3 जुलाई 2026 पंचांग: शुक्रवार को माता लक्ष्मी पूजा, सर्वार्थ सिद्धि योग और शुभ-अशुभ मुहूर्त
सारांश
मुख्य बातें
3 जुलाई 2026, शुक्रवार को आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि रहेगी, जो माता लक्ष्मी और संतोषी माता की उपासना के लिए विशेष रूप से शुभ मानी जाती है। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का दुर्लभ संयोग भी बन रहा है, जो शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है।
तिथि, नक्षत्र और योग
तृतीया तिथि इस दिन सुबह 11:20 बजे तक रहेगी, जिसके पश्चात चतुर्थी तिथि आरंभ हो जाएगी। नक्षत्र की दृष्टि से श्रवण नक्षत्र सुबह 11:46 बजे तक प्रभावी रहेगा और उसके बाद धनिष्ठा नक्षत्र का प्रभाव शुरू होगा। योग में विष्कुम्भ योग शाम 4:59 बजे तक रहेगा, तत्पश्चात प्रीति योग का आरंभ होगा। करण के अनुसार विष्टि करण सुबह 11:20 बजे तक, फिर बव और उसके बाद बालव करण का प्रभाव रहेगा।
सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्र स्थिति
सूर्योदय सुबह 5:49 बजे और सूर्यास्त शाम 7:12 बजे होगा। चंद्रोदय रात 9:47 बजे और चंद्रास्त अगले दिन सुबह 9:20 बजे होगा। चंद्रमा इस दिन मकर राशि में स्थित रहेगा और रात 12:48 बजे के बाद कुंभ राशि में प्रवेश करेगा। सूर्य इस दिन मिथुन राशि में विराजमान रहेगा।
शुभ मुहूर्त
धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यों के लिए इस दिन कई महत्वपूर्ण शुभ मुहूर्त हैं। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:13 बजे से 5:01 बजे तक रहेगा — यह ध्यान, जप और पूजा-पाठ के लिए सर्वोत्तम समय माना जाता है। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:04 बजे से 12:57 बजे तक रहेगा, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है। विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 5:49 बजे से 11:46 बजे तक रहेगा — श्रवण नक्षत्र और शुक्रवार के संयोग से यह नए कार्यों, खरीदारी और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए विशेष रूप से अनुकूल रहेगा।
अशुभ काल — इन समयों में सावधानी बरतें
इस दिन राहुकाल सुबह 10:50 बजे से 12:31 बजे तक रहेगा, जिसे अशुभ माना जाता है। इसके अतिरिक्त यमगण्ड, कुलिक, दुर्मुहूर्त और वर्ज्यम् काल भी अशुभ माने जाते हैं। पंचांग के अनुसार इन अवधियों में कोई भी नया या महत्वपूर्ण कार्य आरंभ करने से बचने की सलाह दी जाती है।
धार्मिक महत्व
शुक्रवार का दिन परंपरागत रूप से माता लक्ष्मी और संतोषी माता को समर्पित माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर सुख, समृद्धि और मनोकामना पूर्ति का विशेष फल प्राप्त होता है। सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ शुक्रवार का यह संयोग इस दिन को और भी अधिक फलदायी बनाता है। आने वाले दिनों में आषाढ़ माह के अन्य महत्वपूर्ण व्रत और पर्व भी निकट हैं, जिनकी तैयारी के लिए यह पंचांग मार्गदर्शक है।