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क्या आप जानते हैं श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर नंदलाल की पूजा कैसे करें?

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क्या आप जानते हैं श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर नंदलाल की पूजा कैसे करें?

सारांश

जन्माष्टमी का पर्व नंदलाल की पूजा का एक अद्भुत अवसर है। जानिए इस पावन दिन पर कैसे करें उनकी पूजा और कौन से मंत्रों का जप करें। इस बार का जन्माष्टमी समारोह आपके लिए विशेष बन सकता है।

मुख्य बातें

जन्माष्टमी पर नंदलाल की पूजा विधि का पालन करें।
पंचामृत से अभिषेक करें और भोग अर्पित करें।
मध्यरात्रि में आरती करें और भजन-कीर्तन करें।
उपवास रखें और दान-पुण्य करें।
मंत्रों का जप करें और श्री कृष्ण के प्रति भक्ति व्यक्त करें।

नई दिल्ली, 15 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। हिंदू धर्म का पावन पर्व श्री कृष्ण जन्माष्टमी 16 अगस्त, शनिवार को देशभर में उत्साह और धूमधाम के साथ मनाया जाएगा। दृक पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 15 अगस्त को रात 11 बजकर 49 मिनट से शुरू होकर रात 9 बजकर 34 मिनट पर समाप्त होगी।

निशिता पूजा का शुभ मुहूर्त रात 12 बजकर 4 मिनट से 12 बजकर 47 मिनट तक रहेगा, जिसमें मध्यरात्रि का विशेष क्षण 12 बजकर 26 मिनट पर है। इस दिन भरणी नक्षत्र और वृद्धि, ध्रुव, और सर्वार्थसिद्धि जैसे शुभ योग बन रहे हैं, जो विशेष दिन को और भी फलदायी बनाएंगे।

धर्मशास्त्रों में जन्माष्टमी के पूजन का विशेष विधान है। सुबह स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें। घर और पूजा स्थल पर गंगाजल का छिड़काव करें। चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर बाल गोपाल की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। रात्रि में नंदलाल के जन्म के बाद उनका पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल) से अभिषेक करें, फिर पीले वस्त्र, मोरपंख, बांसुरी और फूलों से श्रृंगार करें। दीप, धूप, शंख और घंटी के साथ मध्यरात्रि में आरती करें। भगवद् गीता के श्लोक पढ़ें और भजन-कीर्तन करें।

यशोदा नंदन को माखन-मिश्री, खीर, पंजीरी, बादाम की पट्टी, रामदाना का लड्डू, पंचामृत और तुलसी पत्र अर्पित करें। छप्पन भोग की परंपरा भी विशेष है, जिसमें मिठाइयां, फल और सात्विक व्यंजन शामिल हैं। भोग में तुलसी पत्र अवश्य चढ़ाएं, क्योंकि यह श्रीकृष्ण को अत्यंत प्रिय है।

श्रीकृष्ण को प्रसन्न करने के लिए मंत्रों का जप करें, जिनमें 'ओम क्रीं कृष्णाय नमः' मानसिक शांति और सौभाग्य के लिए, 'हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे' भक्ति और मोक्ष प्राप्ति के लिए, 'नमो भगवते वासुदेवाय' दांपत्य सुख और प्रेम के लिए, 'क्लीं कृष्णाय नमः' समृद्धि और कृपा के लिए, और 'ओम नमो भगवते वासुदेवाय' शामिल हैं। इसके साथ ही श्री कृष्णम शरणम मम और श्रीकृष्णाष्टकम का भी पाठ करें।

जन्माष्टमी के दिन भक्तों को उपवास रखना चाहिए, जो निर्जला या फलाहार हो सकता है। मध्यरात्रि में जन्मोत्सव मनाएं, शंख बजाएं, और नंदलाल को झूला झुलाएं। अगले दिन दान-पुण्य करें, विशेषकर ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को अन्नदान करें।

संपादकीय दृष्टिकोण

हमें अपने धार्मिक अनुष्ठानों को सजगता से निभाना चाहिए। जन्माष्टमी का यह पर्व न केवल धार्मिक है, बल्कि यह हमारे समाज में प्रेम और एकता का प्रतीक भी है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जन्माष्टमी पर किस प्रकार की पूजा करनी चाहिए?
जन्माष्टमी पर भक्तों को नंदलाल की पूजा करते समय विशेष ध्यान देना चाहिए। स्नान करके शुद्ध वस्त्र धारण करें, गंगाजल का छिड़काव करें और पंचामृत से अभिषेक करें।
क्या जन्माष्टमी पर उपवास रखना चाहिए?
हां, जन्माष्टमी के दिन भक्तों को उपवास रखना चाहिए, जो निर्जला या फलाहार हो सकता है।
कौन से मंत्रों का जप करना चाहिए?
मंत्रों में 'ओम क्रीं कृष्णाय नमः', 'हरे कृष्ण हरे कृष्ण' और 'नमो भगवते वासुदेवाय' जैसे मंत्र शामिल हैं।
राष्ट्र प्रेस
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