लेबनान राष्ट्रपति जोसेफ औन: युद्ध रोकना मेरा कर्तव्य, इजरायल से वार्ता जारी
सारांश
मुख्य बातें
लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने 18 मई को स्थानीय कृषि यूनियन नेताओं से बातचीत के दौरान स्पष्ट किया कि इजरायल के साथ चल रही प्रत्यक्ष वार्ता का एकमात्र उद्देश्य लेबनान में जारी इजरायली सैन्य अभियानों को समाप्त करने का मार्ग प्रशस्त करना है। राष्ट्रपति कार्यालय के अनुसार, औन ने कहा कि अपने पद और जिम्मेदारी के तहत उनका कर्तव्य है कि वे लेबनान और उसके नागरिकों के विरुद्ध इस युद्ध को रोकने के लिए हर संभव प्रयास करें, चाहे इसके लिए कितना भी कठिन कदम क्यों न उठाना पड़े।
वार्ता की रूपरेखा
राष्ट्रपति औन ने वार्ता के एजेंडे को स्पष्ट करते हुए कहा, 'लेबनान ने वार्ता के लिए जो रूपरेखा तय की है, उसमें इजरायली सेना की वापसी, युद्धविराम, सीमाओं पर लेबनानी सेना की तैनाती, विस्थापित लोगों की वापसी और लेबनान के लिए आर्थिक एवं वित्तीय सहायता शामिल है। इसके अलावा किसी अन्य मुद्दे पर चर्चा की खबरें गलत हैं।' यह बयान उन अटकलों के बीच आया है जिनमें कहा जा रहा था कि वार्ता में अन्य संवेदनशील विषयों पर भी चर्चा हो रही है।
युद्ध की भारी कीमत
औन ने अपनी बात में ऐतिहासिक संदर्भ जोड़ते हुए कहा, 'हम पहले भी युद्धों का अनुभव कर चुके हैं और देखा है कि उन्होंने लेबनान को किस स्थिति में पहुंचाया। क्या कोई है जो बाद में उसकी कीमत चुका सके?' यह टिप्पणी लेबनान के दशकों पुराने संघर्षों की पृष्ठभूमि में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, 18 मई को इजरायली हमलों में सात लोग मारे गए। मंत्रालय ने पहले 16 मई तक 2,900 लोगों के मारे जाने की पुष्टि की थी।
युद्धविराम विस्तार और हमले जारी
पिछले सप्ताह वाशिंगटन में अमेरिका और लेबनान के राजदूतों के बीच प्रत्यक्ष वार्ता का तीसरा दौर संपन्न हुआ, जिसके बाद लेबनान में लागू नाजुक युद्धविराम को अगले 45 दिनों के लिए बढ़ा दिया गया। हालांकि, युद्धविराम विस्तार के बावजूद हमले नहीं थमे हैं।
इजरायली सेना ने 18 मई को कहा कि उसने दक्षिणी लेबनान में हिज्बुल्लाह के 30 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया, जिनमें एक हथियार भंडार, निगरानी चौकियां और वे इमारतें शामिल हैं जिनका उपयोग कथित तौर पर इजरायली बलों पर हमलों की तैयारी के लिए किया जा रहा था। सेना के अनुसार, इन हमलों में हिज्बुल्लाह के कई लड़ाके भी मारे गए।
आगे की राह
वार्ता के तीन दौर पूरे होने और युद्धविराम के विस्तार के बाद भी ज़मीनी स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। राष्ट्रपति औन का यह बयान ऐसे समय में आया है जब लेबनान में मानवीय संकट गहराता जा रहा है और विस्थापितों की वापसी अभी भी अनिश्चित है। अगले 45 दिनों में वार्ता का अगला दौर और युद्धविराम की स्थायित्व की असली परीक्षा होगी।