17 जून 2026 पंचांग: तृतीया तिथि से होगा दिन का आगाज़, रात 9:38 बजे चतुर्थी का प्रवेश
सारांश
मुख्य बातें
ज्योतिषीय और धार्मिक दृष्टि से 17 जून 2026, बुधवार का दिन विशेष महत्व रखता है। ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष में आने वाले इस दिन तिथि, नक्षत्र और चंद्रमा की स्थिति में क्रमिक बदलाव होंगे। दिन की शुरुआत तृतीया तिथि के साथ होगी, जो रात 9 बजकर 38 मिनट तक रहेगी, इसके बाद चतुर्थी तिथि का आगमन होगा।
तिथि और उसका महत्व
पंचांग के अनुसार, शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को पूजा-पाठ, दान-पुण्य और सामान्य शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है। रात 9:38 बजे के बाद चतुर्थी तिथि आरंभ होते ही दिन का ज्योतिषीय प्रभाव बदल जाएगा। ज्योतिष शास्त्र में चतुर्थी के दौरान नए कार्य और मांगलिक आयोजन शुरू करने से परहेज़ की सलाह दी जाती है।
नक्षत्र की स्थिति
नक्षत्र की दृष्टि से इस दिन दोपहर 1 बजकर 36 मिनट तक पुनर्वसु नक्षत्र रहेगा, जिसके बाद पुष्य नक्षत्र का आरंभ होगा। पुष्य नक्षत्र को ज्योतिष में अत्यंत शुभ माना जाता है और इसे समृद्धि, उन्नति तथा नए कार्यों की शुरुआत के लिए अनुकूल बताया जाता है।
चंद्रमा का राशि परिवर्तन
ग्रहों की चाल के अनुसार, चंद्रमा इस दिन राशि परिवर्तन करेगा। सुबह 8 बजकर 13 मिनट तक चंद्रमा मिथुन राशि में रहेगा, इसके बाद वह कर्क राशि में प्रवेश कर जाएगा। मान्यता है कि चंद्रमा के इस गोचर का प्रभाव मानसिक स्थिति, भावनाओं और दैनिक कार्यों पर पड़ता है।
योग की स्थिति
रात 8 बजकर 50 मिनट तक ध्रुव योग रहेगा, जो स्थिरता और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। इसके बाद व्याघात योग शुरू होगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार व्याघात योग में महत्वपूर्ण निर्णय लेने से बचना उचित रहता है।
शुभ और अशुभ समय
राहुकाल इस दिन दोपहर 12:27 बजे से 2:08 बजे तक रहेगा — इस अवधि में नए और मांगलिक कार्य आरंभ करने से परहेज़ किया जाता है। यमगण्ड सुबह 7:25 से 9:06 बजे तक और कुलिक काल सुबह 10:47 से दोपहर 12:27 बजे तक रहेगा। दुर्मुहूर्त दोपहर 12:00 से 12:54 बजे तक रहेगा।
शुभ समय की बात करें तो अमृत काल दो चरणों में रहेगा — सुबह 5:40 से 7:08 बजे तक और सुबह 11:28 से दोपहर 12:53 बजे तक। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:09 से 4:57 बजे तक रहेगा, जिसे पूजा-पाठ और ध्यान के लिए सर्वश्रेष्ठ समय माना जाता है।
इस दिन सूर्योदय सुबह 5:45 बजे और सूर्यास्त शाम 7:10 बजे होगा। चंद्रोदय सुबह 7:47 बजे और चंद्रास्त रात 9:44 बजे होगा। पुष्य नक्षत्र के प्रभाव में दिन का दूसरा पहर विशेष रूप से शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त रहेगा।