29 जुलाई 2026
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भोजशाला विवाद: सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को होगी मुस्लिम पक्ष की याचिका पर सुनवाई, नमाज स्थल पर गतिरोध जारी

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भोजशाला विवाद: सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को होगी मुस्लिम पक्ष की याचिका पर सुनवाई, नमाज स्थल पर गतिरोध जारी

सारांश

धार भोजशाला के पास नमाज के लिए उचित स्थान न मिलने से मुस्लिम पक्ष पिछले तीन शुक्रवार से नमाज अदा करने से वंचित है। सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य सरकार की निष्क्रियता पर नाराज़गी जताई और गुरुवार को पुनः सुनवाई का भरोसा दिया।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 29 जुलाई 2026 को धार भोजशाला विवाद में मुस्लिम पक्ष की याचिका पर सुनवाई की।
मुस्लिम पक्ष के अधिवक्ता हुजैफा अहमदी ने कहा कि प्रस्तावित नमाज स्थल भोजशाला से 1.3 किलोमीटर दूर है, जो अस्वीकार्य है।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता द्वारा दिए गए दूसरे वैकल्पिक स्थान को भी मुस्लिम पक्ष ने अस्वीकार किया — कहा कि वह एक ब्रुअरी परिसर का हिस्सा है।
मुस्लिम पक्ष पिछले तीन शुक्रवार से नमाज अदा करने से वंचित है।
मुख्य न्यायाधीश ने राज्य सरकार की निष्क्रियता पर नाराज़गी जताई; गुरुवार को पुनः सुनवाई निर्धारित।

सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार, 29 जुलाई 2026 को धार भोजशाला विवाद से जुड़ी मुस्लिम पक्ष की उस याचिका पर सुनवाई की, जिसमें शुक्रवार की नमाज के लिए भोजशाला स्थल के निकट उचित भूमि न दिए जाने का मुद्दा उठाया गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मामले में गुरुवार को भी सुनवाई जारी रहेगी।

मुख्य घटनाक्रम

मुस्लिम पक्ष की ओर से पेश अधिवक्ता हुजैफा अहमदी ने अदालत में यह शिकायत की कि सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व आदेशों का पालन नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा, 'आपके आदेशों का पालन नहीं हो रहा है। वह जगह 1.3 किलोमीटर दूर है और कलेक्टर ने आदेश दिया है कि वही जगह अलॉट की जाएगी।' इस पर भारत के मुख्य न्यायाधीश ने राज्य सरकार की निष्क्रियता पर नाराज़गी जाहिर की और पूछा कि मुस्लिम पक्ष को किसी वैकल्पिक स्थान की जानकारी क्यों नहीं दी जा रही।

वैकल्पिक स्थान पर विवाद

राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता अदालत में उपस्थित हुए और एक दूसरे स्थान का विकल्प प्रस्तुत किया। हालाँकि, मुस्लिम पक्ष ने इस प्रस्ताव को भी अस्वीकार कर दिया। अधिवक्ता अहमदी ने कहा कि यह दूसरा स्थान भी बहुत दूर है और एक ब्रुअरी परिसर का हिस्सा है। उन्होंने सुझाव दिया कि भोजशाला के निकट स्थित एक दरगाह के सामने की भूमि नमाज के लिए उपयुक्त है और वही आवंटित की जानी चाहिए।

मुस्लिम पक्ष की मुख्य आपत्तियाँ

मुस्लिम पक्ष ने अपनी याचिका में उल्लेख किया है कि प्रशासन ने नमाज के लिए भोजशाला से दो किलोमीटर दूर भूमि निर्धारित की है, जो उन्हें स्वीकार्य नहीं है। इस कारण पिछले तीन शुक्रवार से मुस्लिम समुदाय नमाज अदा करने से वंचित रहा है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि इतनी दूर स्थित स्थान व्यावहारिक रूप से उपयोगी नहीं है।

पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि धार भोजशाला मामले में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के फैसले के विरुद्ध दायर याचिका की सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने पहले ही प्रशासन को आदेश दिया था कि मुस्लिम पक्ष को भोजशाला के समीप नमाज के लिए उचित स्थान उपलब्ध कराया जाए। यह विवाद हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के दावों से जुड़ा है — जहाँ हिंदू पक्ष इसे माँ सरस्वती का मंदिर मानता है, वहीं मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद के रूप में देखता है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में धार्मिक स्थलों से जुड़े कई विवाद न्यायिक प्रक्रिया के विभिन्न चरणों में हैं।

आगे क्या होगा

सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि गुरुवार को इस मामले में पुनः सुनवाई होगी। अदालत से यह अपेक्षा की जा रही है कि वह राज्य सरकार को नमाज के लिए स्वीकार्य वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने हेतु स्पष्ट निर्देश दे। इस मामले का निर्णय भोजशाला स्थल पर दोनों समुदायों के अधिकारों और प्रशासनिक दायित्वों की दिशा तय करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी तीन शुक्रवार बीत गए और अनुपालन नहीं हुआ — यह प्रशासनिक विफलता का स्पष्ट संकेत है। राज्य सरकार के दोनों वैकल्पिक प्रस्तावों को अव्यावहारिक बताकर नकारे जाने से यह भी स्पष्ट होता है कि ज़मीनी स्तर पर सहमति बनाने की कोशिश नहीं की गई। देश में धार्मिक स्थलों से जुड़े विवादों की बढ़ती संख्या के बीच, इस मामले में अदालत की सक्रियता और प्रशासन की जवाबदेही दोनों की कसौटी पर कसा जाना ज़रूरी है।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भोजशाला विवाद में सुप्रीम कोर्ट का ताज़ा आदेश क्या है?
सर्वोच्च न्यायालय ने 29 जुलाई 2026 को मुस्लिम पक्ष की याचिका पर सुनवाई की और गुरुवार को पुनः सुनवाई का भरोसा दिया। मुख्य न्यायाधीश ने राज्य सरकार से पूछा कि मुस्लिम पक्ष को वैकल्पिक नमाज स्थल की जानकारी क्यों नहीं दी जा रही।
मुस्लिम पक्ष को भोजशाला के पास नमाज की जगह क्यों नहीं मिल रही?
प्रशासन ने नमाज के लिए भोजशाला से दो किलोमीटर दूर स्थान निर्धारित किया है, जिसे मुस्लिम पक्ष ने अस्वीकार कर दिया। राज्य सरकार द्वारा दिया गया दूसरा विकल्प भी मुस्लिम पक्ष को अव्यावहारिक लगा क्योंकि वह एक ब्रुअरी परिसर का हिस्सा बताया गया।
धार भोजशाला विवाद की पृष्ठभूमि क्या है?
धार भोजशाला को हिंदू पक्ष माँ सरस्वती का मंदिर मानता है जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद के रूप में देखता है। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के फैसले के विरुद्ध दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने प्रशासन को मुस्लिम पक्ष को भोजशाला के निकट नमाज स्थल उपलब्ध कराने का आदेश दिया था।
मुस्लिम पक्ष ने नमाज के लिए कौन-सा स्थान माँगा है?
अधिवक्ता हुजैफा अहमदी ने सुझाव दिया कि भोजशाला के निकट स्थित एक दरगाह के सामने की भूमि नमाज के लिए उपयुक्त है और वही आवंटित की जानी चाहिए। उनका कहना है कि यह स्थान व्यावहारिक और पर्याप्त रूप से निकट है।
भोजशाला मामले में आगे क्या होगा?
सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार को पुनः सुनवाई निर्धारित की है। अदालत से यह अपेक्षा है कि वह राज्य सरकार को स्वीकार्य वैकल्पिक नमाज स्थल उपलब्ध कराने के लिए स्पष्ट निर्देश देगी।
राष्ट्र प्रेस
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