7 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

RBI MPC बैठक आज: रेपो रेट 5.25% से बढ़ने की संभावना, फरवरी 2023 के बाद पहली बढ़ोतरी हो सकती है

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
RBI MPC बैठक आज: रेपो रेट 5.25% से बढ़ने की संभावना, फरवरी 2023 के बाद पहली बढ़ोतरी हो सकती है

सारांश

तीन साल से अधिक की स्थिरता के बाद RBI आज रेपो रेट बढ़ा सकती है। CPI 4.82% पर, कच्चा तेल 100 डॉलर पार और पश्चिम एशिया में तनाव — ये तीनों मिलकर केंद्रीय बैंक पर दबाव बना रहे हैं कि वह फरवरी 2023 के बाद पहली बार दरें बढ़ाए।

मुख्य बातें

RBI MPC ने 7 अक्टूबर 2026 को अपनी द्विमासिक समीक्षा बैठक के फैसलों की घोषणा की।
मौजूदा रेपो रेट 5.25% है; विशेषज्ञों का अनुमान है कि 25 आधार अंकों (0.25%) की बढ़ोतरी हो सकती है।
यदि बढ़ोतरी होती है तो यह फरवरी 2023 के बाद की पहली दर वृद्धि होगी।
अगस्त 2026 में CPI महंगाई 4.82% रही, जो जुलाई की 4.45% से अधिक है।
Bank of America और SBI रिसर्च दोनों ने अक्टूबर में ही बढ़ोतरी की संभावना जताई है।
कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर और पश्चिम एशिया तनाव ने RBI के लिए दरें स्थिर रखना मुश्किल किया।

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने 7 अक्टूबर 2026 को अपनी द्विमासिक समीक्षा बैठक के फैसलों की घोषणा की। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में हुई इस छह सदस्यीय समिति की बैठक ऐसे नाज़ुक समय पर हुई जब घरेलू खुदरा महंगाई चढ़ रही है, कच्चे तेल के दाम 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बने हुए हैं और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव गहरा है।

मौजूदा आर्थिक परिदृश्य

RBI ने पिछली समीक्षा में रेपो रेट 5.25% पर यथावत रखा था। लेकिन अब परिस्थितियाँ बदल चुकी हैं। अगस्त 2026 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई 4.82% पर पहुँच गई, जो जुलाई में 4.45% थी। यह वृद्धि सीधे तौर पर खाद्य पदार्थों और ऊर्जा की बढ़ती कीमतों का परिणाम है।

इसके अलावा, सामान्य से कमज़ोर मानसून और मज़बूत अल नीनो के प्रभाव से अक्टूबर में कम वर्षा की आशंका है, जो रबी फसलों पर प्रतिकूल असर डाल सकती है और खाद्य महंगाई को और हवा दे सकती है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

बैंक ऑफ अमेरिका (BofA) के विश्लेषकों का मानना है कि दिसंबर तक प्रतीक्षा करने के बजाय इसी अक्टूबर बैठक में 25 आधार अंकों (0.25%) की बढ़ोतरी की जा सकती है। संस्था के अनुसार, करीब दो वर्षों की मौद्रिक सहजता के बाद केंद्रीय बैंक अब नीतिगत समर्थन को क्रमशः वापस लेने की राह पर कदम उठा सकता है।

SBI रिसर्च के अर्थशास्त्रियों ने भी कहा है कि बढ़ते मुद्रास्फीति दबाव, कमज़ोर होती वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, बदलती तरलता स्थिति और वैश्विक जोखिमों के नए सिरे से मूल्यांकन को देखते हुए इस समय 25 आधार अंकों की दर वृद्धि का मामला मज़बूत दिखाई देता है। उनका यह भी कहना है कि परिस्थितियों को देखते हुए बाद में कार्रवाई करने के बजाय अभी कदम उठाना अधिक विवेकपूर्ण होगा।

वैश्विक दबाव और बाज़ार पर असर

वैश्विक स्तर पर बढ़ती बॉन्ड यील्ड और ऊँची ऊर्जा कीमतों ने RBI के लिए ब्याज दरें लंबे समय तक अपरिवर्तित रखना कठिन बना दिया है। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक संकट ने कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी है, जिसका सीधा असर भारत के आयात बिल और मुद्रास्फीति पर पड़ता है। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय बाज़ारों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) पहले ही सतर्क रुख़ अपनाए हुए हैं।

गौरतलब है कि यदि बढ़ोतरी होती है तो यह फरवरी 2023 के बाद की पहली दर वृद्धि होगी — यानी तीन वर्षों से अधिक के अंतराल के बाद। बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार, केंद्रीय बैंक को महंगाई नियंत्रण और आर्थिक विकास के बीच सावधानीपूर्वक संतुलन बनाना होगा।

किस पर होगा सीधा असर

यदि रेपो रेट में बढ़ोतरी होती है, तो होम लोन, ऑटो लोन और पर्सनल लोन की EMI बढ़ने का सिलसिला फिर शुरू हो सकता है। निवेशक, उद्योग जगत और कर्ज़ लेने वाले — सभी की नज़रें रेपो रेट के फैसले के साथ-साथ RBI के महंगाई अनुमान, आर्थिक वृद्धि के आकलन और भविष्य की नीतिगत दिशा पर टिकी हैं।

आगे की राह

MPC का यह फैसला और गवर्नर मल्होत्रा का नीतिगत वक्तव्य आने वाले महीनों में बाज़ारों और ब्याज दरों की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार, यदि अक्टूबर में बढ़ोतरी नहीं हुई, तो दिसंबर की बैठक में यह कदम उठाए जाने की प्रबल संभावना बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

या घरेलू विकास की रफ़्तार को प्राथमिकता देता रहेगा। BofA और SBI रिसर्च दोनों की सिफारिश एक ही दिशा में है, लेकिन यह ध्यान देने योग्य है कि पिछले तीन वर्षों में RBI ने बाज़ार की अपेक्षाओं को कई बार चौंकाया है। असली सवाल रेपो रेट से आगे है: क्या MPC अपने महंगाई अनुमान को संशोधित करेगी और नीतिगत रुख को 'समायोजनकारी' से बदलेगी? वही वक्तव्य बाज़ारों की दिशा तय करेगा, न सिर्फ एक तिमाही की दर बढ़ोतरी।
RashtraPress
7 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

RBI MPC का रेपो रेट पर आज का फैसला क्या हो सकता है?
विशेषज्ञों के अनुसार MPC मौजूदा 5.25% रेपो रेट में 25 आधार अंकों (0.25%) की बढ़ोतरी कर सकती है। यदि ऐसा होता है तो यह फरवरी 2023 के बाद की पहली दर वृद्धि होगी।
रेपो रेट बढ़ने से आम लोगों पर क्या असर होगा?
रेपो रेट बढ़ने से होम लोन, ऑटो लोन और पर्सनल लोन की EMI महँगी हो सकती है, क्योंकि बैंक अपनी उधार दरें RBI की नीतिगत दर के अनुसार समायोजित करते हैं। इसका सबसे सीधा असर फ्लोटिंग रेट लोन धारकों पर पड़ेगा।
RBI पर रेपो रेट बढ़ाने का दबाव क्यों है?
अगस्त 2026 में CPI महंगाई 4.82% हो गई, कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार है और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव से आपूर्ति जोखिम बढ़ा है। इन सभी कारकों ने केंद्रीय बैंक पर मौद्रिक सहजता वापस लेने का दबाव बढ़ाया है।
BofA और SBI रिसर्च का क्या मानना है?
Bank of America का कहना है कि दिसंबर की बजाय अक्टूबर की बैठक में ही 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी संभव है। SBI रिसर्च के अर्थशास्त्रियों ने भी बढ़ते मुद्रास्फीति दबाव और वैश्विक जोखिमों को देखते हुए अभी कदम उठाने को ज़्यादा विवेकपूर्ण बताया है।
अल नीनो का महंगाई से क्या संबंध है?
मज़बूत अल नीनो प्रभाव के कारण अक्टूबर में सामान्य से कम बारिश की आशंका है, जो रबी फसलों के उत्पादन पर नकारात्मक असर डाल सकती है। इससे सब्ज़ियों और खाद्यान्न की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे खाद्य महंगाई का जोखिम और गहरा होगा।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 19 मिनट पहले
  2. 2 दिन पहले
  3. 3 दिन पहले
  4. 3 सप्ताह पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 4 महीने पहले
  7. 4 महीने पहले
  8. 4 महीने पहले