
ईरान की मांग और विवाद की जड़
ईरान का कहना है कि अमेरिका के साथ किसी भी पक्के समझौते में लेबनान में सीजफायर को भी शामिल किया जाना चाहिए। हालांकि, इजरायल इस शर्त से सहमत नहीं है। आलोचकों का कहना है कि ईरान वर्षों से हिज्बुल्लाह के माध्यम से लेबनान की धरती पर अपने रणनीतिक हित साधता आया है, और अब वार्ता की मेज पर भी लेबनान को एक 'प्रॉक्सी कार्ड' की तरह खेल रहा है। गौरतलब है कि इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच यह संघर्ष तीन महीने से अधिक समय से जारी है।
ज़मीनी हालात: हमले और विस्थापन
इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान के कई इलाकों पर हमले जारी रखे हैं। सरकारी समाचार एजेंसी के हवाले से बताया गया है कि इन हमलों में दक्षिणी लेबनान के छह स्थानों पर नौ लोग मारे गए। युद्ध के कारण बेघर हुए हजारों लोगों ने उन्हीं गांवों में शरण ली हुई है जिन्हें खाली करने के आदेश दिए गए हैं, जिससे मानवीय संकट और गहरा हो गया है।
आगे क्या होगा
लेबनानी नेतृत्व की यह खुली नाराज़गी मध्य-पूर्व की कूटनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है। यह पहली बार है जब बेरूत ने इतनी सीधे भाषा में तेहरान को चुनौती दी है। अब देखना होगा कि अमेरिका-ईरान वार्ता में लेबनान का मुद्दा किस दिशा में जाता है और क्या इजरायल दक्षिणी लेबनान से अपनी सेना वापस बुलाने पर सहमत होता है।