12 अगस्त 2026 पंचांग: हरियाली अमावस्या पर शिव पूजा और पितृ तर्पण, साल का आखिरी पूर्ण सूर्य ग्रहण रात 9 बजे
सारांश
मुख्य बातें
हिंदू पंचांग के अनुसार 12 अगस्त 2026 (बुधवार) को श्रावण माह की कृष्ण पक्ष अमावस्या — जिसे हरियाली अमावस्या भी कहा जाता है — रात 11:06 बजे तक रहेगी, इसके पश्चात प्रतिपदा तिथि प्रारंभ होगी। इस पवित्र तिथि पर भगवान शिव की आराधना, पितरों को तर्पण, दान-पुण्य और नदियों में स्नान का विशेष महत्व बताया गया है। इसी रात भारतीय समयानुसार 9:04 बजे वर्ष का दूसरा और अंतिम पूर्ण सूर्य ग्रहण भी आरंभ होगा।
सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्र स्थिति
पंचांग के अनुसार इस दिन सूर्योदय सुबह 6:05 बजे और सूर्यास्त शाम 6:58 बजे होगा। चंद्रोदय सुबह 5:19 बजे और चंद्रास्त शाम 6:52 बजे रहेगा। सूर्य कर्क राशि में स्थित रहेगा, जबकि चंद्रमा भी इसी राशि में विराजमान रहेगा।
नक्षत्र की दृष्टि से सूर्य अश्लेषा नक्षत्र में रहेगा। चंद्रमा सुबह 7:59 बजे तक पुष्य नक्षत्र में रहेगा, इसके बाद अश्लेषा नक्षत्र में प्रवेश करेगा।
शुभ मुहूर्त और योग
बुधवार को दोपहर 3:24 बजे तक व्यतिपात योग रहेगा, जिसके पश्चात वरीयान् योग लागू होगा। दिन का सर्वाधिक शुभ समय अभिजित मुहूर्त दोपहर 11:59 बजे से 12:52 बजे तक रहेगा। इसके अतिरिक्त अमृत काल तड़के 4:36 बजे से सुबह 6:05 बजे तक रहेगा — यह समय पूजा-पाठ और साधना के लिए अत्यंत अनुकूल माना जाता है।
अशुभ काल — किन समयों में बचें नए कार्य
पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, राहुकाल दोपहर 12:31 बजे से 2:08 बजे तक रहेगा। गुलिक काल सुबह 10:55 बजे से दोपहर 12:31 बजे और यमगंड काल सुबह 7:42 बजे से 9:18 बजे तक रहेगा। इन तीनों कालखंडों में कोई नया कार्य, यात्रा या महत्वपूर्ण निर्णय लेने से बचने की सलाह दी जाती है।
दिशाशूल की बात करें तो इस दिन उत्तर दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिष परंपरा के अनुसार यदि उत्तर दिशा में यात्रा अनिवार्य हो, तो विशेष ज्योतिषीय उपाय अपनाकर प्रस्थान किया जा सकता है।
साल का आखिरी पूर्ण सूर्य ग्रहण
भारतीय समयानुसार 12 अगस्त 2026 की रात 9:04 बजे वर्ष का दूसरा और अंतिम पूर्ण सूर्य ग्रहण आरंभ होगा। ग्रहण का चरम (पीक) रात 11:16 बजे रहेगा और यह 13 अगस्त की देर रात 1:28 बजे समाप्त होगा।
यह ग्रहण भारत में दृश्य नहीं होगा, इसलिए यहाँ सूतक काल मान्य नहीं होगा। पूर्ण सूर्य ग्रहण ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन, उत्तरी रूस और पुर्तगाल के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा।
हरियाली अमावस्या का धार्मिक महत्व
श्रावण माह की अमावस्या को हरियाली अमावस्या कहा जाता है। इस दिन भगवान शिव की उपासना से विशेष फल की प्राप्ति होती है। पितरों को जल तर्पण, गरीबों को दान और पवित्र नदियों में स्नान इस तिथि के प्रमुख धार्मिक अनुष्ठान हैं। आने वाले दिनों में प्रतिपदा से श्रावण शुक्ल पक्ष के पर्व भी क्रमशः आरंभ होंगे।