दलाई लामा लद्दाख पहुंचे: दो महीने के ग्रीष्मकालीन प्रवास की शुरुआत, 6 जुलाई को मनेगा 91वां जन्मदिन
सारांश
मुख्य बातें
तिब्बती बौद्ध धर्म के सर्वोच्च आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा रविवार, 28 जून 2026 को अपने वार्षिक ग्रीष्मकालीन प्रवास के लिए लेह, लद्दाख पहुंचे। यह दौरा दो महीने तक चलेगा और इस दौरान वह धार्मिक प्रवचनों, जनसंपर्क कार्यक्रमों तथा विशेष सांस्कृतिक आयोजनों में भाग लेंगे। यह यात्रा नई दिल्ली में हाल ही में कराए गए उनके चिकित्सा उपचार के बाद हो रही है।
स्वागत और व्यवस्थाएं
लेह पहुंचने पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और बौद्ध समुदाय के लोगों ने उनका हार्दिक स्वागत किया। लेह प्रशासन ने लद्दाख बौद्ध एसोसिएशन (LBA) और लद्दाख गोम्पा एसोसिएशन (LGA) के साथ समन्वय करते हुए उनके प्रवास और आगामी कार्यक्रमों के लिए व्यापक इंतज़ाम किए हैं। अधिकारियों के अनुसार, धार्मिक शिक्षाओं और सार्वजनिक आयोजनों का विस्तृत कार्यक्रम बाद में जारी किया जाएगा।
स्वास्थ्य की स्थिति और सीमित कार्यक्रम
हाल ही में दलाई लामा के घुटने की सर्जरी हुई है, जिसके चलते उन्हें पर्याप्त विश्राम की आवश्यकता है। इसी कारण इस वर्ष सार्वजनिक प्रवचनों और जनसंपर्क कार्यक्रमों की संख्या सीमित रहने की संभावना है। यह ऐसे समय में आया है जब उनके अनुयायी विश्वभर से उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंतित रहे हैं।
91वां जन्मदिन लद्दाख में
6 जुलाई 2026 को दलाई लामा का 91वां जन्मदिन लद्दाख में ही धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ मनाया जाएगा। 14वें दलाई लामा का जन्म 6 जुलाई 1935 को हुआ था और उनका पूरा आध्यात्मिक नाम 'जेत्सुन जाम्फेल नगवांग लोबसांग येशे तेनजिन ग्यात्सो' है — जिन्हें संक्षेप में तेनजिन ग्यात्सो कहा जाता है।
दलाई लामा: आध्यात्मिक और ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य
तिब्बती बौद्ध परंपरा के अनुसार, दलाई लामा को करुणा के बोधिसत्व अवलोकितेश्वर (तिब्बती में चेनरेजिग) का पुनर्जन्म माना जाता है। वह तिब्बती बौद्ध धर्म के गेलुग संप्रदाय के प्रमुख आध्यात्मिक नेता हैं। 1959 तक वह तिब्बत के आध्यात्मिक और राजनीतिक नेता रहे, जिसके बाद उन्होंने निर्वासित तिब्बती प्रशासन का नेतृत्व किया, जिसका मुख्यालय हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में स्थित है।
आगे क्या
दलाई लामा जुलाई और अगस्त के कुछ दिनों तक लद्दाख में रहेंगे। उनके प्रवास के दौरान आयोजित होने वाले धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की पूरी सूची आने वाले दिनों में जारी होने की उम्मीद है। गौरतलब है कि यह वार्षिक ग्रीष्मकालीन प्रवास लद्दाख के बौद्ध समुदाय के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण अवसर होता है।