3 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

कृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर को: शुभ मुहूर्त 11:05 से 12:35, इस बार गृहस्थ और साधु एक साथ मनाएंगे पर्व

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
कृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर को: शुभ मुहूर्त 11:05 से 12:35, इस बार गृहस्थ और साधु एक साथ मनाएंगे पर्व

सारांश

इस बार कृष्ण जन्माष्टमी पर विशेष संयोग — गृहस्थ और साधु दोनों 4 सितंबर को एक साथ मनाएंगे पर्व। अष्टमी तिथि मध्यरात्रि 2:30 बजे से, पूजा का शुभ मुहूर्त 11:05 से 12:35 बजे तक। पंडित शिप्रा सचदेव ने बांसुरी अर्पण को मनोकामना पूर्ति का सरल उपाय बताया।

मुख्य बातें

कृष्ण जन्माष्टमी इस वर्ष 4 सितंबर को मनाई जाएगी।
अष्टमी तिथि 3-4 सितंबर की मध्यरात्रि 2:30 बजे से प्रारंभ होकर 5 सितंबर रात 12:30 बजे तक रहेगी।
पूजा का शुभ मुहूर्त प्रातः 11:05 से 12:35 बजे तक है।
इस बार गृहस्थ जातक और वैष्णव संप्रदाय दोनों एक ही दिन पर्व मनाएंगे — एक दुर्लभ संयोग।
ज्योतिषाचार्य पंडित शिप्रा सचदेव के अनुसार, मनोकामना पूर्ति के लिए भगवान कृष्ण को चांदी की बांसुरी अर्पित करना शुभ माना जाता है।

इस वर्ष कृष्ण जन्माष्टमी का महापर्व 4 सितंबर को मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को द्वापर युग में मध्यरात्रि में मथुरा के कारागार में देवकी के गर्भ से भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। इस बार एक विशेष संयोग यह है कि गृहस्थ जातक और वैष्णव संप्रदाय दोनों एक ही दिन यह पर्व मनाएंगे — जो हर वर्ष नहीं होता।

विशेष संयोग क्यों है इस बार

ज्योतिषाचार्य पंडित शिप्रा सचदेव के अनुसार, इस बार की जन्माष्टमी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि गृहस्थ जातक और साधुगण दोनों 4 सितंबर को एक साथ यह पर्व मनाएंगे। सामान्यतः तिथि-भेद के कारण दोनों संप्रदायों में अलग-अलग दिन उत्सव होता है, किंतु इस वर्ष ऐसा नहीं है। गौरतलब है कि यह संयोग भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है।

अष्टमी तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त

पंडित शिप्रा सचदेव ने बताया कि अष्टमी तिथि 3-4 सितंबर की मध्यरात्रि 2:30 बजे से प्रारंभ होगी और 5 सितंबर की रात 12:30 बजे तक रहेगी। इसी आधार पर 4 सितंबर को जन्माष्टमी मनाना शास्त्रसम्मत माना जा रहा है। पूजा का शुभ मुहूर्त प्रातः 11:05 बजे से 12:35 बजे तक रहेगा, जिसमें भक्त पूर्ण विधि-विधान के साथ भगवान कृष्ण की आराधना कर सकते हैं।

मनोकामना पूर्ति के लिए विशेष उपाय

पंडित शिप्रा सचदेव ने भक्तों के लिए एक विशेष उपाय सुझाया। उनके अनुसार, 'अगर आपकी कोई भी इच्छा है या आप कृष्ण जी को प्रसन्न करना चाहते हैं तो उन्हें एक चांदी की बांसुरी उपहार में जरूर चढ़ाएं।' उन्होंने आगे कहा कि यदि घर में बाल गोपाल विराजमान हैं, तो उन्हें चांदी की बांसुरी अर्पित करें। यदि मंदिर में चढ़ाना हो और चांदी की बांसुरी संभव न हो, तो 'सामान्य बांसुरी खरीदकर उसमें अपनी विश डाल के श्री कृष्ण के चरणों में चढ़ा दीजिए।'

जन्माष्टमी की पूजन परंपरा

धार्मिक मान्यता है कि जन्माष्टमी पर भगवान कृष्ण को बांसुरी अर्पित करने से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इस पावन अवसर पर मध्यरात्रि में बाल गोपाल का जन्मोत्सव मनाया जाता है, उन्हें झूला झुलाया जाता है और माखन-मिश्री का भोग लगाया जाता है। प्रयागराज सहित देशभर के मंदिरों में इस दिन विशेष श्रृंगार और भजन-कीर्तन के आयोजन होते हैं।

आगे क्या

4 सितंबर को सायंकाल से मंदिरों में विशेष तैयारियां शुरू हो जाएंगी और मध्यरात्रि 12 बजे जन्मोत्सव का मुख्य क्षण होगा। भक्तों को सलाह दी जाती है कि शुभ मुहूर्त में पूजन संपन्न करें और रात्रि जागरण में सम्मिलित हों।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि किसी केंद्रीय धार्मिक प्राधिकरण के निर्देश पर। पंडित शिप्रा सचदेव जैसे विशेषज्ञों की राय स्थानीय परंपरा का प्रतिनिधित्व करती है। पाठकों को अपनी परंपरा और पारिवारिक रीति के अनुसार निर्णय लेना चाहिए।
RashtraPress
3 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कृष्ण जन्माष्टमी 2025 कब है — 3 या 4 सितंबर?
इस वर्ष कृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर को मनाई जाएगी। अष्टमी तिथि 3-4 सितंबर की मध्यरात्रि 2:30 बजे से प्रारंभ होती है और 5 सितंबर की रात 12:30 बजे तक रहती है, इसलिए 4 सितंबर को पर्व मनाना शास्त्रसम्मत है।
जन्माष्टमी 2025 का शुभ मुहूर्त क्या है?
ज्योतिषाचार्य पंडित शिप्रा सचदेव के अनुसार, 4 सितंबर को पूजा का शुभ मुहूर्त प्रातः 11:05 बजे से 12:35 बजे तक रहेगा। इस अवधि में भक्त पूर्ण विधि-विधान के साथ भगवान कृष्ण की पूजा कर सकते हैं।
इस बार जन्माष्टमी पर क्या विशेष संयोग है?
इस बार गृहस्थ जातक और वैष्णव संप्रदाय (साधुगण) दोनों एक ही दिन — 4 सितंबर — को जन्माष्टमी मनाएंगे। सामान्यतः तिथि-भेद के कारण दोनों में अलग-अलग दिन पर्व होता है, किंतु इस वर्ष यह संयोग बना है।
जन्माष्टमी पर मनोकामना पूर्ति के लिए क्या उपाय करें?
पंडित शिप्रा सचदेव के अनुसार, भगवान कृष्ण को चांदी की बांसुरी अर्पित करना मनोकामना पूर्ति के लिए शुभ माना जाता है। यदि चांदी की बांसुरी संभव न हो, तो सामान्य बांसुरी में अपनी इच्छा लिखकर श्री कृष्ण के चरणों में चढ़ाई जा सकती है।
जन्माष्टमी पर पूजन की मुख्य परंपराएं क्या हैं?
जन्माष्टमी पर मध्यरात्रि में बाल गोपाल का जन्मोत्सव मनाया जाता है। उन्हें झूला झुलाया जाता है, माखन-मिश्री का भोग लगाया जाता है और मंदिरों में विशेष श्रृंगार व भजन-कीर्तन के कार्यक्रम आयोजित होते हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 15 घंटे पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 5 महीने पहले
  4. 8 महीने पहले
  5. 10 महीने पहले
  6. 1 साल पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले