3 सितंबर 2026
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4 सितंबर 2026 पंचांग: जन्माष्टमी निशीथ काल पूजा रात 11:57 से 12:43 बजे, गृहस्थ मनाएंगे श्रीकृष्ण जन्मोत्सव

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4 सितंबर 2026 पंचांग: जन्माष्टमी निशीथ काल पूजा रात 11:57 से 12:43 बजे, गृहस्थ मनाएंगे श्रीकृष्ण जन्मोत्सव

सारांश

4 सितंबर 2026 को गृहस्थ भक्त कृष्ण जन्माष्टमी मनाएंगे। पंचांग के अनुसार निशीथ काल में रात 11:57 से 12:43 बजे पूजा का सर्वश्रेष्ठ समय है। अष्टमी तिथि रात 12:13 तक, चंद्रमा रोहिणी नक्षत्र में और अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:01 से 12:50 बजे रहेगा।

मुख्य बातें

4 सितंबर 2026 (शुक्रवार) को गृहस्थ भक्त कृष्ण जन्माष्टमी मनाएंगे।
निशीथ काल पूजा का सर्वश्रेष्ठ समय रात 11:57 बजे से 12:43 बजे तक।
अष्टमी तिथि रात 12:13 बजे तक, तत्पश्चात नवमी तिथि प्रारंभ।
चंद्रमा रात 11:04 बजे तक रोहिणी नक्षत्र में, फिर मृगशिरा नक्षत्र ।
अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:01 से 12:50 बजे ; अमृत काल रात 8:02 से 9:32 बजे ।
राहुकाल 10:52 से 12:25 बजे ; पश्चिम दिशा में दिशाशूल।

भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर 4 सितंबर 2026 (शुक्रवार) को कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार, गृहस्थ जीवन जीने वाले भक्त इस दिन भगवान श्रीकृष्ण (लड्डू गोपाल) की पूजा-अर्चना करेंगे। निशीथ काल में पूजा का सर्वश्रेष्ठ समय रात 11:57 बजे से 12:43 बजे तक रहेगा।

अष्टमी तिथि और मुख्य खगोलीय स्थिति

हिंदू काल-गणना पद्धति के अनुसार, 4 सितंबर को अष्टमी तिथि रात 12:13 बजे तक रहेगी, इसके पश्चात नवमी तिथि का आरंभ होगा। इस दिन सूर्योदय प्रातः 6:13 बजे और सूर्यास्त सायं 6:38 बजे होगा। चंद्रोदय रात 11:45 बजे और चंद्रास्त अगले दिन सुबह 1:00 बजे होगा।

पंचांग के अनुसार, सूर्य सिंह राशि में स्थित रहेगा जबकि चंद्रमा वृषभ राशि में विराजमान रहेगा। चंद्रमा रात लगभग 11:04 बजे तक रोहिणी नक्षत्र में रहेगा, इसके बाद मृगशिरा नक्षत्र प्रारंभ होगा। सूर्य पूर्व फाल्गुनी नक्षत्र में स्थित रहेगा।

शुभ मुहूर्त और योग

शुक्रवार को हर्षण योग दोपहर 3:44 बजे तक रहेगा, तत्पश्चात वज्र योग का आरंभ होगा। दिन का सर्वाधिक शुभ समय अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:01 बजे से 12:50 बजे तक रहेगा। इसके अतिरिक्त, अमृत काल रात 8:02 बजे से 9:32 बजे तक रहेगा — यह समय धार्मिक कार्यों के लिए विशेष रूप से अनुकूल माना जाता है।

अशुभ काल — किन समयों से बचें

पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, राहुकाल प्रातः 10:52 बजे से दोपहर 12:25 बजे तक रहेगा। गुलिक काल सुबह 7:46 बजे से 9:19 बजे और यमगंड काल दोपहर 3:31 बजे से 5:05 बजे तक रहेगा। इन अवधियों में नए कार्यों का आरंभ वर्जित माना जाता है।

दिशाशूल और यात्रा संबंधी सावधानी

ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार, शुक्रवार को पश्चिम दिशा में दिशाशूल रहेगा। इस दिशा में यात्रा करने से बचने की सलाह दी जाती है। यदि पश्चिम दिशा में यात्रा अनिवार्य हो, तो विशेष ज्योतिषीय उपायों को अपनाकर प्रस्थान किया जा सकता है।

जन्माष्टमी पूजा विधि का महत्व

हिंदू धर्म में पंचांग का पालन शुभ कार्यों, यात्राओं, निवेश और पूजा-पाठ में मार्गदर्शक माना जाता है। कृष्ण जन्माष्टमी पर निशीथ काल को सर्वोत्तम पूजन समय माना जाता है क्योंकि मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म इसी अर्धरात्रि के समय हुआ था। 5 सितंबर को वैष्णव संप्रदाय के अनुयायी जन्माष्टमी मनाएंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन अधिकांश कवरेज केवल समय-सूची तक सिमट जाती है। इस वर्ष जन्माष्टमी की तिथि को लेकर गृहस्थ और वैष्णव संप्रदाय में एक दिन का अंतर है — यह विभाजन हर साल उलझन पैदा करता है, फिर भी मुख्यधारा की रिपोर्टिंग इसे स्पष्ट करने से चूक जाती है। निशीथ काल का धार्मिक महत्व केवल परंपरा नहीं, बल्कि खगोलीय गणना पर आधारित है — इस संदर्भ को समझाना पाठक की वास्तविक सेवा है।
RashtraPress
3 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

4 सितंबर 2026 को जन्माष्टमी पूजा का सबसे शुभ समय कब है?
पंचांग के अनुसार, निशीथ काल में रात 11:57 बजे से 12:43 बजे तक जन्माष्टमी पूजा का सर्वश्रेष्ठ समय है। यही वह अर्धरात्रि का क्षण माना जाता है जब भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था।
4 सितंबर 2026 को अष्टमी तिथि कब तक रहेगी?
भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 4 सितंबर 2026 को रात 12:13 बजे तक रहेगी। इसके बाद नवमी तिथि का आरंभ होगा।
4 सितंबर को राहुकाल किस समय है और क्या इससे बचना चाहिए?
4 सितंबर को राहुकाल प्रातः 10:52 बजे से दोपहर 12:25 बजे तक रहेगा। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में नए कार्यों का आरंभ अशुभ माना जाता है, इसलिए इससे बचने की सलाह दी जाती है।
4 सितंबर 2026 को चंद्रमा किस नक्षत्र में रहेगा?
4 सितंबर को चंद्रमा रात लगभग 11:04 बजे तक रोहिणी नक्षत्र में रहेगा, इसके बाद मृगशिरा नक्षत्र प्रारंभ होगा। रोहिणी नक्षत्र में जन्माष्टमी का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।
4 सितंबर को किस दिशा में यात्रा से बचना चाहिए?
ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार 4 सितंबर 2026 को पश्चिम दिशा में दिशाशूल रहेगा। यदि इस दिशा में यात्रा अनिवार्य हो, तो विशेष ज्योतिषीय उपायों को अपनाने की सलाह दी जाती है।
राष्ट्र प्रेस
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