27 जून 2026
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लेबनान-इजरायल फ्रेमवर्क समझौता: राष्ट्रपति आउन ने बताया संप्रभुता की वापसी, हिज्बुल्लाह ने किया सिरे से खारिज

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लेबनान-इजरायल फ्रेमवर्क समझौता: राष्ट्रपति आउन ने बताया संप्रभुता की वापसी, हिज्बुल्लाह ने किया सिरे से खारिज

सारांश

वॉशिंगटन में हस्ताक्षरित लेबनान-इजरायल फ्रेमवर्क समझौते पर लेबनानी राष्ट्रपति आउन ने संप्रभुता बहाली की उम्मीद जताई, लेकिन हिज्बुल्लाह और ईरान के कड़े विरोध ने इसे पहले दिन से ही विवादों में डाल दिया। ज़मीन पर इजरायली सैन्य अभियान जारी रहने से तनाव बरकरार है।

मुख्य बातें

लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन ने 27 जून 2025 को वॉशिंगटन में हुए लेबनान-इजरायल फ्रेमवर्क समझौते को संप्रभुता बहाली की शुरुआत बताया।
समझौते के तहत इजरायली सेना दक्षिणी लेबनान के दो क्षेत्रों से पायलट कार्यक्रम के अंतर्गत पीछे हटेगी — कान टीवी के अनुसार।
हिज्बुल्लाह सांसद हसन फदलल्लाह ने डील को सिरे से खारिज किया और हथियार न छोड़ने की घोषणा की।
ईरान ने कहा कि जब तक इजरायल पूरी तरह लेबनानी क्षेत्र से नहीं हटता, वह किसी समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करेगा।
प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने समझौते को कूटनीतिक उपलब्धि बताया, लेकिन कहा कि हिज्बुल्लाह के निरस्त्रीकरण तक सेना 'सुरक्षा क्षेत्र' में तैनात रहेगी।
समझौते के दिन ही इजरायली सेना ने ऐन अरब में तलाशी अभियान चलाया और 7 लोगों को हिरासत में लिया।

लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन ने 27 जून 2025 को वॉशिंगटन में हस्ताक्षरित लेबनान-इजरायल फ्रेमवर्क समझौते को देश की पूर्ण संप्रभुता की बहाली की दिशा में पहला ठोस कदम करार दिया। राष्ट्रपति कार्यालय से जारी आधिकारिक बयान में आउन ने कहा कि लेबनान सरकार इस प्रक्रिया को उसके तार्किक अंत तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है।

समझौते की मुख्य बातें

राष्ट्रपति आउन ने स्पष्ट किया कि यह समझौता विस्थापित लेबनानी नागरिकों को उनकी भूमि और घरों में वापस लाने का मार्ग खोलेगा। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि लेबनान अब किसी भी रूप में किसी भी क्षेत्र पर कब्जे को स्वीकार नहीं करेगा। वार्ता की मेजबानी के लिए उन्होंने अमेरिका का आभार जताया और उन अरब व मित्र देशों की भी सराहना की जिन्होंने पूरी प्रक्रिया में लेबनान का साथ दिया।

इजरायल के सरकारी प्रसारक कान टीवी के अनुसार, समझौते के तहत एक पायलट कार्यक्रम के अंतर्गत इजरायली सेना दक्षिणी लेबनान के दो क्षेत्रों से पीछे हटेगी। साथ ही, दक्षिणी लेबनान में हिज्बुल्लाह की सुरंगों और उसकी बढ़ती सैन्य क्षमता से निपटने के लिए भी एक साझा रूपरेखा तय की गई है।

हिज्बुल्लाह का कड़ा विरोध

हिज्बुल्लाह ने इस समझौते को सिरे से नकार दिया है। संगठन के सांसद हसन फदलल्लाह ने कहा कि हिज्बुल्लाह इस फ्रेमवर्क को लागू करने की किसी भी कोशिश का पुरज़ोर विरोध करेगा और अपने हथियार नहीं छोड़ेगा। फदलल्लाह ने यह भी कहा कि हिज्बुल्लाह के घनिष्ठ सहयोगी ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक इजरायल पूरी तरह लेबनानी क्षेत्र से नहीं हटता, तेहरान वॉशिंगटन के साथ किसी भी समझौते पर दस्तखत नहीं करेगा।

नेतन्याहू का रुख

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक वीडियो संदेश में कहा कि जब तक हिज्बुल्लाह अपने हथियार नहीं छोड़ता, इजरायली सेना दक्षिणी लेबनान में अपने नियंत्रण वाले 'सुरक्षा क्षेत्र' में तैनात रहेगी। उन्होंने इस समझौते को इजरायल की बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि बताया और दावा किया कि यह ईरान के लिए भी बड़ा झटका है, क्योंकि तेहरान इजरायल को पीछे हटने पर मजबूर करने की कोशिश में लगा था।

ज़मीन पर जारी है तनाव

समझौते के बावजूद इजरायली सेना ने 27 जून को दक्षिणी लेबनान में जमीनी और हवाई अभियान जारी रखा। लेबनान की राष्ट्रीय समाचार एजेंसी (एनएनए) के अनुसार, सीमावर्ती ऐन अरब कस्बे में इजरायली सैनिकों ने तलाशी अभियान चलाया। इससे कुछ घंटे पहले सेना तीन लेबनानी नागरिकों और चार सीरियाई कृषि श्रमिकों समेत सात लोगों को अपने नियंत्रण वाले क्षेत्र में ले गई थी। यह ऐसे समय में आया है जब दोनों पक्ष समझौते की शर्तों की अलग-अलग व्याख्या कर रहे हैं।

आगे की राह

गौरतलब है कि लेबनान और इजरायल के बीच दशकों पुराने विवाद की पृष्ठभूमि में यह फ्रेमवर्क समझौता एक नाजुक पड़ाव पर खड़ा है — एक तरफ लेबनानी सरकार इसे संप्रभुता की वापसी का प्रतीक मान रही है, तो दूसरी तरफ हिज्बुल्लाह और ईरान का कड़ा विरोध इसके क्रियान्वयन के सामने सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। समझौते की असली परीक्षा अब ज़मीन पर होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ज़मीनी हकीकत इसकी सीमाएँ उजागर करती है — समझौते के उसी दिन इजरायली सेना का दक्षिणी लेबनान में अभियान जारी रहना बताता है कि 'पायलट विदड्रॉल' कितना प्रतीकात्मक है। हिज्बुल्लाह और ईरान के एकजुट विरोध के बिना किसी भी समझौते का क्रियान्वयन लेबनानी सरकार के लिए व्यावहारिक रूप से असंभव के करीब है। राष्ट्रपति आउन की 'संप्रभुता बहाली' की भाषा घरेलू दर्शकों के लिए है — असली कसौटी यह होगी कि क्या लेबनानी सेना दक्षिण में वास्तविक नियंत्रण स्थापित कर पाती है, जो 2006 के बाद से कभी नहीं हो सका।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लेबनान-इजरायल फ्रेमवर्क समझौता क्या है?
यह 27 जून 2025 को वॉशिंगटन में हस्ताक्षरित एक कूटनीतिक रूपरेखा है, जिसका उद्देश्य लेबनान और इजरायल के बीच लंबे समय से चले आ रहे क्षेत्रीय और सुरक्षा विवादों को सुलझाना है। इसमें इजरायली सेना के दक्षिणी लेबनान के दो क्षेत्रों से पायलट वापसी और हिज्बुल्लाह की सुरंगों से निपटने की साझा रूपरेखा शामिल है।
हिज्बुल्लाह ने इस समझौते को क्यों खारिज किया?
हिज्बुल्लाह सांसद हसन फदलल्लाह के अनुसार, संगठन इस फ्रेमवर्क को लागू करने की किसी भी कोशिश का विरोध करेगा और अपने हथियार नहीं छोड़ेगा। हिज्बुल्लाह का मानना है कि जब तक इजरायल पूरी तरह लेबनानी क्षेत्र से नहीं हटता, कोई भी समझौता स्वीकार्य नहीं है।
इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू का इस समझौते पर क्या रुख है?
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे इजरायल की बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक हिज्बुल्लाह अपने हथियार नहीं छोड़ता, इजरायली सेना दक्षिणी लेबनान में 'सुरक्षा क्षेत्र' में तैनात रहेगी।
ईरान का इस डील पर क्या रुख है?
हिज्बुल्लाह सांसद फदलल्लाह के अनुसार, ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक इजरायल पूरी तरह लेबनानी क्षेत्र से नहीं हटता, तेहरान वॉशिंगटन के साथ किसी भी समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करेगा। यह रुख समझौते के क्रियान्वयन के सामने एक बड़ी बाधा है।
समझौते के बाद दक्षिणी लेबनान में स्थिति क्या है?
समझौते के दिन ही 27 जून को इजरायली सेना ने ऐन अरब कस्बे में तलाशी अभियान जारी रखा और तीन लेबनानी नागरिकों व चार सीरियाई कृषि श्रमिकों समेत 7 लोगों को अपने नियंत्रण वाले क्षेत्र में ले गई, जो जमीनी तनाव की निरंतरता को दर्शाता है।
राष्ट्र प्रेस
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