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नोएडा: डीएससी मार्ग बनेगा 'मॉडल रोड', ₹1,496 लाख की योजना से जाम से मिलेगी राहत

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नोएडा: डीएससी मार्ग बनेगा 'मॉडल रोड', ₹1,496 लाख की योजना से जाम से मिलेगी राहत

सारांश

नोएडा के व्यस्ततम डीएससी मार्ग को 'मॉडल रोड' बनाने की योजना तैयार हो गई है। ₹2,553 लाख से अधिक की दो परियोजनाएं सैद्धांतिक स्वीकृति के लिए भेजी गई हैं। मंजूरी के बाद छह माह में काम पूरा करने का लक्ष्य है, जिससे हजारों दैनिक यात्रियों को पीक आवर्स के जाम से राहत मिलने की उम्मीद है।

मुख्य बातें

डीएससी मार्ग और सेक्टर-79 टी-पॉइंट से डीएससी मार्ग तक के स्ट्रेच को 'मॉडल रोड' बनाने की योजना तैयार की गई है।
सिंचाई नाले से कुलेसरा पुल तक के खंड की अनुमानित लागत ₹1,496.56 लाख है।
सेक्टर-79 टी-पॉइंट से डीएससी मार्ग तक के स्ट्रेच के लिए ₹1,057.14 लाख की लागत प्रस्तावित।
दोनों प्रस्ताव कंसलटेंट द्वारा तैयार कर सैद्धांतिक स्वीकृति के लिए सक्षम स्तर पर भेजे गए हैं।
स्वीकृति के बाद छह माह में कार्य पूरा कराने का लक्ष्य; एनएसईजेड, सेक्टर-80, 81 और हॉजरी कॉम्प्लेक्स के हजारों यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद।

नोएडा के प्रमुख संपर्क मार्ग डीएससी मार्ग को 'मॉडल रोड' के रूप में विकसित करने की योजना तैयार कर ली गई है। इसके साथ ही सेक्टर-79 टी-पॉइंट से डीएससी मार्ग तक के स्ट्रेच को भी मॉडल रोड बनाने का प्रस्ताव है। अधिकारियों के अनुसार, दोनों परियोजनाओं के प्रस्ताव कंसलटेंट द्वारा तैयार कर सैद्धांतिक स्वीकृति के लिए सक्षम स्तर पर भेज दिए गए हैं।

क्यों ज़रूरी है यह परियोजना

डीएससी मार्ग नोएडा के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण संपर्क मार्गों में से एक है। यह मार्ग एनएसईजेड, फेस-2, सेक्टर-80, सेक्टर-81 और हॉजरी कॉम्प्लेक्स जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों को जोड़ता है। प्रतिदिन हजारों कर्मचारी, स्थानीय नागरिक और भारी-हल्के वाहन इसी मार्ग से गुजरते हैं।

विशेष रूप से सिंचाई नाले से कुलेसरा पुल तक का हिस्सा सबसे अधिक व्यस्त रहता है। निरीक्षण में सामने आया कि एलिवेटेड रोड से आने वाले भारी यातायात का दबाव इस खंड पर अत्यधिक रहता है, जिससे पीक आवर्स में कई स्थानों पर जाम की स्थिति बन जाती है।

प्रस्तावित लागत और दायरा

प्रस्तावित योजना के तहत सिंचाई नाले से कुलेसरा पुल तक के खंड के विकास पर करीब ₹1,496.56 लाख की लागत आने का अनुमान है। वहीं, सेक्टर-79 टी-पॉइंट से डीएससी मार्ग तक के स्ट्रेच को मॉडल रोड बनाने के लिए करीब ₹1,057.14 लाख की लागत प्रस्तावित की गई है। दोनों परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत ₹2,553.70 लाख से अधिक है।

मॉडल रोड से क्या बदलेगा

मॉडल रोड के रूप में विकसित होने पर इन मार्गों को आधुनिक और व्यवस्थित स्वरूप मिलने की उम्मीद है। परियोजना का उद्देश्य केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है — यातायात सुगमता, नागरिक सुविधा और शहर की सौंदर्यता को एक साथ बेहतर करना इसका लक्ष्य है। गौरतलब है कि यह पहल नोएडा के प्रवेश मार्गों और प्रमुख संपर्क सड़कों की तस्वीर बदलने की व्यापक कोशिश का हिस्सा है।

आगे की प्रक्रिया

अधिकारियों के अनुसार, सैद्धांतिक स्वीकृति प्राप्त होते ही परियोजना पर आगे की कार्रवाई शुरू की जाएगी। कार्य को मंजूरी मिलने के बाद अगले छह माह के भीतर इसे पूरा कराने का लक्ष्य रखा गया है। इन दोनों मार्गों के विकसित होने के बाद औद्योगिक क्षेत्रों में आने-जाने वाले हजारों लोगों को पीक आवर्स की जाम-समस्या से राहत मिलने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि नोएडा में अनेक बुनियादी ढांचा परियोजनाएं स्वीकृति के बाद भी लंबे समय तक अटकी रही हैं। डीएससी मार्ग पर एलिवेटेड रोड के यातायात का दबाव एक संरचनात्मक समस्या है जिसे सड़क सौंदर्यीकरण से नहीं, बल्कि ट्रैफिक इंजीनियरिंग से सुलझाना होगा। परियोजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि मॉडल रोड का खाका केवल सौंदर्य तक सीमित है या यातायात प्रवाह के वैज्ञानिक प्रबंधन तक भी जाता है।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नोएडा में डीएससी मार्ग को 'मॉडल रोड' क्यों बनाया जा रहा है?
डीएससी मार्ग नोएडा के सबसे व्यस्त संपर्क मार्गों में से एक है, जो एनएसईजेड, सेक्टर-80, सेक्टर-81 और हॉजरी कॉम्प्लेक्स जैसे औद्योगिक क्षेत्रों को जोड़ता है। एलिवेटेड रोड के भारी यातायात के दबाव के कारण पीक आवर्स में जाम की गंभीर समस्या रहती है, जिसे दूर करने के लिए यह परियोजना तैयार की गई है।
डीएससी मार्ग मॉडल रोड परियोजना की कुल लागत कितनी है?
सिंचाई नाले से कुलेसरा पुल तक के खंड के लिए ₹1,496.56 लाख और सेक्टर-79 टी-पॉइंट से डीएससी मार्ग तक के स्ट्रेच के लिए ₹1,057.14 लाख की लागत प्रस्तावित है। दोनों परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत ₹2,553.70 लाख से अधिक है।
यह परियोजना कब तक पूरी होगी?
अधिकारियों के अनुसार, सैद्धांतिक स्वीकृति मिलने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू होगी और कार्य को मंजूरी मिलते ही छह माह के भीतर पूरा कराने का लक्ष्य रखा गया है। अभी दोनों प्रस्ताव सक्षम स्तर पर स्वीकृति की प्रतीक्षा में हैं।
मॉडल रोड बनने से किन लोगों को फायदा होगा?
इन मार्गों के विकसित होने से एनएसईजेड, सेक्टर-80, सेक्टर-81, फेस-2 और हॉजरी कॉम्प्लेक्स में काम करने वाले हजारों कर्मचारियों, औद्योगिक इकाइयों के प्रतिनिधियों और दैनिक यात्रियों को पीक आवर्स के जाम से राहत मिलने की उम्मीद है।
मॉडल रोड परियोजना में क्या-क्या शामिल होगा?
परियोजना का उद्देश्य केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है — यातायात सुगमता, नागरिक सुविधा और शहर की सौंदर्यता को एक साथ बेहतर करना इसका लक्ष्य है। सड़क को आधुनिक और व्यवस्थित स्वरूप देने के साथ यातायात संचालन में सुधार भी प्रस्तावित है।
राष्ट्र प्रेस
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