बड़ा फैसला: सीएम सम्राट चौधरी की अधिकारियों को दो टूक — एक महीने से ज्यादा फाइल रोकी तो खैर नहीं
सारांश
Key Takeaways
- सीएम सम्राट चौधरी ने 26 अप्रैल को तारापुर दौरे पर अधिकारियों को चेतावनी दी — एक माह से अधिक फाइल लंबित रखने पर कार्रवाई होगी।
- मुख्यमंत्री कार्यालय अब ब्लॉक और अंचल स्तर तक प्रशासनिक मॉनिटरिंग करेगा।
- बिहार में 125 यूनिट तक बिजली मुफ्त और हर घर एक किलोवाट सोलर ऊर्जा देने की योजना की घोषणा।
- ढोल पहाड़ी, असरगंज में ₹12.49 करोड़ की इको-टूरिज्म परियोजना का शिलान्यास।
- बाबा उच्चेश्वरनाथ धाम, टेटिया बंबर में ₹26.31 करोड़ की इको-टूरिज्म परियोजना का शिलान्यास।
- सरकारी जमीन पर अतिक्रमण के खिलाफ बिना भेदभाव कार्रवाई — सीएम के अपने घर पर भी प्रशासनिक एक्शन जारी।
मुंगेर, 26 अप्रैल — बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने रविवार को अपने विधानसभा क्षेत्र तारापुर पहुंचकर प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ कड़ा संदेश दिया। उन्होंने साफ कहा कि यदि कोई पदाधिकारी एक महीने से अधिक किसी फाइल को लंबित रखता है, तो उसके विरुद्ध तत्काल कार्रवाई की जाएगी। यह बयान बिहार की नौकरशाही में नई जवाबदेही की शुरुआत का संकेत माना जा रहा है।
तारापुर में जनसंबोधन और प्रशासनिक चेतावनी
सीएम सम्राट चौधरी ने तारापुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'मन की बात' कार्यक्रम को जनता के साथ सुना और उसके बाद लोगों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पद एक बड़ी जिम्मेदारी है और वे इसे पूरी निष्ठा से निभाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
उन्होंने घोषणा की कि अब मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा ब्लॉक और अंचल स्तर तक सीधी मॉनिटरिंग की जाएगी। यह व्यवस्था बिहार में जमीनी स्तर पर शासन को पारदर्शी बनाने की दिशा में एक अहम कदम है।
गौरतलब है कि बिहार में फाइलों के लंबित रहने की समस्या वर्षों पुरानी है और आम जनता को अपने छोटे-छोटे कामों के लिए महीनों दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं। सम्राट चौधरी की यह चेतावनी उस पुरानी प्रशासनिक संस्कृति को तोड़ने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है।
अतिक्रमण और कानून के समान व्यवहार पर कड़ा रुख
सीएम सम्राट चौधरी ने अतिक्रमण के मुद्दे पर भी कोई नरमी नहीं दिखाई। उन्होंने कहा कि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करने वालों के विरुद्ध बिना किसी भेदभाव के कार्रवाई होगी। उन्होंने यह भी बताया कि तारापुर में उनके अपने घर पर भी प्रशासन की कार्रवाई हो रही है, जो इस बात का प्रमाण है कि कानून सभी के लिए समान है।
यह बयान राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है क्योंकि अक्सर सत्ताधारी दलों के नेताओं पर अपने समर्थकों को संरक्षण देने के आरोप लगते हैं। अपने ही घर पर कार्रवाई का उल्लेख कर सम्राट चौधरी ने एक राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है।
बिजली और सौर ऊर्जा पर बड़ी घोषणाएं
सीएम ने बताया कि बिहार में 125 यूनिट तक बिजली मुफ्त दी जा रही है और सरकार के पास इसके लिए पर्याप्त संसाधन हैं। उन्होंने हर घर तक एक किलोवाट सोलर बिजली पहुंचाने की महत्वाकांक्षी योजना की भी जानकारी दी।
इस योजना के तहत भविष्य में आम नागरिक बिजली के लिए सरकार पर निर्भर नहीं रहेंगे। यह कदम केंद्र सरकार की पीएम सूर्यघर योजना के अनुरूप है, जिसका लक्ष्य देश के एक करोड़ घरों को सौर ऊर्जा से जोड़ना है।
ढोल पहाड़ी और बाबा उच्चेश्वरनाथ धाम — इको-टूरिज्म को मिला बढ़ावा
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने असरगंज प्रखंड की ऐतिहासिक ढोल पहाड़ी पर मंदिर में पूजा-अर्चना की और ₹12.49 करोड़ की इको-टूरिज्म परियोजना का शिलान्यास किया। इस परियोजना के तहत पिकनिक स्पॉट, पार्क, भव्य शिव प्रतिमा, बैंक्वेट हॉल, क्राफ्ट शॉप्स, आधुनिक पार्किंग, सोलर लाइट, रेन वाटर हार्वेस्टिंग और पेयजल सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
बाबा मौनीनाथ मंदिर और प्राचीन गुफाओं को पर्यटन सर्किट से जोड़कर इस क्षेत्र को धार्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनाया जाएगा। इसके अलावा टेटिया बंबर प्रखंड के बाबा उच्चेश्वरनाथ धाम के विकास के लिए ₹26.31 करोड़ की एक और इको-टूरिज्म परियोजना का शिलान्यास भी किया गया।
देवघरा पहाड़ पर स्थित यह धाम आस्था और इतिहास का संगम है, जहां महाशिवरात्रि पर विशाल मेला आयोजित होता है। इन दोनों परियोजनाओं से मुंगेर जिले में पर्यटन और स्थानीय रोजगार को बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
पूर्व सीएम नीतीश कुमार की विरासत और आगे की राह
सम्राट चौधरी ने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विकास कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने लंबे समय तक बिहार को संवारने का काम किया। अब उसी विरासत को आगे बढ़ाना उनकी प्राथमिकता है।
यह बयान राजनीतिक संतुलन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। एनडीए के भीतर जेडीयू और बीजेपी के बीच तालमेल बनाए रखने की जरूरत को देखते हुए सम्राट चौधरी का यह संदेश गठबंधन की एकजुटता को रेखांकित करता है।
आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मुख्यमंत्री कार्यालय की मॉनिटरिंग व्यवस्था जमीन पर कितनी प्रभावी साबित होती है और क्या अधिकारियों में वास्तविक जवाबदेही सुनिश्चित हो पाती है।