भोजशाला विवाद: सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को होगी मुस्लिम पक्ष की याचिका पर सुनवाई, नमाज स्थल पर गतिरोध जारी
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार, 29 जुलाई 2026 को धार भोजशाला विवाद से जुड़ी मुस्लिम पक्ष की उस याचिका पर सुनवाई की, जिसमें शुक्रवार की नमाज के लिए भोजशाला स्थल के निकट उचित भूमि न दिए जाने का मुद्दा उठाया गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मामले में गुरुवार को भी सुनवाई जारी रहेगी।
मुख्य घटनाक्रम
मुस्लिम पक्ष की ओर से पेश अधिवक्ता हुजैफा अहमदी ने अदालत में यह शिकायत की कि सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व आदेशों का पालन नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा, 'आपके आदेशों का पालन नहीं हो रहा है। वह जगह 1.3 किलोमीटर दूर है और कलेक्टर ने आदेश दिया है कि वही जगह अलॉट की जाएगी।' इस पर भारत के मुख्य न्यायाधीश ने राज्य सरकार की निष्क्रियता पर नाराज़गी जाहिर की और पूछा कि मुस्लिम पक्ष को किसी वैकल्पिक स्थान की जानकारी क्यों नहीं दी जा रही।
वैकल्पिक स्थान पर विवाद
राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता अदालत में उपस्थित हुए और एक दूसरे स्थान का विकल्प प्रस्तुत किया। हालाँकि, मुस्लिम पक्ष ने इस प्रस्ताव को भी अस्वीकार कर दिया। अधिवक्ता अहमदी ने कहा कि यह दूसरा स्थान भी बहुत दूर है और एक ब्रुअरी परिसर का हिस्सा है। उन्होंने सुझाव दिया कि भोजशाला के निकट स्थित एक दरगाह के सामने की भूमि नमाज के लिए उपयुक्त है और वही आवंटित की जानी चाहिए।
मुस्लिम पक्ष की मुख्य आपत्तियाँ
मुस्लिम पक्ष ने अपनी याचिका में उल्लेख किया है कि प्रशासन ने नमाज के लिए भोजशाला से दो किलोमीटर दूर भूमि निर्धारित की है, जो उन्हें स्वीकार्य नहीं है। इस कारण पिछले तीन शुक्रवार से मुस्लिम समुदाय नमाज अदा करने से वंचित रहा है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि इतनी दूर स्थित स्थान व्यावहारिक रूप से उपयोगी नहीं है।
पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि धार भोजशाला मामले में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के फैसले के विरुद्ध दायर याचिका की सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने पहले ही प्रशासन को आदेश दिया था कि मुस्लिम पक्ष को भोजशाला के समीप नमाज के लिए उचित स्थान उपलब्ध कराया जाए। यह विवाद हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के दावों से जुड़ा है — जहाँ हिंदू पक्ष इसे माँ सरस्वती का मंदिर मानता है, वहीं मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद के रूप में देखता है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में धार्मिक स्थलों से जुड़े कई विवाद न्यायिक प्रक्रिया के विभिन्न चरणों में हैं।
आगे क्या होगा
सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि गुरुवार को इस मामले में पुनः सुनवाई होगी। अदालत से यह अपेक्षा की जा रही है कि वह राज्य सरकार को नमाज के लिए स्वीकार्य वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने हेतु स्पष्ट निर्देश दे। इस मामले का निर्णय भोजशाला स्थल पर दोनों समुदायों के अधिकारों और प्रशासनिक दायित्वों की दिशा तय करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।