फरीदकोट में भगवंत मान के कार्यक्रम के बाद हंगामा, स्वास्थ्य कर्मचारी जसमेल सिंह तीन घंटे पानी की टंकी पर बैठे रहे
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब के फरीदकोट जिले में 29 जून को मुख्यमंत्री भगवंत मान के कार्यक्रम के बाद उस समय हाई-वोल्टेज ड्रामा खड़ा हो गया, जब स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी जसमेल सिंह पानी की टंकी पर चढ़ गए और करीब तीन घंटे तक वहीं बैठे रहे। पुलिस के बार-बार अनुरोध के बाद जसमेल सिंह नीचे उतरे, लेकिन उन्होंने पुलिस अधिकारियों पर अभद्र व्यवहार और मांग पत्र छीनने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
घटनाक्रम की पृष्ठभूमि
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने रविवार, 29 जून को फरीदकोट जिले के चांदबाजा गांव में जनसभा आयोजित की थी। जसमेल सिंह के अनुसार, विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) ने उन्हें पहले यह निर्देश दिया था कि मुख्यमंत्री के लिए कोई मांग पत्र हो तो वे उन्हें सौंप दें। जब स्पीकर व्यस्त हो गए, तो जसमेल सिंह ने वहां मौजूद अन्य कर्मचारियों से मांग पत्र जमा करने की जगह पूछी।
कर्मचारियों ने उन्हें डिस्पेंसरी में तहसीलदार के पास जमा करने को कहा। इसी बीच, कथित तौर पर डीएसपी संजीव कुमार ने उनसे मांग पत्र छीन लिया। जसमेल सिंह का आरोप है कि इसके बाद कई पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोका, उनके साथ अभद्र व्यवहार किया और उनका फोन भी छीन लिया।
कर्मचारी के आरोप
जसमेल सिंह ने कहा, 'स्पीकर ने हमसे कहा था कि अगर मुख्यमंत्री भगवंत मान के लिए कोई मांग पत्र है, तो हम उसे उन्हें सौंप दें। चूंकि स्पीकर व्यस्त थे, इसलिए मैंने वहां मौजूद कर्मचारियों से पूछा कि मांग पत्र कहां जमा करना है।'
उन्होंने आगे कहा, 'मैं गर्मी में 15 मिनट तक अकेला खड़ा रहा। बाद में कई पुलिसकर्मियों ने मुझे रोक लिया और मेरे साथ अभद्र व्यवहार किया। फिर मुझे पकड़कर ले गए और मेरा फोन भी छीन लिया गया।' यह ऐसे समय में हुआ जब कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम थे।
पुलिस की प्रतिक्रिया
पुलिस अधिकारी राजेश कुमार ने घटना को 'छोटी-मोटी' बताते हुए कहा, 'उन्हें नीचे उतार लिया गया है। जब भी इतना बड़ा कार्यक्रम होता है और सुरक्षा के कड़े इंतजाम होते हैं, तो ऐसी छोटी-मोटी घटना हो सकती है। हो सकता है कि उसे यह बात व्यक्तिगत लगी हो, लेकिन यह किसी के लिए भी व्यक्तिगत नहीं थी।'
राजेश कुमार ने यह भी कहा, 'पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी की व्यक्तिगत कोई दुश्मनी नहीं है। हम सभी कर्मचारी हैं और भाई-चारे के साथ काम करते हैं। फिलहाल कोई गिला-शिकवा नहीं है।' पुलिस ने यह स्पष्ट नहीं किया कि मांग पत्र छीनने के आरोपों की जांच की जाएगी या नहीं।
आम जनता और कर्मचारियों पर असर
गौरतलब है कि सरकारी कार्यक्रमों में आम नागरिकों और कर्मचारियों की पहुंच और उनके साथ व्यवहार का मुद्दा पंजाब में पहले भी उठता रहा है। यह घटना इस बात को रेखांकित करती है कि बड़े राजनीतिक आयोजनों के दौरान सुरक्षा प्रबंधन और आम कर्मचारियों के अधिकारों के बीच संतुलन बनाना अभी भी एक चुनौती बनी हुई है।
फिलहाल मामला शांत हो गया है और कोई औपचारिक शिकायत दर्ज होने की सूचना नहीं है, लेकिन जसमेल सिंह के आरोप अनुत्तरित हैं। आगे की कार्रवाई इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या संबंधित विभाग इस मामले की आंतरिक जांच करते हैं।