क्या हिंदू अपने धर्म में दखलअंदाजी स्वीकार करेगा? साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने भोजशाला मामले पर कहा
सारांश
Key Takeaways
- भोजशाला
- हिंदू
- सुप्रीम कोर्ट का निर्णय अस्थायी है।
- हिंदू समाज अब जाग चुका है।
- कांग्रेस ने इस मुद्दे पर ध्यान नहीं दिया।
भोपाल, 23 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने भोजशाला विवाद पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि यह मां सरस्वती का स्थायी मंदिर है। यहां शांति से पूजा का आयोजन होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंदू अपने धर्म में किसी भी प्रकार की दखलअंदाजी को स्वीकार नहीं करेगा।
साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर अपनी राय व्यक्त करते हुए कहा, "मैं सुप्रीम कोर्ट का बहुत सम्मान करती हूं। यह एक संवैधानिक संस्था है। हालांकि, भोजशाला मामले में इसका निर्णय अस्थायी है। यह केवल एक व्यवस्था है, जिससे वे (मुस्लिम पक्ष) अपनी नमाज पढ़ सकें और हम अपने धर्म के अनुसार पूजा कर सकें।"
समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में साध्वी प्रज्ञा सिंह ने कहा कि परतंत्र काल में सरस्वती मंदिर पर कुठाराघात हुआ था। आज भी उस मंदिर के साथ न्याय नहीं हुआ है। हिंदू समाज को हमेशा से दबाया और सताया गया है। पूर्व सांसद ने कहा कि आज हिंदू समाज जाग चुका है, जिसे अपने देवी-देवताओं या मंदिरों के अपमान का बदला नहीं लेना है, बल्कि उस दाग को हटाकर फिर से मंदिरों के वैभव को लौटाकर लाना है।
उन्होंने कहा, "यह मां सरस्वती का मंदिर था, जिस तरह से वर्तमान में इसे रखा जा रहा है। अब हिंदू प्रयास कर रहे हैं। मंदिर का स्थायी हल निकलना आवश्यक है। हमें अपना मंदिर स्वतंत्र चाहिए। मुगल काल में जिस तरह मंदिरों के अपमान के लिए मस्जिदें खड़ी की गईं, वह अब स्वीकार नहीं होना चाहिए।"
कांग्रेस पर निशाना साधते हुए साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने कभी इस मंदिर पर ध्यान नहीं दिया, बल्कि हिंदुओं और सनातन धर्म के ऊपर कुठाराघात किया। दशकों से यही देखा गया है कि कभी भी हिंदुओं के साथ न्याय नहीं हुआ।
उन्होंने यह भी कहा कि यह हमारी मां सरस्वती का स्थायी मंदिर है। इसे बिना किसी रुकावट के रहना चाहिए, और यहां शांति से पूजा जारी रहनी चाहिए। किसी भी प्रकार की पाबंदी की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि भारत आजाद है। हर किसी को अपनी पूजा पद्धति का पालन करने की स्वतंत्रता है। उन्होंने कहा, "हिंदू धर्म में समुदायों और संप्रदायों को अपने धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता दी गई है, लेकिन हमने कभी भी हिंदू धर्म में दखलअंदाजी स्वीकार नहीं की है और न ही कभी करेंगे।"