बिहार सरकार ने हड़ताली राजस्व अधिकारियों को २५ मार्च तक कार्य पर लौटने का आदेश दिया
सारांश
Key Takeaways
- बिहार सरकार ने सामूहिक अवकाश को अवैध करार दिया है।
- हड़ताली अधिकारियों को २५ मार्च तक काम पर लौटने का अल्टीमेटम दिया गया है।
- अनुपस्थित रहने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
- मुख्यमंत्री की महत्वपूर्ण योजनाओं के मद्देनजर यह निर्णय लिया गया।
- हड़ताल समाप्त करने वाले अधिकारियों को सहानुभूति दी जाएगी।
पटना, २४ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। बिहार सरकार ने मंगलवार को हड़ताली राजस्व अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए सामूहिक अवकाश को अवैध घोषित किया है। सरकार ने इन अधिकारियों को २५ मार्च तक कार्य पर लौटने का अल्टीमेटम भी जारी किया है।
उपमुख्यमंत्री एवं राजस्व तथा भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने मंगलवार को स्पष्ट चेतावनी दी है कि निर्धारित समयसीमा २५ मार्च तक कार्य पर वापस नहीं लौटने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी अनुशासनिक कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में विभाग के अपर सचिव आजीव वत्सराज के स्तर से एक विभागीय पत्र भी जारी किया गया है।
डिप्टी सीएम ने कहा कि बिहार राजस्व सेवा के कुछ अधिकारियों द्वारा नौ मार्च से घोषित सामूहिक अवकाश न केवल नियमों के खिलाफ है, बल्कि इससे आम जनता के कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जनहित और प्रशासनिक व्यवस्था से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगी।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा और भूमि सुधार जनकल्याण संवाद जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों के कारण राजस्व अधिकारियों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। ऐसे समय में अनुपस्थित रहना गंभीर लापरवाही के बराबर है।
उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सभी संबंधित अधिकारियों को २५ मार्च की शाम पांच बजे तक अपने पद पर लौट आना होगा। निर्धारित समयसीमा के बाद अनुपस्थित रहने वालों के खिलाफ सेवा टूट, वेतन कटौती और अन्य कठोर अनुशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि जो अधिकारी निर्धारित अवधि के भीतर कार्य पर लौट आते हैं, उनके मामलों में अवकाश अवधि के समायोजन पर नियमों के अनुसार सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि वे हड़ताल समाप्त कर शीघ्र अपने दायित्वों का निर्वहन करें, जिससे आम जनता को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।