भोजशाला में शांतिपूर्ण धार्मिक गतिविधियां, 1,000 पुलिसकर्मी तैनात; नमाज की वैकल्पिक जगह पर सहमति अभी बाकी
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर में 7 अगस्त को हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों ने अपनी-अपनी धार्मिक गतिविधियां बिना किसी व्यवधान के संपन्न कीं। प्रशासन ने परिसर और आसपास के संवेदनशील इलाकों में करीब 1,000 पुलिसकर्मी तैनात किए थे, जिससे शहर में पूर्ण शांति और सांप्रदायिक सद्भाव बना रहा। हालांकि, मुस्लिम समुदाय के लिए नमाज की वैकल्पिक जगह पर दोनों पक्षों के बीच आम सहमति अभी तक नहीं बन पाई है।
मुख्य घटनाक्रम
शुक्रवार को मुस्लिम समुदाय ने निर्धारित स्थान पर जुमे की नमाज अदा की, जबकि हिंदू समुदाय के सदस्यों ने देवी वाग्देवी की प्रतिमा की पूजा-अर्चना के बाद हनुमान चालीसा का पाठ किया। दोनों समुदायों ने अपने-अपने धार्मिक कार्यक्रम योजना के अनुसार पूरे किए और किसी भी अप्रिय घटना की कोई सूचना नहीं मिली।
गौरतलब है कि पिछले शुक्रवार को भारी बारिश के कारण परिसर में कीचड़ हो गई थी, जिसके चलते प्रशासन ने एक वैकल्पिक जगह का सुझाव दिया था। मुस्लिम समुदाय द्वारा वहाँ जाने से इनकार करने के बाद अधिकारियों ने मूल स्थान पर ही बेहतर व्यवस्था की। नगरपालिका ने रास्ते को समतल करवाया, जिससे नमाजियों को कोई असुविधा न हो।
नमाज स्थल पर सहमति बाकी
धार के पुलिस अधीक्षक सचिन शर्मा ने बताया, '40-फीट दरगाह या रकबा नंबर 639 पर एक वैकल्पिक जगह तय की गई है, लेकिन समुदायों के बीच आम सहमति नहीं बन पाई है। अगर वे आम सहमति पर पहुंचते हैं, तो आने वाले शुक्रवारों को उन जगहों पर नमाज की इजाजत दी जाएगी।' यह विवाद ऐसे समय में है जब भोजशाला से जुड़ी कानूनी कार्यवाही सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। एसपी सचिन शर्मा के अनुसार परिसर और आसपास के इलाकों में लगभग 1,000 पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे। पुलिस ने बिसलेरी रोड पर बैरिकेड्स लगाकर आवाजाही को सख्ती से नियंत्रित किया। पुलिस और संबंधित विभागीय अधिकारियों के समन्वय से संवेदनशील ऐतिहासिक परिसर में कार्यक्रम बिना किसी घटना के संपन्न हुए।
सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामला
यह घटनाक्रम भोजशाला से जुड़ी चल रही कानूनी लड़ाई की पृष्ठभूमि में हुआ। मुस्लिम पक्ष की चार याचिकाओं पर 5 अगस्त को जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की सर्वोच्च न्यायालय पीठ के समक्ष सुनवाई होनी थी, किंतु वह नहीं हो सकी। अब नई तारीख का इंतजार है। यह ऐसे समय में आया है जब भोजशाला परिसर को लेकर दोनों समुदायों के बीच वर्षों से विवाद चला आ रहा है।
क्या होगा आगे
प्रशासन का ध्यान अब दोनों समुदायों के बीच वैकल्पिक नमाज स्थल पर सहमति बनाने पर है। जब तक सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई की नई तारीख तय नहीं होती और समुदायों में आपसी सहमति नहीं बनती, तब तक मौजूदा व्यवस्था जारी रहने की संभावना है।