11 मार्च: शीतला अष्टमी, कालाष्टमी और मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का महत्व और शुभ-अशुभ समय

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11 मार्च: शीतला अष्टमी, कालाष्टमी और मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का महत्व और शुभ-अशुभ समय

सारांश

11 मार्च को शीतला अष्टमी, कालाष्टमी और मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाएगा। यह दिन भक्तों के लिए विशेष अवसर है, जिसमें विभिन्न देवी-देवताओं की पूजा की जाती है। जानें शुभ और अशुभ समय के बारे में।

Key Takeaways

  • 11 मार्च को शीतला अष्टमी, कालाष्टमी और मासिक कृष्ण जन्माष्टमी है।
  • शीतला अष्टमी पर बासी भोजन चढ़ाने की परंपरा है।
  • कालाष्टमी भगवान कालभैरव को समर्पित है।
  • मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का उद्देश्य श्रीकृष्ण का स्मरण करना है।
  • 11 मार्च के शुभ और अशुभ समय को जानना महत्वपूर्ण है।

नई दिल्ली, 10 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। हिंदू पंचांग के अनुसार, 11 मार्च, बुधवार को शीतला अष्टमी (बासोड़ा), कालाष्टमी, और मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाएगा। ये दिन भक्तों के लिए पूजा, व्रत, और आध्यात्मिक साधना का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। इन तीनों तिथियों पर विभिन्न देवी-देवताओं की आराधना करने से परिवार में सुख, शांति और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।

शीतला अष्टमी या बासोड़ा पूजा होली के बाद कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाई जाती है। इस दिन माता शीतला की पूजा की जाती है, जो संक्रामक रोगों और चर्म रोगों से रक्षा करने वाली देवी मानी जाती हैं। इस दिन बासी (ठंडा या पुराना) भोजन चढ़ाने की परंपरा है, जो इसे बासोड़ा भी कहलाता है। भक्त इस दिन माता से परिवार के स्वास्थ्य की कामना करते हैं।

कालाष्टमी भगवान कालभैरव को समर्पित है, जो हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी को आती है। कालभैरव के उपासक इस दिन उपवास रखते हैं, पूजा-अर्चना करते हैं, और भैरव चालीसा का पाठ करते हैं। भगवान कालभैरव को समय के स्वामी, न्याय के रक्षक और भय-शत्रु के नाशक के रूप में पूजा जाता है।

बुधवार को मासिक कृष्ण जन्माष्टमी भी मनाई जाएगी। यह हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी को होती है और भाद्रपद मास की वार्षिक जन्माष्टमी से भिन्न है। इस व्रत का मुख्य उद्देश्य भगवान श्रीकृष्ण का निरंतर स्मरण, उनकी लीलाओं का चिंतन और सेवा में लीन रहना है। भक्त इस दिन व्रत रखते हैं, भजन-कीर्तन करते हैं, और मंदिरों में दर्शन करते हैं।

चैत्र माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 11 मार्च को है। इस दिन सूर्योदय 6:36 बजे और सूर्यास्त 6:27 बजे होगा। नक्षत्र ज्येष्ठा रात 10 बजे तक रहेगा।

शुभ मुहूर्त की बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:58 से 5:47 तक, अमृत काल दोपहर 12:08 से 1:55 तक, और विजय मुहूर्त दोपहर 2:30 से 3:17 तक है। वहीं, गोधूलि मुहूर्त शाम 6:25 से 6:49 तक है।

अशुभ समय की बात करें तो राहुकाल दोपहर 12:31 से 2 बजे तक, यमगंड सुबह 8:05 से 9:33 तक, गुलिक काल सुबह 11:02 से दोपहर 12:31 तक और दुर्मुहूर्त दोपहर 12:08 से 12:55 तक रहेगा।

Point of View

कालाष्टमी और मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाएगा, जो भक्तों के लिए आध्यात्मिक साधना का महत्वपूर्ण मौका है। यह दिन विशेष रूप से देवी-देवताओं की आराधना के लिए समर्पित है, जो परिवार में सुख और स्वास्थ्य की प्राप्ति में सहायक होता है।
NationPress
12/03/2026

Frequently Asked Questions

शीतला अष्टमी का क्या महत्व है?
शीतला अष्टमी पर माता शीतला की पूजा की जाती है, जो संक्रामक रोगों से रक्षा करती हैं।
कालाष्टमी कब मनाई जाती है?
कालाष्टमी हर महीने की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाई जाती है, जो भगवान कालभैरव को समर्पित है।
मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का उद्देश्य क्या है?
इस व्रत का उद्देश्य भगवान श्रीकृष्ण का निरंतर स्मरण और उनकी लीलाओं का चिंतन करना है।
11 मार्च को शुभ समय क्या है?
11 मार्च को शुभ मुहूर्त सुबह 4:58 से 5:47 तक और दोपहर 12:08 से 1:55 तक है।
अशुभ समय कब है?
अशुभ समय राहुकाल दोपहर 12:31 से 2 बजे तक है।
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