पर्थला चौक पर बनेगा 6 लेन अंडरपास, ₹80 करोड़ की परियोजना से नोएडा के FNG कॉरिडोर पर जाम होगा खत्म
सारांश
मुख्य बातें
नोएडा प्राधिकरण ने पर्थला चौक पर 6 लेन अंडरपास निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया है, जिसकी अनुमानित लागत ₹80 करोड़ और निर्माण अवधि 18 महीने निर्धारित की गई है। फरीदाबाद-नोएडा-गाजियाबाद (FNG) कॉरिडोर पर प्रस्तावित यह अंडरपास नोएडा के सबसे व्यस्त चौराहों में से एक पर यातायात के बढ़ते दबाव से स्थायी राहत दिलाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
परियोजना का ढाँचा और तकनीकी विवरण
प्रस्तावित अंडरपास की कुल लंबाई 710 मीटर होगी। इसमें दोनों दिशाओं में तीन-तीन लेन उपलब्ध रहेंगी। प्रत्येक दिशा में 110 मीटर लंबा आरसीसी बॉक्स बनाया जाएगा, साथ ही 20 मीटर का खुला आकाश वाला हिस्सा और दोनों ओर 280-280 मीटर लंबे पहुँच मार्ग भी प्रस्तावित हैं।
निर्माण में डायफ्राम वॉल तकनीक और मौके पर आरसीसी निर्माण का उपयोग किया जाएगा। यह तकनीक खुदाई के दौरान आसपास की जमीन और मौजूदा अवस्थापना की स्थिरता बनाए रखने में कारगर मानी जाती है, जिससे निर्माण कार्य के दौरान आसपास की सड़कों पर न्यूनतम व्यवधान पड़ेगा।
जल निकासी और सुरक्षा प्रबंध
बारिश के मौसम में अंडरपास में जलभराव की समस्या से बचने के लिए दो सम्प और पर्याप्त पंपिंग व्यवस्था का प्रावधान किया गया है। यह व्यवस्था बारिश और रिसाव के पानी को तेज़ी से बाहर निकालने में सहायक होगी — एक ऐसी चुनौती जो दिल्ली-NCR के कई पुराने अंडरपास में बार-बार सामने आती रही है।
FNG कॉरिडोर और कनेक्टिविटी का महत्व
पर्थला चौक, FNG कॉरिडोर और विकास मार्ग के महत्वपूर्ण जंक्शन पर स्थित है। इस कॉरिडोर के ज़रिए गाजियाबाद, NH-9, मेरठ एक्सप्रेसवे, नोएडा, ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे और भविष्य में फरीदाबाद के बीच कनेक्टिविटी और मज़बूत होने की उम्मीद है। खासकर सुबह और शाम के पीक आवर्स में इस चौक पर यातायात का दबाव काफी बढ़ जाता है।
गौरतलब है कि नोएडा वेस्ट और आसपास के क्षेत्रों में तेज़ी से हो रहे आवासीय व व्यावसायिक विकास के कारण आने वाले वर्षों में वाहनों की संख्या और बढ़ने का अनुमान है। ऐसे में यह अंडरपास केवल मौजूदा जाम का समाधान नहीं, बल्कि दीर्घकालिक यातायात नियोजन का हिस्सा है।
आम जनता पर असर
परियोजना पूरी होने के बाद सेक्टर-66, सेक्टर-71, सेक्टर-121, सेक्टर-122, किसान चौक, छिजारसी और आसपास के इलाकों के निवासियों को बेहतर कनेक्टिविटी का सीधा लाभ मिलेगा। नोएडा प्राधिकरण के अनुसार, परियोजना पूरी होने पर यातायात का निर्बाध संचालन, जाम में कमी, यात्रा समय में बचत और सड़क सुरक्षा में सुधार जैसे लाभ मिलने की उम्मीद है।
यह परियोजना राज्य सरकार की आधुनिक और सुरक्षित यातायात व्यवस्था विकसित करने की प्राथमिकताओं के अनुरूप आगे बढ़ाई जा रही है। अब सभी की नज़रें इस पर होंगी कि ₹80 करोड़ की यह परियोजना तय 18 महीने की समयसीमा में पूरी होती है या नहीं।