भोजशाला परिसर के पास खसरा 612 पर जुमे की नमाज, 800-1,000 जवानों की तैनाती; स्थानीयों ने जताई आपत्ति
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के धार जिले में भोजशाला कॉम्प्लेक्स की बाउंड्री वॉल से सटी खसरा नंबर 612 की भूमि पर 31 जुलाई को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच जुमे की नमाज अदा की गई। सर्वोच्च न्यायालय के अंतरिम निर्देशों के अनुपालन में जिला प्रशासन ने यह व्यवस्था की, जिसमें मुस्लिम समुदाय के लगभग 150 से 200 लोगों ने शांतिपूर्ण ढंग से नमाज अदा की। हालाँकि, कुछ स्थानीय निवासियों ने नमाज से पहले इस भूमि पर निजी स्वामित्व का दावा करते हुए आपत्ति दर्ज कराई।
मुख्य घटनाक्रम
नमाज से पूर्व, जिला प्रशासन ने खसरा नंबर 612 की भूमि को समतल किया, बारिश को देखते हुए तिरपाल बिछाए और पूरे क्षेत्र में बैरिकेडिंग की। स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की दो कंपनियों सहित 800 से 1,000 सुरक्षाकर्मी घटनास्थल और आसपास के संवेदनशील इलाकों में तैनात किए गए। दोपहर को मुस्लिम समुदाय के लोग तय स्थान पर पहुँचे और बिना किसी अप्रिय घटना के नमाज संपन्न हुई।
स्थानीय निवासियों की आपत्ति
नमाज से पहले स्थानीय निवासियों का एक समूह घटनास्थल पर इकट्ठा हुआ और उन्होंने इस व्यवस्था पर कड़ा विरोध जताया। उनका दावा था कि खसरा नंबर 612 की यह भूमि उनके परिवारों की निजी संपत्ति है और वे वर्षों से उस पर खेती करते आ रहे हैं। निवासियों ने यह भी स्पष्ट किया कि वे अपने स्वामित्व अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी मार्ग अपनाएँगे।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
विरोध के बाद सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (SDM) राजकुमार हलदर अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के साथ घटनास्थल पर पहुँचे और आपत्ति जताने वाले निवासियों से बातचीत की। यह आश्वासन मिलने के बाद कि उनकी आपत्तियों पर उचित सुनवाई होगी, प्रदर्शनकारी शांतिपूर्वक वहाँ से हट गए। SDM हलदर ने बताया कि यह व्यवस्था सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में की गई थी और यह एक अस्थायी इंतजाम है जो न्यायालय के अंतिम फैसले के अधीन रहेगा।
पुलिस का बयान
पुलिस अधीक्षक विजय डाबर ने बताया कि नमाज शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो, इसके लिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। उन्होंने कहा कि STF की दो कंपनियों सहित 800 से 1,000 जवान तैनात थे और शहर के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा पहले से कड़ी कर दी गई थी। पूरे दिन प्रशासन ने स्थिति पर निगरानी बनाए रखी और किसी भी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।
आगे क्या
गौरतलब है कि भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद वर्षों से संवेदनशील बना हुआ है और मामला अभी सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है। SDM हलदर के अनुसार, अदालत का अंतिम आदेश अभी आना बाकी है और उसी के आधार पर भविष्य की व्यवस्था तय होगी। स्थानीय निवासियों द्वारा कानूनी कार्रवाई की घोषणा के साथ, इस भूमि के स्वामित्व का मुद्दा आने वाले दिनों में और जटिल हो सकता है।