3 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

जन्मदिन विशेष: किरण मोरे — मियांदाद और गांगुली, दो किस्से जो क्रिकेटर से बड़े हो गए

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
जन्मदिन विशेष: किरण मोरे — मियांदाद और गांगुली, दो किस्से जो क्रिकेटर से बड़े हो गए

सारांश

विकेट के पीछे की फुर्ती से ज़्यादा, किरण मोरे को दो घटनाओं ने अमर किया — 1992 विश्व कप में मियांदाद का वो गुस्सैल उछाल, और सौरव गांगुली को टीम से बाहर करने का साहसी लेकिन विवादास्पद फ़ैसला। जन्मदिन पर एक क्रिकेटर की वो कहानी जो मैदान से बड़ी हो गई।

मुख्य बातें

किरण मोरे का जन्म 4 सितंबर 1962 को बड़ौदा में हुआ; आज वे 63 वर्ष के हुए।
पहली ही टेस्ट सीरीज में 16 कैच लपककर इतिहास रचा; 49 टेस्ट में 1,285 रन , 110 कैच और 20 स्टंपिंग ।
4 मार्च 1992 को विश्व कप में पाकिस्तान के खिलाफ मैच में जावेद मियांदाद को भड़काने वाली अपील क्रिकेट इतिहास की यादगार घटना बनी।
2002-2006 में BCCI चयन समिति अध्यक्ष रहते सौरव गांगुली को टीम से बाहर करने का विवादास्पद निर्णय लिया।
1993 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित; संन्यास के बाद कोच और कमेंटेटर की भूमिका निभाई।

भारत के पूर्व विकेटकीपर-बल्लेबाज किरण मोरे आज 4 सितंबर को अपना 63वाँ जन्मदिन मना रहे हैं। विकेट के पीछे अपनी चपल और फुर्तीली कीपिंग के लिए पहचाने जाने वाले मोरे का नाम क्रिकेट इतिहास में दो ऐसी घटनाओं से भी जुड़ा है, जिन्होंने उन्हें मैदान की सीमाओं से कहीं आगे चर्चा में ला दिया।

शुरुआती करियर और अंतरराष्ट्रीय पदार्पण

किरण मोरे का जन्म 4 सितंबर 1962 को बड़ौदा में हुआ था। उन्होंने 1980-81 सत्र में बड़ौदा की ओर से प्रथम श्रेणी क्रिकेट में कदम रखा। घरेलू क्रिकेट में निरंतर प्रभावशाली प्रदर्शन के बाद दिसंबर 1984 में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया। 1986 में उन्हें टेस्ट टीम में भी स्थान मिला और उन्होंने पहली ही टेस्ट सीरीज में 16 कैच लपककर इतिहास रच दिया।

मियांदाद प्रकरण — क्रिकेट इतिहास की यादगार घटना

4 मार्च 1992 को विश्व कप में भारत और पाकिस्तान के बीच खेले गए मुकाबले में मोरे ने विकेट के पीछे से इतनी लगातार अपीलें कीं कि पाकिस्तानी बल्लेबाज जावेद मियांदाद झल्लाहट में पिच पर ही उछलने-कूदने लगे। यह दृश्य क्रिकेट इतिहास की सर्वाधिक चर्चित घटनाओं में से एक बन गया। यह वीडियो आज भी सोशल मीडिया पर समय-समय पर वायरल होता रहता है।

करियर के आँकड़े: विकेटकीपर और बल्लेबाज

बल्लेबाज के रूप में मोरे निचले क्रम में उतरते थे, लेकिन उन्होंने टीम के लिए कई महत्वपूर्ण पारियाँ खेलीं। 49 टेस्ट की 64 पारियों में उन्होंने 25.70 की औसत से 1,285 रन बनाए, जिसमें 7 अर्धशतक शामिल हैं। विकेटकीपर के रूप में उनके नाम 110 कैच और 20 स्टंपिंग दर्ज हैं। वनडे क्रिकेट में 94 मैचों की 65 पारियों में उन्होंने 563 रन बनाए, साथ ही 63 कैच और 27 स्टंप भी किए।

संन्यास के बाद: चयनकर्ता और गांगुली विवाद

1993 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित होने के बाद मोरे ने इसी वर्ष क्रिकेट से संन्यास लिया और कोच तथा कमेंटेटर की भूमिका निभाई। 2002 से 2006 तक वे भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) की चयन समिति के अध्यक्ष रहे। इस दौरान उन्होंने युवा खिलाड़ियों को टीम में मौका दिया और वरिष्ठ खिलाड़ियों को बाहर का रास्ता दिखाया।

सबसे बड़ा विवाद तब उठा जब मोरे ने तत्कालीन भारतीय क्रिकेट के सबसे सफल बल्लेबाज और कप्तानों में से एक सौरव गांगुली को टीम से बाहर किया। गांगुली मोरे के चयन समिति अध्यक्ष रहते टीम इंडिया में वापसी नहीं कर सके। इस निर्णय ने मोरे को एक बार फिर राष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया।

आज भी क्रिकेट से जुड़े

मियांदाद और गांगुली से जुड़े इन दोनों प्रसंगों के कारण किरण मोरे आज भी क्रिकेट चर्चाओं में प्रासंगिक बने रहते हैं। वे वर्तमान में घरेलू क्रिकेट में विभिन्न संस्थाओं के साथ अलग-अलग भूमिकाओं में सक्रिय हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

विवादों से बनती हैं। मियांदाद प्रकरण को तीन दशक बाद भी जिस उत्साह से याद किया जाता है, वह बताता है कि भारत-पाक क्रिकेट की भावनात्मक तीव्रता किसी भी नतीजे से ऊपर है। गांगुली को ड्रॉप करने का निर्णय भले ही चयन-समिति की स्वायत्तता का प्रतीक था, लेकिन इसने यह सवाल भी खड़ा किया कि क्रिकेट प्रशासन में निर्णय योग्यता पर आधारित होते हैं या दबाव से मुक्त? मोरे की विरासत इन्हीं दो असुविधाजनक सवालों के बीच टिकी है।
RashtraPress
3 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

किरण मोरे कौन हैं और उनका जन्म कब हुआ?
किरण मोरे भारत के पूर्व विकेटकीपर-बल्लेबाज हैं, जिनका जन्म 4 सितंबर 1962 को बड़ौदा में हुआ था। उन्होंने 1984 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया और 49 टेस्ट तथा 94 वनडे मैच खेले।
किरण मोरे और जावेद मियांदाद के बीच 1992 में क्या हुआ था?
4 मार्च 1992 को विश्व कप में भारत-पाकिस्तान मैच के दौरान मोरे ने विकेट के पीछे से लगातार अपीलें कीं, जिससे पाकिस्तानी बल्लेबाज जावेद मियांदाद झल्लाहट में पिच पर ही उछलने-कूदने लगे। यह दृश्य क्रिकेट इतिहास की सर्वाधिक चर्चित घटनाओं में से एक है और आज भी सोशल मीडिया पर वायरल होता रहता है।
किरण मोरे ने सौरव गांगुली को टीम से क्यों बाहर किया?
2002 से 2006 तक BCCI चयन समिति के अध्यक्ष रहते हुए मोरे ने युवा खिलाड़ियों को प्राथमिकता देने की नीति अपनाई और सीनियर खिलाड़ियों को बाहर किया। इसी क्रम में तत्कालीन सफल कप्तान सौरव गांगुली को भी टीम से बाहर किया गया, जो मोरे के कार्यकाल का सबसे विवादास्पद निर्णय माना जाता है।
किरण मोरे के टेस्ट करियर के आँकड़े क्या हैं?
किरण मोरे ने 49 टेस्ट की 64 पारियों में 25.70 की औसत से 1,285 रन बनाए, जिसमें 7 अर्धशतक शामिल हैं। विकेटकीपर के रूप में उनके नाम 110 कैच और 20 स्टंपिंग दर्ज हैं।
किरण मोरे को कौन-सा राष्ट्रीय पुरस्कार मिला और संन्यास के बाद उन्होंने क्या किया?
किरण मोरे को 1993 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। संन्यास के बाद उन्होंने कोच और कमेंटेटर की भूमिका निभाई और 2002 से 2006 तक BCCI चयन समिति के अध्यक्ष रहे। वे आज भी घरेलू क्रिकेट में विभिन्न भूमिकाओं में सक्रिय हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 8 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 12 महीने पहले
  8. 1 साल पहले