लेबनान-इजरायल फ्रेमवर्क समझौता: राष्ट्रपति आउन ने बताया संप्रभुता की वापसी, हिज्बुल्लाह ने किया सिरे से खारिज
सारांश
मुख्य बातें
लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन ने 27 जून 2025 को वॉशिंगटन में हस्ताक्षरित लेबनान-इजरायल फ्रेमवर्क समझौते को देश की पूर्ण संप्रभुता की बहाली की दिशा में पहला ठोस कदम करार दिया। राष्ट्रपति कार्यालय से जारी आधिकारिक बयान में आउन ने कहा कि लेबनान सरकार इस प्रक्रिया को उसके तार्किक अंत तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है।
समझौते की मुख्य बातें
राष्ट्रपति आउन ने स्पष्ट किया कि यह समझौता विस्थापित लेबनानी नागरिकों को उनकी भूमि और घरों में वापस लाने का मार्ग खोलेगा। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि लेबनान अब किसी भी रूप में किसी भी क्षेत्र पर कब्जे को स्वीकार नहीं करेगा। वार्ता की मेजबानी के लिए उन्होंने अमेरिका का आभार जताया और उन अरब व मित्र देशों की भी सराहना की जिन्होंने पूरी प्रक्रिया में लेबनान का साथ दिया।
इजरायल के सरकारी प्रसारक कान टीवी के अनुसार, समझौते के तहत एक पायलट कार्यक्रम के अंतर्गत इजरायली सेना दक्षिणी लेबनान के दो क्षेत्रों से पीछे हटेगी। साथ ही, दक्षिणी लेबनान में हिज्बुल्लाह की सुरंगों और उसकी बढ़ती सैन्य क्षमता से निपटने के लिए भी एक साझा रूपरेखा तय की गई है।
हिज्बुल्लाह का कड़ा विरोध
हिज्बुल्लाह ने इस समझौते को सिरे से नकार दिया है। संगठन के सांसद हसन फदलल्लाह ने कहा कि हिज्बुल्लाह इस फ्रेमवर्क को लागू करने की किसी भी कोशिश का पुरज़ोर विरोध करेगा और अपने हथियार नहीं छोड़ेगा। फदलल्लाह ने यह भी कहा कि हिज्बुल्लाह के घनिष्ठ सहयोगी ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक इजरायल पूरी तरह लेबनानी क्षेत्र से नहीं हटता, तेहरान वॉशिंगटन के साथ किसी भी समझौते पर दस्तखत नहीं करेगा।
नेतन्याहू का रुख
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक वीडियो संदेश में कहा कि जब तक हिज्बुल्लाह अपने हथियार नहीं छोड़ता, इजरायली सेना दक्षिणी लेबनान में अपने नियंत्रण वाले 'सुरक्षा क्षेत्र' में तैनात रहेगी। उन्होंने इस समझौते को इजरायल की बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि बताया और दावा किया कि यह ईरान के लिए भी बड़ा झटका है, क्योंकि तेहरान इजरायल को पीछे हटने पर मजबूर करने की कोशिश में लगा था।
ज़मीन पर जारी है तनाव
समझौते के बावजूद इजरायली सेना ने 27 जून को दक्षिणी लेबनान में जमीनी और हवाई अभियान जारी रखा। लेबनान की राष्ट्रीय समाचार एजेंसी (एनएनए) के अनुसार, सीमावर्ती ऐन अरब कस्बे में इजरायली सैनिकों ने तलाशी अभियान चलाया। इससे कुछ घंटे पहले सेना तीन लेबनानी नागरिकों और चार सीरियाई कृषि श्रमिकों समेत सात लोगों को अपने नियंत्रण वाले क्षेत्र में ले गई थी। यह ऐसे समय में आया है जब दोनों पक्ष समझौते की शर्तों की अलग-अलग व्याख्या कर रहे हैं।
आगे की राह
गौरतलब है कि लेबनान और इजरायल के बीच दशकों पुराने विवाद की पृष्ठभूमि में यह फ्रेमवर्क समझौता एक नाजुक पड़ाव पर खड़ा है — एक तरफ लेबनानी सरकार इसे संप्रभुता की वापसी का प्रतीक मान रही है, तो दूसरी तरफ हिज्बुल्लाह और ईरान का कड़ा विरोध इसके क्रियान्वयन के सामने सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। समझौते की असली परीक्षा अब ज़मीन पर होगी।