नोएडा एलिवेटेड रोड: IIT रुड़की कर रही सॉइल टेस्टिंग, ₹150 करोड़ की परियोजना का DPR एक सप्ताह में
सारांश
मुख्य बातें
नोएडा में यातायात की समस्या को हल करने के लिए प्रस्तावित एलिवेटेड रोड परियोजना तेज़ी से आगे बढ़ रही है। महामाया फ्लाईओवर के निकट से सेक्टर-94 तक बनने वाले इस 1.5 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड रोड के लिए फिलहाल सॉइल टेस्टिंग और टोपोग्राफी सर्वे का कार्य जारी है। ₹150 करोड़ की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने की ज़िम्मेदारी आईआईटी रुड़की को सौंपी गई है।
मुख्य घटनाक्रम
नोएडा प्राधिकरण के महाप्रबंधक एसपी सिंह के अनुसार, सॉइल टेस्टिंग के ज़रिए ज़मीन की बियरिंग कैपेसिटी यानी वहन क्षमता का आकलन किया जा रहा है। यह जानकारी एलिवेटेड रोड के डिज़ाइन और संरचना को अंतिम रूप देने में निर्णायक भूमिका निभाएगी। उन्होंने बताया कि आईआईटी रुड़की एक सप्ताह के भीतर DPR प्राधिकरण को सौंप देगा।
टोपोग्राफी सर्वे के तहत संबंधित इलाके का विस्तृत भौगोलिक अध्ययन किया जा रहा है, जिसमें ज़मीन की ऊँचाई, ढलान, समोच्च रेखाएँ, पेड़-पौधे, जल स्रोत और आसपास की मौजूदा संरचनाओं — जैसे इमारतों व सड़कों — का सटीक मानचित्र तैयार किया जा रहा है। यह सर्वे भविष्य की योजना को व्यावहारिक और सटीक बनाने में सहायक होगा।
परियोजना की संरचना और कनेक्टिविटी
यह एलिवेटेड रोड एक लिंक एलिवेटेड के रूप में कार्य करेगा, जो महामाया फ्लाईओवर के निकट स्थित चिल्ला एलिवेटेड को सेक्टर-94 क्षेत्र से सीधे जोड़ेगा। वाहनों के निर्बाध आवागमन के लिए एक क्लोवर लीफ इंटरचेंज भी प्रस्तावित है, जिससे ट्रैफिक बिना रुकावट के आगे बढ़ सकेगा।
इसके अतिरिक्त, सेक्टर-94 की ओर प्रस्तावित पुश्ता एलिवेटेड से भी इस रोड को जोड़ने की योजना है। हालाँकि, इसके लिए सिंचाई विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त करना अनिवार्य होगा। यदि NOC मिल जाती है, तो एलिवेटेड रोड को पुश्ता रोड पर भी उतारा जा सकेगा, जिससे यात्री आगे के मार्गों से आसानी से जुड़ सकेंगे।
आम जनता पर असर
गौरतलब है कि नोएडा में वाहनों की बढ़ती संख्या के कारण महामाया फ्लाईओवर और उससे जुड़े मार्गों पर यातायात का दबाव लगातार बढ़ रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर भी पीक आवर्स में जाम की स्थिति आम हो गई है। इस परियोजना के पूरा होने के बाद नोएडा और आसपास के क्षेत्रों में यातायात का दबाव उल्लेखनीय रूप से कम होने की उम्मीद है।
क्या होगा आगे
DPR मिलने के बाद नोएडा प्राधिकरण निर्माण एजेंसी के चयन की प्रक्रिया शुरू करेगा। सिंचाई विभाग से NOC की स्थिति परियोजना के अंतिम स्वरूप को निर्धारित करेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, IIT रुड़की जैसी प्रतिष्ठित संस्था द्वारा DPR तैयार किए जाने से परियोजना की तकनीकी विश्वसनीयता सुनिश्चित होगी और भविष्य में संरचनात्मक जोखिम कम रहेगा।