क्या निर्वासित तिब्बतियों ने भारत का 77वां गणतंत्र दिवस मनाया?

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क्या निर्वासित तिब्बतियों ने भारत का 77वां गणतंत्र दिवस मनाया?

सारांश

धर्मशाला में, केंद्रीय तिब्बती प्रशासन ने भारत के 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर एक महत्वपूर्ण समारोह का आयोजन किया। इस अवसर पर, तिब्बती नेताओं ने भारत की लोकतांत्रिक प्रणाली और उसकी उदारता की सराहना की, साथ ही दलाई लामा ने भारत के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की।

Key Takeaways

  • भारत में तिब्बती समुदाय की महत्वपूर्ण भूमिका है।
  • दलाई लामा ने भारत में लोकतांत्रिक प्रणाली की स्थापना की।
  • भारत की उदारता और सहिष्णुता का तिब्बतियों ने किया जश्न।

धर्मशाला, 26 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत के 77वें गणतंत्र दिवस के उत्सव में केंद्रीय तिब्बती प्रशासन (सीटीए) ने सोमवार को इस अवसर पर भाग लिया। यह समारोह 26 जनवरी, 1950 को भारतीय संविधान के लागू होने की स्मृति में मनाया गया।

झंडा फहराने और राष्ट्रगान के बाद, कार्यवाहक सिक्योंग डोल्मा चांगरा ने मीडिया से बात करते हुए तिब्बती लोगों की ओर से भारत सरकार और जनता को शुभकामनाएं दीं।

उन्होंने कहा कि भारत एक कार्यशील और स्थायी लोकतंत्र का सशक्त उदाहरण है, जो संपूर्ण दुनिया के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने याद दिलाया कि जब से परम पावन दलाई लामा भारत आए, तब से उन्होंने निर्वासित तिब्बतियों के लिए एक लोकतांत्रिक प्रणाली की स्थापना की, जो तिब्बती इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना थी। उन्होंने भारत के लोकतांत्रिक मॉडल से प्रेरणा ली।

उपसभापति डोल्मा त्सेरिंग तेयखांग ने भी इस मौके पर मीडिया से बात करते हुए भारत की जनता को शुभकामनाएं दीं और आभार तथा एकजुटता व्यक्त की।

अपने संबोधन में, तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा ने पिछले छह दशकों से अधिक समय से तिब्बती लोगों को दी गई उदार मेहमाननवाजी और दयालुता के लिए भारत सरकार और जनता का धन्यवाद किया।

तिब्बत पर कम्युनिस्ट शासन के खिलाफ असफल विद्रोह के चलते 1959 में चीन से भागने के बाद से दलाई लामा भारत में रह रहे हैं। निर्वासित सरकार, जिसे केंद्रीय तिब्बती प्रशासन (सीटीए) कहा जाता है, का मुख्यालय धर्मशाला में है।

परम पावन दलाई लामा अक्सर भारत को 'गुरु' और तिब्बत को 'चेला' कहते हैं और स्वयं को 'भारत का पुत्र' तथा महात्मा गांधी का सच्चा अनुयायी मानते हैं।

वे नालंदा परंपरा पर आधारित भारत के प्राचीन ज्ञान के पुनरुद्धार के समर्थक हैं। उनका मानना है कि भारत ही एकमात्र ऐसा देश है जहाँ अपने प्राचीन ज्ञान को आधुनिक शिक्षा के साथ जोड़ने की क्षमता है।

Point of View

यह समारोह भारत और तिब्बत के बीच के गहरे रिश्ते को दर्शाता है। भारत ने हमेशा तिब्बतियों के प्रति अपने समर्थन और एकजुटता का प्रदर्शन किया है, जो कि लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
NationPress
09/02/2026

Frequently Asked Questions

केंद्रीय तिब्बती प्रशासन (सीटीए) क्या है?
केंद्रीय तिब्बती प्रशासन (सीटीए) निर्वासित तिब्बतियों की सरकार है, जिसका मुख्यालय धर्मशाला में है।
दलाई लामा ने भारत को क्यों 'गुरु' कहा?
दलाई लामा ने भारत को 'गुरु' कहा क्योंकि उन्हें यहाँ की संस्कृति और लोकतंत्र से गहरा जुड़ाव है।
तिब्बतियों ने गणतंत्र दिवस क्यों मनाया?
तिब्बतियों ने गणतंत्र दिवस मनाने का उद्देश्य भारतीय संविधान के प्रति अपनी कृतज्ञता और सम्मान व्यक्त करना है।
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