ई20 पेट्रोल से 30% कम कार्बन उत्सर्जन, बेहतर एक्सेलरेशन; इंजन नुकसान का कोई प्रमाण नहीं: केंद्र सरकार
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने 27 जुलाई 2026 को राज्यसभा में स्पष्ट किया कि ई20 पेट्रोल वाहनों को बेहतर एक्सेलरेशन, स्मूद राइड क्वालिटी और ई10 पेट्रोल की तुलना में लगभग 30 प्रतिशत कम कार्बन उत्सर्जन प्रदान करता है। सरकार ने यह भी कहा कि व्यापक वैज्ञानिक अध्ययनों और वास्तविक उपयोग के आंकड़ों में एथेनॉल के कारण इंजन में जंग, असामान्य घिसावट या वाहन की आयु कम होने का कोई प्रमाण नहीं मिला है।
संसद में क्या कहा सरकार ने
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि ई20 ईंधन वाहन की राइड क्वालिटी को बेहतर बनाता है और ई10 की तुलना में लगभग 30 प्रतिशत कम कार्बन उत्सर्जन करता है। मंत्रालय के अनुसार, अधिक एथेनॉल मिश्रण वाला ईंधन अधिक स्वच्छ और पूर्ण दहन सुनिश्चित करता है, जिससे पार्टिकुलेट मैटर (PM) का उत्सर्जन लगभग शून्य हो जाता है और शहरी क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता में सुधार होता है।
परीक्षण और वैज्ञानिक प्रमाण
सरकार ने बताया कि ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI), सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM), इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम (IIP) और विभिन्न वाहन निर्माताओं ने ई20 ईंधन लागू करने से पहले प्रयोगशाला परीक्षण और फील्ड ट्रायल किए थे। इन परीक्षणों में इंजन की मजबूती, वाहन प्रदर्शन, स्टार्ट होने की क्षमता, जंग-रोधी क्षमता, सामग्री की अनुकूलता, उत्सर्जन और ईंधन दक्षता जैसे कई पहलुओं का मूल्यांकन किया गया। इन सभी अध्ययनों ने पुष्टि की कि निर्धारित मानकों के तहत ई20 ईंधन पूरी तरह सुरक्षित है।
वास्तविक उपयोग के आंकड़े
अपने दावे के समर्थन में सरकार ने बड़े पैमाने पर जुटाए गए आंकड़ों का हवाला दिया। आंकड़ों के अनुसार, एक प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 2.84 करोड़ वाहनों की सर्विसिंग की, जिनमें से लगभग 1.5 करोड़ वाहन ऐसे थे जिन्हें मूल रूप से ई20 के अनुकूल प्रमाणित नहीं किया गया था। इसके बावजूद किसी भी वाहन में ई20 के कारण जंग, असामान्य घिसावट या पुर्जों की आयु कम होने की कोई शिकायत सामने नहीं आई।
इसी तरह, एक प्रमुख दोपहिया वाहन निर्माता ने भी ऐसे ही परिणाम दर्ज किए। वहीं, एक अन्य बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनी (OEM) ने लंबे समय तक 1.4 करोड़ ई20 ईंधन से चलने वाले वाहनों की निगरानी की और उसमें भी एथेनॉल के कारण इंजन में जंग या किसी प्रकार की तकनीकी समस्या का कोई प्रमाण नहीं मिला।
ARAI की पुष्टि और आगे की राह
मंत्रालय ने कहा कि ARAI ने भी दोहराया है कि किसी भी वाहन को ग्राहकों तक पहुँचाने से पहले उसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कड़े परीक्षणों और सत्यापन प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है, जिससे उसकी सुरक्षा और प्रदर्शन सुनिश्चित किया जाता है। गौरतलब है कि भारत सरकार की एथेनॉल सम्मिश्रण नीति पेट्रोल आयात पर निर्भरता कम करने और किसानों को वैकल्पिक आय देने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में वायु प्रदूषण और ईंधन सुरक्षा दोनों प्रमुख नीतिगत प्राथमिकताएँ बनी हुई हैं।