जन्मदिन विशेष: किरण मोरे — मियांदाद और गांगुली, दो किस्से जो क्रिकेटर से बड़े हो गए
सारांश
मुख्य बातें
भारत के पूर्व विकेटकीपर-बल्लेबाज किरण मोरे आज 4 सितंबर को अपना 63वाँ जन्मदिन मना रहे हैं। विकेट के पीछे अपनी चपल और फुर्तीली कीपिंग के लिए पहचाने जाने वाले मोरे का नाम क्रिकेट इतिहास में दो ऐसी घटनाओं से भी जुड़ा है, जिन्होंने उन्हें मैदान की सीमाओं से कहीं आगे चर्चा में ला दिया।
शुरुआती करियर और अंतरराष्ट्रीय पदार्पण
किरण मोरे का जन्म 4 सितंबर 1962 को बड़ौदा में हुआ था। उन्होंने 1980-81 सत्र में बड़ौदा की ओर से प्रथम श्रेणी क्रिकेट में कदम रखा। घरेलू क्रिकेट में निरंतर प्रभावशाली प्रदर्शन के बाद दिसंबर 1984 में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया। 1986 में उन्हें टेस्ट टीम में भी स्थान मिला और उन्होंने पहली ही टेस्ट सीरीज में 16 कैच लपककर इतिहास रच दिया।
मियांदाद प्रकरण — क्रिकेट इतिहास की यादगार घटना
4 मार्च 1992 को विश्व कप में भारत और पाकिस्तान के बीच खेले गए मुकाबले में मोरे ने विकेट के पीछे से इतनी लगातार अपीलें कीं कि पाकिस्तानी बल्लेबाज जावेद मियांदाद झल्लाहट में पिच पर ही उछलने-कूदने लगे। यह दृश्य क्रिकेट इतिहास की सर्वाधिक चर्चित घटनाओं में से एक बन गया। यह वीडियो आज भी सोशल मीडिया पर समय-समय पर वायरल होता रहता है।
करियर के आँकड़े: विकेटकीपर और बल्लेबाज
बल्लेबाज के रूप में मोरे निचले क्रम में उतरते थे, लेकिन उन्होंने टीम के लिए कई महत्वपूर्ण पारियाँ खेलीं। 49 टेस्ट की 64 पारियों में उन्होंने 25.70 की औसत से 1,285 रन बनाए, जिसमें 7 अर्धशतक शामिल हैं। विकेटकीपर के रूप में उनके नाम 110 कैच और 20 स्टंपिंग दर्ज हैं। वनडे क्रिकेट में 94 मैचों की 65 पारियों में उन्होंने 563 रन बनाए, साथ ही 63 कैच और 27 स्टंप भी किए।
संन्यास के बाद: चयनकर्ता और गांगुली विवाद
1993 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित होने के बाद मोरे ने इसी वर्ष क्रिकेट से संन्यास लिया और कोच तथा कमेंटेटर की भूमिका निभाई। 2002 से 2006 तक वे भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) की चयन समिति के अध्यक्ष रहे। इस दौरान उन्होंने युवा खिलाड़ियों को टीम में मौका दिया और वरिष्ठ खिलाड़ियों को बाहर का रास्ता दिखाया।
सबसे बड़ा विवाद तब उठा जब मोरे ने तत्कालीन भारतीय क्रिकेट के सबसे सफल बल्लेबाज और कप्तानों में से एक सौरव गांगुली को टीम से बाहर किया। गांगुली मोरे के चयन समिति अध्यक्ष रहते टीम इंडिया में वापसी नहीं कर सके। इस निर्णय ने मोरे को एक बार फिर राष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया।
आज भी क्रिकेट से जुड़े
मियांदाद और गांगुली से जुड़े इन दोनों प्रसंगों के कारण किरण मोरे आज भी क्रिकेट चर्चाओं में प्रासंगिक बने रहते हैं। वे वर्तमान में घरेलू क्रिकेट में विभिन्न संस्थाओं के साथ अलग-अलग भूमिकाओं में सक्रिय हैं।