24 जुलाई 2026
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दलाई लामा के बाएं घुटने का सफल प्रत्यारोपण, चिकित्सकों ने कहा — 'रिकवरी अच्छी, मनोबल ऊंचा'

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दलाई लामा के बाएं घुटने का सफल प्रत्यारोपण, चिकित्सकों ने कहा — 'रिकवरी अच्छी, मनोबल ऊंचा'

सारांश

दलाई लामा के बाएं घुटने का प्रत्यारोपण नई दिल्ली के अपोलो अस्पताल में सफलतापूर्वक हुआ। जून 2024 में दाएं घुटने की सर्जरी के बाद अब दूसरा चरण भी पूरा — रिकवरी अच्छी, मनोबल ऊंचा। जून के अंत में लद्दाख प्रवास की योजना।

मुख्य बातें

दलाई लामा के बाएं घुटने का प्रत्यारोपण नई दिल्ली स्थित अपोलो अस्पताल में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
निजी चिकित्सकों ने 8 जून को जारी हेल्थ बुलेटिन में बताया कि रिकवरी अच्छी है और मनोबल ऊंचा है।
जून 2024 में न्यूयॉर्क के हॉस्पिटल फॉर स्पेशल सर्जरी में दाएं घुटने का सफल प्रत्यारोपण हो चुका था।
दलाई लामा 1959 से भारत में शरण लिए हुए हैं और धर्मशाला उनका स्थायी निवास है।
सर्जरी के बाद जून के अंत में लद्दाख प्रवास की योजना; विस्तृत कार्यक्रम बाद में जारी होगा।

तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा के बाएं घुटने का प्रत्यारोपण ऑपरेशन नई दिल्ली स्थित अपोलो अस्पताल में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। उनके निजी चिकित्सकों ने सोमवार, 8 जून को हेल्थ बुलेटिन जारी कर बताया कि सर्जरी के बाद धर्मगुरु की स्थिति स्थिर है और रिकवरी संतोषजनक गति से आगे बढ़ रही है। यह उनके दोनों घुटनों की सर्जरी का दूसरा और अंतिम चरण है।

सर्जरी का विवरण और चिकित्सक दल

दलाई लामा के निजी चिकित्सक डॉ. त्सेतन डी. सदुतशांग, डॉ. तमदिन त्सेवांग, डॉ. त्सेरिंग ल्हाडोन और डॉ. तेनजिन सुंदू ने उनके सचिव टेनजिन एन. ताकला के साथ मिलकर स्वास्थ्य अपडेट साझा किया। बयान के अनुसार, सर्जरी पूर्ण होने के बाद धर्मगुरु को स्थिर अवस्था में अस्पताल के कमरे में वापस लाया गया। चिकित्सकों ने कहा कि उनका मनोबल भी अच्छा बना हुआ है।

चिकित्सक दल ने अपोलो अस्पताल के मेडिकल, नर्सिंग और प्रशासनिक स्टाफ की उत्कृष्ट देखभाल और समर्पण के लिए आभार व्यक्त किया। बयान में अस्पताल की पेशेवर सेवाओं की विशेष सराहना की गई।

पिछली सर्जरी से तुलना

गौरतलब है कि जून 2024 में दलाई लामा ने न्यूयॉर्क सिटी के हॉस्पिटल फॉर स्पेशल सर्जरी में अपने दाएं घुटने का सफल प्रत्यारोपण कराया था, जिसके बाद उनकी रिकवरी भी अच्छी रही थी। अब बाएं घुटने की सर्जरी के साथ दोनों घुटनों का उपचार पूरा हो गया है। धर्मगुरु लंबे समय से घुटने के दर्द से परेशान थे, और यह सर्जरी उनकी गतिशीलता बहाल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

दिल्ली आगमन और अनुयायियों की भावना

दलाई लामा शुक्रवार को दिल्ली पहुंचे थे। कांगड़ा एयरपोर्ट से रवाना होने से पहले उनके अनुयायियों की बड़ी संख्या वहाँ जमा हो गई थी। बताया गया कि धर्मगुरु के अंतिम दर्शन के लिए उनके अनुयायी बारिश में भी घंटों खड़े रहे — यह दृश्य उनके प्रति जनसाधारण की गहरी आस्था का प्रमाण था।

दलाई लामा पिछले काफी समय से हिमाचल प्रदेश के मैकलोडगंज में रह रहे हैं। वर्ष 1959 में तिब्बत छोड़ने के बाद से वे भारत में शरण लिए हुए हैं और धर्मशाला को अपना स्थायी निवास बनाया है।

आगे का कार्यक्रम

सर्जरी के बाद रिकवरी पूरी होने पर दलाई लामा जून के अंत में लद्दाख जाने की योजना रखते हैं, जहाँ वे एक विस्तारित अवधि तक प्रवास करेंगे। उनके कार्यालय के अनुसार, लद्दाख यात्रा के कार्यक्रमों और प्रवास की विस्तृत जानकारी बाद में जारी की जाएगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दलाई लामा के घुटने की सर्जरी कहाँ और कब हुई?
दलाई लामा के बाएं घुटने का प्रत्यारोपण नई दिल्ली स्थित अपोलो अस्पताल में हुआ, जिसकी सफलता की जानकारी 8 जून को जारी हेल्थ बुलेटिन में दी गई। सर्जरी के बाद उन्हें स्थिर अवस्था में अस्पताल के कमरे में वापस लाया गया।
दलाई लामा की रिकवरी कैसी है?
चिकित्सकों के अनुसार दलाई लामा की रिकवरी अच्छी हो रही है और उनका मनोबल भी ऊंचा है। उनकी स्थिति स्थिर बताई गई है और स्वास्थ्य में सुधार जारी है।
क्या दलाई लामा की पहले भी घुटने की सर्जरी हुई थी?
हाँ, जून 2024 में दलाई लामा ने न्यूयॉर्क सिटी के हॉस्पिटल फॉर स्पेशल सर्जरी में दाएं घुटने का सफल प्रत्यारोपण कराया था। उस सर्जरी के बाद भी उनकी रिकवरी अच्छी रही थी। अब बाएं घुटने की सर्जरी के साथ दोनों घुटनों का उपचार पूरा हो गया है।
सर्जरी के बाद दलाई लामा कहाँ जाएंगे?
रिकवरी पूरी होने के बाद दलाई लामा जून के अंत में लद्दाख जाने की योजना रखते हैं, जहाँ वे एक विस्तारित अवधि तक प्रवास करेंगे। उनके कार्यालय ने कहा है कि लद्दाख यात्रा के विस्तृत कार्यक्रम बाद में जारी किए जाएंगे।
दलाई लामा भारत में कब से रह रहे हैं?
दलाई लामा वर्ष 1959 में तिब्बत छोड़ने के बाद से भारत में शरण लिए हुए हैं। उन्होंने हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला को अपना स्थायी निवास बनाया है और मैकलोडगंज में रहते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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