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पर्थला चौक पर बनेगा 6 लेन अंडरपास, ₹80 करोड़ की परियोजना से नोएडा के FNG कॉरिडोर पर जाम होगा खत्म

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पर्थला चौक पर बनेगा 6 लेन अंडरपास, ₹80 करोड़ की परियोजना से नोएडा के FNG कॉरिडोर पर जाम होगा खत्म

सारांश

नोएडा के सबसे व्यस्त पर्थला चौक पर ₹80 करोड़ की लागत से 6 लेन, 710 मीटर लंबा अंडरपास बनाने का प्रस्ताव है। FNG कॉरिडोर पर यह परियोजना 18 महीने में पूरी होनी है और सेक्टर-66 से लेकर छिजारसी तक के लाखों निवासियों को राहत देगी।

मुख्य बातें

नोएडा प्राधिकरण ने पर्थला चौक पर 6 लेन अंडरपास का प्रस्ताव तैयार किया है।
परियोजना की अनुमानित लागत ₹80 करोड़ और निर्माण अवधि 18 महीने निर्धारित।
अंडरपास की कुल लंबाई 710 मीटर ; दोनों दिशाओं में तीन-तीन लेन उपलब्ध रहेंगी।
निर्माण में डायफ्राम वॉल तकनीक का उपयोग; जलभराव रोकने के लिए दो सम्प और पंपिंग व्यवस्था।
सेक्टर-66, 71, 121, 122, किसान चौक और छिजारसी के निवासियों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी।
FNG कॉरिडोर के ज़रिए गाजियाबाद, मेरठ एक्सप्रेसवे और फरीदाबाद से कनेक्टिविटी मज़बूत होगी।

नोएडा प्राधिकरण ने पर्थला चौक पर 6 लेन अंडरपास निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया है, जिसकी अनुमानित लागत ₹80 करोड़ और निर्माण अवधि 18 महीने निर्धारित की गई है। फरीदाबाद-नोएडा-गाजियाबाद (FNG) कॉरिडोर पर प्रस्तावित यह अंडरपास नोएडा के सबसे व्यस्त चौराहों में से एक पर यातायात के बढ़ते दबाव से स्थायी राहत दिलाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

परियोजना का ढाँचा और तकनीकी विवरण

प्रस्तावित अंडरपास की कुल लंबाई 710 मीटर होगी। इसमें दोनों दिशाओं में तीन-तीन लेन उपलब्ध रहेंगी। प्रत्येक दिशा में 110 मीटर लंबा आरसीसी बॉक्स बनाया जाएगा, साथ ही 20 मीटर का खुला आकाश वाला हिस्सा और दोनों ओर 280-280 मीटर लंबे पहुँच मार्ग भी प्रस्तावित हैं।

निर्माण में डायफ्राम वॉल तकनीक और मौके पर आरसीसी निर्माण का उपयोग किया जाएगा। यह तकनीक खुदाई के दौरान आसपास की जमीन और मौजूदा अवस्थापना की स्थिरता बनाए रखने में कारगर मानी जाती है, जिससे निर्माण कार्य के दौरान आसपास की सड़कों पर न्यूनतम व्यवधान पड़ेगा।

जल निकासी और सुरक्षा प्रबंध

बारिश के मौसम में अंडरपास में जलभराव की समस्या से बचने के लिए दो सम्प और पर्याप्त पंपिंग व्यवस्था का प्रावधान किया गया है। यह व्यवस्था बारिश और रिसाव के पानी को तेज़ी से बाहर निकालने में सहायक होगी — एक ऐसी चुनौती जो दिल्ली-NCR के कई पुराने अंडरपास में बार-बार सामने आती रही है।

FNG कॉरिडोर और कनेक्टिविटी का महत्व

पर्थला चौक, FNG कॉरिडोर और विकास मार्ग के महत्वपूर्ण जंक्शन पर स्थित है। इस कॉरिडोर के ज़रिए गाजियाबाद, NH-9, मेरठ एक्सप्रेसवे, नोएडा, ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे और भविष्य में फरीदाबाद के बीच कनेक्टिविटी और मज़बूत होने की उम्मीद है। खासकर सुबह और शाम के पीक आवर्स में इस चौक पर यातायात का दबाव काफी बढ़ जाता है।

गौरतलब है कि नोएडा वेस्ट और आसपास के क्षेत्रों में तेज़ी से हो रहे आवासीय व व्यावसायिक विकास के कारण आने वाले वर्षों में वाहनों की संख्या और बढ़ने का अनुमान है। ऐसे में यह अंडरपास केवल मौजूदा जाम का समाधान नहीं, बल्कि दीर्घकालिक यातायात नियोजन का हिस्सा है।

आम जनता पर असर

परियोजना पूरी होने के बाद सेक्टर-66, सेक्टर-71, सेक्टर-121, सेक्टर-122, किसान चौक, छिजारसी और आसपास के इलाकों के निवासियों को बेहतर कनेक्टिविटी का सीधा लाभ मिलेगा। नोएडा प्राधिकरण के अनुसार, परियोजना पूरी होने पर यातायात का निर्बाध संचालन, जाम में कमी, यात्रा समय में बचत और सड़क सुरक्षा में सुधार जैसे लाभ मिलने की उम्मीद है।

यह परियोजना राज्य सरकार की आधुनिक और सुरक्षित यातायात व्यवस्था विकसित करने की प्राथमिकताओं के अनुरूप आगे बढ़ाई जा रही है। अब सभी की नज़रें इस पर होंगी कि ₹80 करोड़ की यह परियोजना तय 18 महीने की समयसीमा में पूरी होती है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन नोएडा में बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं के इतिहास को देखते हुए समयसीमा पर सवाल उठना स्वाभाविक है — NCR में कई ऐसी परियोजनाएँ तय अवधि से दोगुने समय में पूरी हुई हैं। ₹80 करोड़ की लागत और 18 महीने की समयसीमा तभी सार्थक होगी जब निर्माण के दौरान आसपास की सड़कों पर यातायात प्रबंधन की ठोस योजना सार्वजनिक की जाए। नोएडा वेस्ट में बढ़ती आबादी और FNG कॉरिडोर पर भार को देखते हुए यह अंडरपास ज़रूरी तो है, पर पर्याप्त नहीं — पूरे कॉरिडोर पर एकीकृत यातायात नियोजन की दरकार है।
RashtraPress
24 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पर्थला चौक अंडरपास क्या है और यह कहाँ बनेगा?
पर्थला चौक अंडरपास नोएडा में FNG कॉरिडोर और विकास मार्ग के जंक्शन पर प्रस्तावित 6 लेन की सुरंग है, जिसकी कुल लंबाई 710 मीटर होगी। यह नोएडा प्राधिकरण की ₹80 करोड़ की परियोजना है जिसे 18 महीने में पूरा करने का लक्ष्य है।
पर्थला चौक अंडरपास से किन इलाकों को फायदा होगा?
सेक्टर-66, सेक्टर-71, सेक्टर-121, सेक्टर-122, किसान चौक, छिजारसी और नोएडा वेस्ट के आसपास के इलाकों के निवासियों को सीधा लाभ मिलेगा। FNG कॉरिडोर के ज़रिए गाजियाबाद, मेरठ एक्सप्रेसवे और फरीदाबाद से आने-जाने वाले वाहन चालकों का यात्रा समय भी कम होगा।
अंडरपास की तकनीकी विशेषताएँ क्या हैं?
अंडरपास में डायफ्राम वॉल तकनीक और मौके पर आरसीसी निर्माण का उपयोग होगा। प्रत्येक दिशा में 110 मीटर का आरसीसी बॉक्स, 20 मीटर का खुला हिस्सा और 280-280 मीटर के पहुँच मार्ग होंगे। जलभराव से बचाव के लिए दो सम्प और पंपिंग व्यवस्था भी शामिल है।
पर्थला चौक पर जाम की समस्या इतनी गंभीर क्यों है?
पर्थला चौक FNG कॉरिडोर और विकास मार्ग का प्रमुख जंक्शन है, जहाँ गाजियाबाद, नोएडा और ग्रेटर नोएडा की ओर से भारी वाहन आवाजाही होती है। नोएडा वेस्ट में तेज़ी से बढ़ते आवासीय और व्यावसायिक विकास के कारण पीक आवर्स में यह चौक पूरी तरह जाम हो जाता है।
यह अंडरपास कब तक बनकर तैयार होगा?
नोएडा प्राधिकरण के अनुसार परियोजना की निर्माण अवधि 18 महीने निर्धारित की गई है। हालाँकि परियोजना अभी प्रस्ताव चरण में है और निर्माण कार्य की आधिकारिक शुरुआत की तारीख की घोषणा अभी नहीं हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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