बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने राजस्व कर्मियों को दी निलंबन की चेतावनी
सारांश
Key Takeaways
- उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने राजस्व कर्मियों को दी निलंबन की चेतावनी।
- सरकारी कार्यों के सुचारू संचालन के लिए कड़ी कार्रवाई का आश्वासन।
- हड़ताल समाप्त होने पर आवेदनों का त्वरित निस्तारण।
पटना, १० मार्च (राष्ट्र प्रेस)। बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि कोई भी षड्यंत्र सफल नहीं होगा। जब इरादे स्पष्ट होते हैं, तो डबल इंजन वाली सरकार की नीतियों को सफलता प्राप्त होती है। जो लोग पूर्ण पारदर्शिता, ईमानदारी और निष्ठा के साथ जनता के लिए कार्य करते हैं, उन्हें सम्मान मिलता है। दबाव और जबरदस्ती पर आधारित राजनीति अब नहीं चलेगी।
उन्होंने ९ मार्च को बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि वे अपना आंदोलन जल्दी समाप्त नहीं करते हैं, तो उन्हें निलंबित किया जाएगा। विभागीय कार्यों के लिए उनके स्थान पर वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी।
उपमुख्यमंत्री ने सोमावर को संवाददाता सम्मेलन में अपील की कि अंचलाधिकारी कुछ व्यक्तियों के बहकावे में न आएं और समय रहते अपने कार्य पर लौट आएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की सहानुभूति को कमजोरी नहीं समझा जाए। जनता के कार्यों को प्रभावित करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
डिप्टी सीएम ने कहा कि भूमि से संबंधित जिन मामलों में कोई आपत्ति नहीं है, उन्हें १४ दिनों के भीतर निपटाया जाए। खसरा और लगान में छोटी त्रुटियों के सुधार के लिए ३५ दिन, विशेष-जटिल मामलों के समाधान के लिए ७५ और परिमार्जन में सुधार के लिए १५ दिन का समय निर्धारित किया गया है।
उन्होंने बताया कि पिछले साल अगस्त में करीब ४६ लाख आवेदनों का ३१ मार्च तक निपटारा करने का लक्ष्य रखा गया था। इनमें ४० लाख आवेदन केवल परिमार्जन के हैं। यह सब योजनाबद्ध तरीके से किया गया है। पहले सीओ और अब कर्मचारी हड़ताल पर हैं।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि हड़ताल खत्म होते ही आवेदनों का निस्तारण करना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि प्रत्येक शनिवार को अंचल कार्यालय में आयोजित संवाद में थाने के अधिकारी मौजूद रहेंगे। इसकी निगरानी जिलों के निगरानी डीएम और एसपी करेंगे। डिप्टी सीएम ने कहा कि राजस्व अधिकारी अब अंचल के बजाय पंचायत स्तर पर बैठकर जन शिकायतों का समाधान करेंगे। उन्होंने बताया कि राजस्व न्यायालय के मामलों के निस्तारण के लिए समयसीमा निर्धारित की गई है।