PM मोदी को FAO का 'एग्रीकोला मेडल 2026', पद्मश्री किसान रामसरन वर्मा बोले — किसानों का सम्मान
सारांश
मुख्य बातें
संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वर्ष 2026 के लिए अपने सर्वोच्च सम्मान 'एग्रीकोला मेडल' से नवाज़ा है। इटली में FAO महानिदेशक क्यू डोंग्यू ने बुधवार को यह पुरस्कार किसानों के कल्याण, खाद्य सुरक्षा को सुदृढ़ करने, कृषि उत्पादकता बढ़ाने और गरीबी उन्मूलन में भारत के योगदान के लिए प्रदान किया। इस ऐतिहासिक सम्मान पर उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के प्रगतिशील किसान और पद्मश्री सम्मानित रामसरन वर्मा ने प्रसन्नता व्यक्त की है।
रामसरन वर्मा की प्रतिक्रिया
रामसरन वर्मा ने कहा कि यह सम्मान केवल प्रधानमंत्री का नहीं, बल्कि देश के करोड़ों किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और भारत की कृषि नीतियों का सम्मान है। उन्होंने कहा, 'प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारतीय कृषि को एक नई दिशा और नई पहचान मिली है।' उनके अनुसार, मिलेट्स (मोटे अनाज) को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने, डिजिटल कृषि ढाँचे को मज़बूत करने और प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के प्रयासों से किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिल रहा है।
वर्मा ने यह भी कहा कि आज भारत की कृषि नीति किसान-केंद्रित और नवाचार-आधारित बन चुकी है, और यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की कृषि व्यवस्था की सराहना हो रही है।
FAO ने क्यों दिया यह सम्मान
FAO महानिदेशक क्यू डोंग्यू ने भारत की जनकल्याणकारी योजनाओं की विशेष सराहना की। उन्होंने रेखांकित किया कि भारत में 80 करोड़ लोगों तक खाद्य सुरक्षा व्यवस्था के अंतर्गत मुफ़्त राशन पहुँचाया जा रहा है, जबकि 11 करोड़ से अधिक किसानों को किसान सम्मान निधि के ज़रिए सीधी आय सहायता प्राप्त हो रही है। इन आँकड़ों को उन्होंने वैश्विक खाद्य सुरक्षा के संदर्भ में उल्लेखनीय बताया।
FAO प्रमुख ने प्राकृतिक और पुनर्योजी खेती को बढ़ावा देने की भारत की पहल की भी प्रशंसा की। उन्होंने FAO के साथ मिलकर 'इंटरनेशनल ईयर ऑफ मिलेट्स' के माध्यम से पौष्टिक मोटे अनाज को वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय बनाने में भारत की भूमिका को विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण बताया।
एग्रीकोला मेडल का महत्त्व
एग्रीकोला मेडल FAO का सर्वोच्च पुरस्कार है, जो कृषि, खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण विकास में असाधारण योगदान के लिए प्रदान किया जाता है। यह पुरस्कार ऐसे समय में मिला है जब भारत वैश्विक कृषि नीति में एक अग्रणी भूमिका निभाने की दिशा में अग्रसर है। गौरतलब है कि भारत ने 2023 को 'अंतरराष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष' के रूप में मनाने के लिए संयुक्त राष्ट्र में प्रस्ताव रखा था, जिसे व्यापक समर्थन मिला था।
आम जनता और किसानों पर असर
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इस अंतरराष्ट्रीय मान्यता से भारत की कृषि-नीति की साख वैश्विक मंच पर और मज़बूत होगी। इससे कृषि निर्यात, तकनीकी सहयोग और अंतरराष्ट्रीय कृषि वित्तपोषण के नए अवसर खुल सकते हैं। यह सम्मान देश के उन लाखों किसानों के लिए भी एक संदेश है जो प्राकृतिक खेती और मिलेट्स उत्पादन की ओर रुख कर रहे हैं।